गोरखपुर: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में लगने वाला खिचड़ी मेला श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का अनूठा संगम है. मकर संक्रांति से पूर्व शुरू होकर माहभर से अधिक समय तक चलने वाले इस मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. सूर्यदेव के उत्तरायण होने पर महायोगी गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा पूरी तरह लोक आस्था से जुड़ी हुई है. मंदिर में खिचड़ी के रूप में चढ़ाया गया अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है. गोरखनाथ मंदिर का अन्न क्षेत्र इस परंपरा का जीवंत उदाहरण है, जहां कोई भी जरूरतमंद खाली हाथ नहीं लौटता.
मंदिर में खिचड़ी पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाएगा. मान्यता है कि गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुगीन है.
मकर संक्रांति के दिन नाथ पंथ की परंपरा के अनुसार गोरक्षपीठाधीश्वर गुरु गोरखनाथ को लोक आस्था की खिचड़ी अर्पित कर जनकल्याण और समृद्धि की कामना करते हैं. उत्तर प्रदेश, बिहार, देश के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी देश नेपाल से भी लाखों श्रद्धालु शिवावतारी बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने पहुंचते हैं. मकर संक्रांति की भोर में सबसे पहले गोरक्षपीठ की ओर से पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ बाबा को खिचड़ी अर्पित करते हैं. इसके बाद नेपाल के राजपरिवार की ओर से लाई गई खिचड़ी चढ़ाई जाती है. तत्पश्चात मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं.
खिचड़ी महापर्व को लेकर मंदिर और मेला परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं के ठहरने, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है. गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब तक तीन बार खिचड़ी मेले की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं.
