लखनऊ: उत्तर प्रदेश जनजाति एवं लोक कला संस्कृति संस्थान प्रदेश की जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और जीवंत रखने का काम कर रहा है.
संस्थान थारू, बुक्सा, गोंड, बैगा सहित कई जनजातियों के 500 से अधिक पारंपरिक आभूषणों और बर्तनों का संरक्षण कर रहा है.
इन हस्तनिर्मित आभूषणों और बर्तनों को प्रदर्शनी के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ सकें.
संस्थान के अनुसार, यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समावेशी विकास की सोच के अनुरूप है.
संस्थान जनजातीय शिल्पकारों के कला-कौशल को पहचान दिलाने के साथ-साथ इन पारंपरिक कलाओं को आधुनिक दौर से जोड़ने का भी प्रयास कर रहा है.
