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Friday, 6 March, 2026
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एआईएफएफ ने प्रभाकरण को बर्खास्त करने के लिए कार्यकारी समिति के ‘ड्राफ्ट मिनट’ में बदलाव किया

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(फिलेम दीपक सिंह)

नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) पता चला है कि पिछले महीने महासचिव शाजी प्रभाकरण की बर्खास्तगी से संबंधित अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) की कार्यकारी समिति की बैठक के ‘ड्राफ्ट मिनट’ को दो दिन के अंदर बदल दिया गया। दिल्ली उच्च न्यायालय के उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगाये जाने के बाद यह कदम उठाया गया।

दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने आठ दिसंबर को प्रभाकरण की बर्खास्तगी पर अंतरिम रोक का आदेश दिया था। पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता (प्रभाकरण) ने कहा था कि यह बर्खास्तगी एआईएफएफ के संविधान में दी हुई प्रक्रिया से पूरी तरह विपरीत है।

एआईएफएफ के अनुच्छेद 32 के खंड 11 के अनुसार, ‘‘कार्यकारी समिति एआईएफएफ अध्यक्ष के प्रस्ताव पर ही महासचिव को नियुक्त या बर्खास्त करेगी। ’’

प्रभाकरण ने अपने वकील के जरिये कहा कि था कि उनकी बर्खास्तगी से संबंधित मुद्दा कार्यकारी समिति के समक्ष भी नहीं रखा गया था।

प्रभाकरण को सात नवंबर को विश्वासघात करने के लिए उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया था और एआईएफएफ की कार्यकारी समिति ने दो दिन बाद इस फैसले का समर्थन किया था। उन्हें जो बर्खास्तगी पत्र दिया गया था, उस पर एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे, उपाध्यक्ष एन ए हैरिस और कोषाध्यक्ष किपा अजय के हस्ताक्षर थे।

अब पता चला है कि एआईएफएफ ने नौ नवंबर को बैठक के ‘ड्राफ्ट मिनट’ (विवरण) को 14 दिसंबर को कार्यकारी समिति के सदस्यों को वितरित किया था जबकि यह वास्तविक बैठक के एक से ज्यादा महीने बाद दिया गया और यह दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रभाकरण की बर्खास्तगी पर अंतरिम रोक लगने के कुछ दिन बाद दिया गया।

एआईएफएफ ने फिर 16 दिसंबर को संशोधित विवरण भेजा जिसमें एक पैरा जोड़ा गया था जिसके अनुसार, ‘‘ सात नवंबर 2023 को महासचिव शाजी प्रभाकरण की बर्खास्तगी और कार्यवाहक महासचिव एम सत्यनारायण की नियुक्ति से संबंधित आपात समिति की बैठक के फैसलों का सत्यापन। ’’

14 दिसंबर के पहले के कार्रवाई के ‘ड्राफ्ट मिनट’ में आपात समिति की बैठक से संबंधित हिस्से का जिक्र नहीं किया गया था।

एआईएफएफ के एक सीनियर अधिकारी से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इसमें बदलाव क्यों किये गये थे।

अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह मामला अभी विचाराधीन है और हम अदालत में ये विवरण सौंपने जा रहे हैं इसलिये कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। ’’

दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई की अगली तारीख 20 दिसंबर है। एआईएफएफ की ओर से आठ दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष कोई भी उपस्थित नहीं हुआ।

एआईएफएफ 2017 के संविधान के अनुच्छेद 34 में कहा गया है कि आपात समिति ही कार्यकारी समिति की दो बैठकों के बीच तुरंत निवारण से संबंधित सभी मामलों से निपटेगी। आपात बैठक में एआईएफएफ अध्यक्ष, मानद अध्यक्ष, छह उपाध्यक्ष और कोषाध्यक्ष होना चाहिए।

भाषा नमिता सुधीर

सुधीर

नमिता

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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