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Saturday, 7 February, 2026
होमरिपोर्टराष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन सम्मेलन का शुभारंभ, MP को मिले 354 करोड़

राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन सम्मेलन का शुभारंभ, MP को मिले 354 करोड़

इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशुकल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया.

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सीहोर/अमलाहा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर जिले के अमलाहा में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्र-स्तरीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया.

इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशुकल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया.

राष्ट्रीय दलहन मिशन के तहत मध्यप्रदेश को 354 करोड़ रुपये की बजट राशि प्राप्त हुई है. कार्यक्रम के दौरान Pulses Mission Portal का शुभारंभ किया गया. साथ ही जैविक खेती के विस्तार और कृषि क्षेत्र में नवाचार व विशेष योगदान देने वाले किसानों को पुरस्कार भी वितरित किए गए.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री चौहान ने कृषि अनुसंधान एवं उत्पादों पर आधारित प्रदर्शनी का शुभारंभ कर उसका अवलोकन किया. सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों सहित देश के कई राज्यों के कृषि मंत्रियों ने सहभागिता की.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं. इकार्डा जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व और उत्साह का विषय है. उन्होंने कहा कि भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है—“अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है.

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश इस वर्ष ‘किसान कल्याण वर्ष’ मना रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है. इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है. इसके तहत किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का फूड बास्केट है. भारतीय संस्कृति में अन्नदेवता के माध्यम से समाज का विकास हुआ है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के विकास के लिए गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण को प्राथमिकता दी है. आधुनिक समय में खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से कई चुनौतियां सामने आई हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश का शरबती गेहूं दुनिया भर में पहचान बना रहा है. बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा, जबकि टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा.

उन्होंने कहा कि देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है. मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घटा है, जबकि दालों का आयात देश के हित में नहीं है. उन्होंने राज्य सरकार को बधाई देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है.

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