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Wednesday, 10 June, 2026
होमरिपोर्टउत्तराखंड STI नीति-2026 लागू, विज्ञान और नवाचार के दम पर विकसित राज्य बनाने की तैयारी: धामी

उत्तराखंड STI नीति-2026 लागू, विज्ञान और नवाचार के दम पर विकसित राज्य बनाने की तैयारी: धामी

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप सूचना प्रौद्योगिकी, सुशासन एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग ने आधिकारिक रूप से उत्तराखंड STI नीति-2026 जारी कर दी है. इसका उद्देश्य विज्ञान और तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देना और उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बनाना है.

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को कहा कि उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (STI) नीति-2026 एक ऐतिहासिक दस्तावेज है, जो राज्य को ज्ञान आधारित, शोध केंद्रित और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे ले जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य केवल विज्ञान और तकनीक का विस्तार करना नहीं है, बल्कि इसे जनजीवन, सुशासन, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार सृजन से जोड़ना है. यह नीति युवाओं, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, वैज्ञानिकों और जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों को एक साझा मंच उपलब्ध कराएगी.

मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप सूचना प्रौद्योगिकी, सुशासन एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग ने आधिकारिक रूप से उत्तराखंड STI नीति-2026 जारी कर दी है. इसका उद्देश्य विज्ञान और तकनीक आधारित विकास को बढ़ावा देना और उत्तराखंड को विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी का प्रमुख केंद्र बनाना है.

नीति में शोध, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया है. साथ ही स्थानीय जरूरतों और चुनौतियों के समाधान के लिए विज्ञान एवं तकनीक के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा. आर्थिक विकास, सामाजिक समावेशन और पर्यावरणीय संतुलन के माध्यम से सतत विकास को भी प्राथमिकता दी गई है.

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा, जो नीति के संचालन, निगरानी और मूल्यांकन का कार्य करेगा. इसके अलावा राज्यभर में शोध और नवाचार गतिविधियों को मजबूत करने के लिए विकेंद्रीकृत संस्थागत ढांचा विकसित किया जाएगा.

नीति के तहत विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए व्यापक समन्वय तंत्र बनाया जाएगा. साथ ही सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स में STI इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति गठित की जाएगी.

नीति के तहत वैज्ञानिक जानकारी, शोध निष्कर्षों और संसाधनों तक सभी हितधारकों की आसान पहुंच सुनिश्चित की जाएगी. सरकारी सहायता से होने वाले शोध कार्यों के आंकड़ों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा जाएगा और जरूरत के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा.

‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तकनीक के स्वदेशीकरण और स्थानीयकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा. राज्य की जरूरतों के अनुरूप स्थानीय तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शोध और नवाचार से जोड़ा जाएगा.

शिक्षा क्षेत्र में विज्ञान, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा. छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे. नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक टीचिंग-लर्निंग सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे.

राज्य में विज्ञान के प्रचार-प्रसार और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए साइंस सिटी, साइंस सेंटर, प्लेनेटेरियम, अटल टिंकरिंग लैब, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) लैब, खगोल विज्ञान केंद्र और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना है.

नीति में AI, ब्लॉकचेन, रोबोटिक्स, ड्रोन, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR) जैसी उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया गया है. इसके अलावा अंतरिक्ष तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो तकनीक, डिजिटल तकनीक, खाद्य-जल-ऊर्जा सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में शोध एवं विकास को बढ़ावा दिया जाएगा.

जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं, संयुक्त शोध परियोजनाएं, फेलोशिप और छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू की जाएंगी. राज्य के वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल भी विकसित किया जाएगा.

इसके अलावा उत्तराखंड में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार वेधशाला (STI Observatory) स्थापित की जाएगी, जहां सभी योजनाओं, कार्यक्रमों, अनुदानों और प्रोत्साहनों की जानकारी उपलब्ध होगी. नवप्रवर्तकों को पेटेंट, कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा अधिकार और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में भी सहायता दी जाएगी.

Uttarakhand State Council for Science and Technology (UCOST) के महानिदेशक Durgesh Pant ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. नई नीति इन चुनौतियों से निपटने के लिए विज्ञान एवं तकनीक संस्थानों, शोध संगठनों, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और नवप्रवर्तकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी.

उन्होंने कहा कि नीति के माध्यम से महिलाओं, ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के लोगों, वंचित वर्गों और दिव्यांगजनों को विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे. इससे राज्य में समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा.

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