नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के अगले चरण के विकास के लिए ‘बस्तर 2.0’ का विजन प्रस्तुत किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में नक्सलवाद के कम होने और शांति बहाल होने पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व और सहयोग के लिए आभार जताया.
मुख्यमंत्री ने बस्तर के समग्र विकास के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट साझा किया, जिसमें पर्यटन, स्टार्टअप इकोसिस्टम, बुनियादी ढांचे का विस्तार और नवाचार आधारित विकास पर खास जोर दिया गया है. इस योजना का उद्देश्य आर्थिक प्रगति को तेज करना और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है.
सीएम साय ने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का निमंत्रण भी दिया. प्रस्तावित दौरे के दौरान कई बड़े प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन किए जाने की योजना है, जिससे क्षेत्र में विकास के नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ बस्तर क्षेत्र में भी नक्सलवाद समाप्त हो चुका है, जिससे स्थायी शांति का माहौल बना है. उन्होंने बताया कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है, जिसमें नए एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज विकसित किए जा रहे हैं. साथ ही इंद्रावती नदी पर बैराज निर्माण, रेलवे नेटवर्क के विस्तार और एयरपोर्ट सुविधाओं के विकास जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.
विकास विजन के तहत “Saturate, Connect, Facilitate, Empower और Engage” रणनीति पर काम किया जाएगा, ताकि बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं का तेजी से विस्तार हो सके. दूर-दराज के गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लंबित कार्य 2027 तक पूरे करने के साथ 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण की योजना है. इसके अलावा 61 नए प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र से विशेष सहायता का प्रस्ताव दिया गया है.
ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. शिक्षा के क्षेत्र में 45 ‘पोटा केबिन’ स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा. युवाओं के विकास के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टी-पर्पज हॉल बनाने का प्रस्ताव है. स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जाएंगे.
कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिससे करीब 31,840 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई सुविधा मिलेगी. इससे किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि होने की उम्मीद है.
सरकार ने आजीविका बढ़ाने के लिए तीन साल की योजना भी तैयार की है, जिसका लक्ष्य 2029 तक लगभग 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करना है.
‘नियद नेल्लानार 2.0’ योजना का विस्तार कर 7 मौजूदा जिलों के साथ गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों को भी शामिल किया गया है, ताकि विकास का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके.
‘अंजर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ पहल के तहत नई स्टार्टअप नीति लाई गई है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करना है. इसका उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना और नए रोजगार के अवसर पैदा करना है.
पर्यटन क्षेत्र में चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात तथा कांगेर वैली नेशनल पार्क को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है. एडवेंचर टूरिज्म के तहत कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसे प्रोजेक्ट्स भी बनाए जा रहे हैं.
‘बस्तर ओलंपिक’ और ‘बस्तर पंडुम’ जैसे सांस्कृतिक और खेल आयोजन क्षेत्र की पहचान को मजबूत कर रहे हैं. अब तक 1 लाख से अधिक युवाओं को स्किल ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिनमें से करीब 40 हजार को रोजगार मिल चुका है.
‘बस्तर मुन्ने’ पहल के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा. इन शिविरों में जरूरी दस्तावेज मौके पर जारी किए जाएंगे और समस्याओं का समाधान किया जाएगा, ताकि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके.
प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज और जगरगुंडा व ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन होने की संभावना है. इन परियोजनाओं से बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के समग्र विकास को गति मिलेगी.
