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Monday, 24 August, 2026
होमरिपोर्टपिता चलाते थे टैक्सी, बेटे ने पर्यटकों की समस्या देख खड़ा किया ‘नमस्ते सारथी’ स्टार्टअप

पिता चलाते थे टैक्सी, बेटे ने पर्यटकों की समस्या देख खड़ा किया ‘नमस्ते सारथी’ स्टार्टअप

देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत प्रशिक्षण लेकर BBA छात्र कार्तिक पांडेय ने बनाया ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, अब 15 बसों का नेटवर्क जुड़ा.

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पिथौरागढ़: “जितनी बड़ी मेहनत, उतना बड़ा उद्यम”—पिथौरागढ़ के रहने वाले कार्तिक पांडेय की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से एक सामान्य विचार को सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है. मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले कार्तिक के पिता वर्षों से टैक्सी चलाते हैं. बचपन से ही वह अपने पिता के साथ यात्राओं पर जाते थे. इसी दौरान उन्होंने पर्यटकों की एक बड़ी समस्या को करीब से देखा.

पिथौरागढ़ और चम्पावत आने वाले पर्यटकों को अक्सर सही कीमत पर भरोसेमंद टैक्सी, होटल और स्थानीय गाइड नहीं मिल पाते थे. जानकारी की कमी और बिचौलियों के कारण उन्हें ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते थे. इससे उनका यात्रा अनुभव भी प्रभावित होता था.

कार्तिक लंबे समय से इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे थे. वर्ष 2025 में उन्हें अपने महाविद्यालय में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद (EDII Ahmedabad) की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर चलाई जा रही देवभूमि उद्यमिता योजना (DUY) के तहत आयोजित उद्यमिता बूटकैंप में शामिल होने का मौका मिला.

यही उनके लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ. बूटकैंप में उन्होंने सीखा कि किसी सामान्य विचार को मजबूत बिजनेस आइडिया में कैसे बदला जाता है, बिजनेस मॉडल कैनवास कैसे बनाया जाता है, ग्राहकों तक पहुंचने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेबसाइट का इस्तेमाल कैसे किया जाता है और स्टार्टअप को व्यवस्थित तरीके से कैसे आगे बढ़ाया जाता है.

इन्हीं सीखों के आधार पर कार्तिक ने ‘नमस्ते सारथी’ नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया. इसके जरिए पर्यटक एक ही जगह से होटल, परिवहन और स्थानीय गाइड बुक कर सकते हैं. इसका उद्देश्य पारदर्शी कीमत, भरोसेमंद सेवाएं और बिना परेशानी के बेहतर यात्रा अनुभव देना है.

हालांकि शुरुआत में कार्तिक का बिजनेस मॉडल मजबूत था, लेकिन वह ज्यादा लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा था. ऐसे समय में उन्होंने फिर से देवभूमि उद्यमिता योजना के विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लिया. विशेषज्ञों ने उन्हें डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग, ग्राहकों तक पहुंचने की रणनीति और बिजनेस को बढ़ाने के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी.

इस पूरी यात्रा में एल.एस.एम. पिथौरागढ़ की डॉ. रुचिता पंघरिया ने भी उनका लगातार मार्गदर्शन किया. वह महाविद्यालय में देवभूमि उद्यमिता योजना की नोडल अधिकारी भी हैं. उनके साथ हुई कई ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठकों और विशेषज्ञों की सलाह से कार्तिक के स्टार्टअप को नई दिशा मिली.

आज ‘नमस्ते सारथी’ कुमाऊं क्षेत्र में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहा है. इस प्लेटफॉर्म ने पर्यटकों के लिए यात्रा को आसान, सुरक्षित और कम खर्च वाला बनाया है. बिचौलियों पर निर्भरता कम होने से पर्यटकों को उचित कीमत पर बेहतर सेवाएं मिल रही हैं. वहीं, स्थानीय सेवा देने वालों को भी सीधे ग्राहकों से जुड़ने का मौका मिल रहा है.

आज ‘नमस्ते सारथी’ के साथ 15 बसों का नेटवर्क जुड़ चुका है और इसका सेवा क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है. यह उपलब्धि दिखाती है कि सही मार्गदर्शन, लगातार सीखने की इच्छा और मेहनत से किसी भी विचार को सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है.

अपनी सफलता के बावजूद कार्तिक ने सीखना जारी रखा. वर्ष 2026 में उन्होंने एक बार फिर देवभूमि उद्यमिता योजना के रेजिडेंशियल बूटकैंप में हिस्सा लिया, ताकि अपने बिजनेस को और प्रभावी और आधुनिक बनाया जा सके. उनका मानना है कि उद्यमिता में सफलता एक बार मिलने वाली उपलब्धि नहीं है, बल्कि लगातार सीखने और खुद को बेहतर बनाने की प्रक्रिया है.

कार्तिक कहते हैं, “Namaste Saarthi लगातार बड़ा बनता रहेगा, जब तक मैं सीखता रहूंगा.”

कार्तिक पांडेय की यह कहानी सिर्फ एक स्टार्टअप की सफलता की कहानी नहीं है. यह दिखाती है कि देवभूमि उद्यमिता योजना युवाओं के विचारों को पहचानकर उन्हें व्यवहारिक ज्ञान, विशेषज्ञों की सलाह और लगातार मेंटरशिप के जरिए सफल कारोबार में बदलने में मदद कर रही है. आज जो विचार एक कक्षा में पैदा हुआ था, वह सफल व्यवसाय बनकर उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला रहा है.

देवभूमि उद्यमिता योजना का उद्देश्य सिर्फ नए कारोबार शुरू करवाना नहीं है, बल्कि युवाओं के नए विचारों और स्थानीय समस्याओं के समाधान को सफल व्यवसाय में बदलने के लिए उन्हें सही मार्गदर्शन और अवसर देना भी है. कार्तिक का ‘नमस्ते सारथी’ स्टार्टअप पर्यटन क्षेत्र की एक वास्तविक समस्या का समाधान पेश करता है और यह इस योजना की सफलता का एक अच्छा उदाहरण है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि हमारे युवा अपनी प्रतिभा, नए विचारों और उद्यमशीलता के बल पर उत्तराखंड को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. राज्य सरकार युवाओं के हर नए और अच्छे प्रयास को लगातार प्रोत्साहन और जरूरी सहयोग देती रहेगी.”

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