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Sunday, 23 June, 2024
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‘बीते 3 सालों में BJP कमजोर क्यों हुई?’ उमा भारती बोलीं- पार्टी को MP जीतने के लिए छवि सुधारने की जरूरत

आगामी विधानसभा चुनावों में मौजूदा सांसदों और विधायकों को मैदान में उतारने के बीजेपी नेतृत्व के फैसले की सराहना करते हुए पूर्व CM ने कहा कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगी, लेकिन मध्यप्रदेश से नहीं.

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नई दिल्ली: यह पूछते हुए कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के ‘अवमूल्यन’ का कारण क्या हो सकता है, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा है कि राज्य में सरकार बनाने के लिए पार्टी के बारे में जनता के बीच बन चुकी धारणा को सही करने की जरूरत है.

भारती ने दिप्रिंट के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “मैं हैरान हूं कि तीन साल पहले कमलनाथ जी इस डर से फ्लोर टेस्ट का सामना करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाए थे कि उनके विधायक पाला बदल लेंगे. तब कांग्रेस के लिए स्थिति इतनी खराब थी कि अगर चुनाव होते तो पार्टी को 20 सीटें मिलतीं.”

उन्होंने आगे कहा: “मेरा सुझाव [बीजेपी को] शुरू से ही विधानसभा भंग होने के बाद चुनाव कराने का था. लेकिन सभी ने कहा कि वे सरकार बनाना चाहते हैं.”

भारती 2020 में 22 कांग्रेस विधायकों के विद्रोह का जिक्र कर रही थीं, जिसके कारण मध्यप्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार गिर गई थी. बाद में कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट का सामना करने के बजाय इस्तीफा देने का विकल्प चुना था.

पार्टी के कथित ‘अवमूल्यन’ पर नजर डालते हुए उन्होंने कहा, “एक धारणा बनाई गई है कि हम सरकार बनाने में सक्षम नहीं हो सकते हैं. ऐसी धारणा क्यों बनी है? हमारी कौन सी गलती हमें यहां तक ​​ले आई. मुझे चिंता है क्योंकि इस सरकार ने कुछ अच्छे फैसले लिए हैं.”

वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह समझने के लिए आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता है कि सत्ता विरोधी लहर क्यों है. पार्टी को आत्म-चिंतन करने की जरूरत है और ‘अगर हम लोगों को समझाने में सक्षम हैं, तो चीजें बेहतर हो जाएंगी.’

भारती ने राज्य में आगामी चुनावों के लिए मौजूदा सांसदों और मंत्रियों को मैदान में उतारने के बीजेपी के कदम की भी सराहना की. उन्होंने कहा, “ये तो मुझे बहुत अच्छा लगा. जो हुआ है वो तो होना ही चाहिए. कोई बाप की जागीर थोड़ी होती है कि हम ही लड़ते रहेंगे.”

भारती ने कहा कि लोकतंत्र में किसी को लगातार दो बार टिकट मिल सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि तीसरी बार भी उसे टिकट मिले. उन्होंने कहा, “सत्ता का अहंकार नहीं पालना चाहिए कि मैं हमेशा इस पर बैठा रहूंगा.”

पार्टी नेतृत्व पर भारती ने कहा कि वह गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी प्रमुख जे.पी.नड्डा के एक साथ काम करने की प्रशंसा करती है. उन्होंने कहा, “वो जितने चाहें बदल दें. बदलने की आदत पड़नी ही चाहिए.”

पूर्व CM ने कहा कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव जरूर लड़ेंगी, लेकिन मध्यप्रदेश से नहीं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सुझाव दिया था कि वह राज्य से चुनाव लड़ें लेकिन उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने कहा, “मैं यूपी या एमपी से चुनाव लड़ सकती हूं, लेकिन मुझे लगता है कि मुझे किसी तीसरे राज्य से चुनाव लड़ना चाहिए.”

उन्होंने कहा कि उन्हें “बुरा लगा” कि उन्हें जन आशीर्वाद यात्रा के लिए आमंत्रित नहीं किया गया और तब से उन्होंने छत्तीसगढ़ बीजेपी सहित देश के बाकी हिस्सों में यात्रा में शामिल होने के निमंत्रण को ठुकरा दिया है.

यह याद दिलाने पर कि कैसे चौहान को पार्टी ने आधिकारिक तौर पर विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में नहीं उतारा है जबकि कई अन्य को टिकट मिला है, भारती ने चौहान को एक प्रतिबद्ध पार्टी नेता बताया और कहा, “मैं शिवराज जी का बहुत सम्मान करती हूं. शिवराज जी CM बनेंगे या नहीं, यह तो नड्डा जी ही बता सकते हैं. अटल बिहारी वाजपेई सरकार में उन्हें दोनों बार मंत्री नहीं बनाया गया और इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा. वह सत्ता के पीछे नहीं हैं.”

भारती ने कहा कि वह कई वर्षों से संसद में महिलाओं के लिए OBC कोटा के मुद्दे को उठाती रही हैं और उठाती रहेंगी. यह दावा करते हुए कि OBC की महिलाओं को पीछे छोड़ दिया जाएगा, जबकि SC और ST समुदायों की महिलाओं को 24 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, उन्होंने कहा कि उन्होंने पीएम को पत्र लिखकर पूछा था कि 1996 में जब बिल पहली बार पेश किया गया था, तब उन्होंने एक संशोधन प्रस्तावित किया था.

उन्होंने कहा, “जब तत्कालीन एच.डी. देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली सरकार ने 1996 में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया, मैंने कहा कि OBC महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए. यही कारण है कि इसे स्थायी समिति को भेजा गया था. उस समय, बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने कहा कि SC और ST के लिए आरक्षण होना चाहिए, लेकिन OBC के लिए नहीं. फिर भी, मैंने OBC को शामिल करने के लिए दबाव डाला था.”


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‘वही करूंगी जिसमें मैं विश्वास करती हूं’

उमा भारती ने कहा, “मेरा रुख वही है, मैं नहीं बदली हूं. लेकिन यह कांग्रेस है जो बदल गई है. उन्हें मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 10 साल मिले लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. बीजेपी का रुख वही रहा. वे चाहते थे कि SC/ST आरक्षण देने के बाद इसे पारित किया जाए.”

इस तथ्य पर कि विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है लेकिन OBC महिलाओं के लिए कोटा नहीं जोड़ा गया है, भारती ने कहा: “चूंकि यह अब नहीं हो रहा है तो मैं निश्चिंत हूं. मैं पहले असहज हो गई थी.”

भारती ने कहा कि मोदी भी OBC समुदाय से आते हैं और उन्हें विश्वास है कि अधिनियम में एक प्रावधान जोड़ा जाएगा. उन्होंने आगे कहा, “मुझे मोदी जी पर पूरा भरोसा है कि वह महिला आरक्षण में OBC कोटा लागू करेंगे.”

भारती ने कहा कि वह उन चीजों को करना जारी रखती हैं जिनमें उन्हें विश्वास है, भले ही वे पार्टी के एजेंडे में हों या नहीं.

उन्होंने कहा, “किसी समय राम मंदिर बीजेपी के एजेंडे से बाहर हो गया, लेकिन यह मेरे लिए एजेंडा बना रहा और मैंने इस पर बोलना जारी रखा. सुषमा स्वराज जी ने एक बार कहा था कि राम मंदिर एक चेक है जिसे एक बार भुनाया गया है और दोबारा नहीं भुनाया जा सकता है. हालांकि, बाद में उसे लगा कि यह नहीं कहना चाहिए था. पार्टी ने राम मंदिर मुद्दे को कम से कम दो चुनावों के लिए छोड़ दिया, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा.”

(संपादन : ऋषभ राज)

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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