भोपाल/उज्जैन: उज्जैन के तारामंडल परिसर में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ का शुभारंभ हुआ. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शामिल हुए. सम्मेलन में प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर दिया गया. साथ ही ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) के स्थान पर महाकाल स्टैंडर्ड टाइम (MST) की अवधारणा पर भी चर्चा हुई.
इस मौके पर 15 करोड़ रुपये की लागत से बने विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया गया. सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत 701.86 करोड़ रुपये की लागत के 4-लेन बायपास का भूमिपूजन भी हुआ. इसके अलावा 22.52 करोड़ रुपये की सम्राट विक्रमादित्य हेरिटेज परियोजना के विस्तार की घोषणा की गई.
सम्मेलन में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की प्राचीन खगोल परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी वैज्ञानिक सोच से जुड़ सके और उज्जैन को काल गणना के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके.
