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Friday, 20 February, 2026
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हरियाणा विधानसभा सत्र शुक्रवार को ही क्यों शुरू होते हैं? वजह सिर्फ ‘विधायकों के भत्ते’ नहीं हैं

एक पूर्व स्पीकर और छह बार के MLA ने खुलकर सफाई दी, जबकि सरकार का कहना है कि सेशन कई बातों को ध्यान में रखकर तय किया गया है.

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गुरुग्राम: हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार से शुरू हुआ तो चंडीगढ़ सचिवालय के गलियारों में किसी को हैरानी नहीं हुई. यह लगभग हर बार शुक्रवार को ही शुरू होता है.

पिछले विधानसभा सत्रों के रिकॉर्ड बताते हैं कि ज्यादातर मौकों पर कार्यवाही शुक्रवार को ही शुरू हुई है. मौजूदा बजट सत्र 20 फरवरी से शुरू होकर 18 मार्च तक चलेगा. इसमें 17 कार्य दिवसों के बीच 9 छुट्टियां होंगी.

शुक्रवार को ही सत्र शुरू करने के सवाल पर, सदन की कुर्सी संभाल चुके लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी.

भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासनकाल में हरियाणा विधानसभा के स्पीकर रहे कुलदीप शर्मा ने साफ कहा, “सत्र को शुक्रवार से शुरू करने का मूल उद्देश्य विधायकों को थोड़ा ज्यादा दैनिक भत्ता दिलाना है.” उन्होंने दिप्रिंट से यह बात कही.

हरियाणा विधानसभा (सदस्यों का वेतन, भत्ता और पेंशन) अधिनियम, 1975 में संशोधन के अनुसार, किसी सत्र, समिति की बैठक या स्पीकर के आदेश पर होने वाले आधिकारिक काम में शामिल होने के हर दिन के लिए विधायक को 2,000 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं. यह एक महीने में अधिकतम 15 दिनों तक सीमित है.

हिसाब सीधा है. जब सत्र शुक्रवार से शुरू होता है तो विधायक एक दिन पहले, यानी गुरुवार को चंडीगढ़ पहुंचते हैं ताकि समय पर सदन में मौजूद रह सकें. इसलिए उन्हें गुरुवार का भी दैनिक भत्ता मिलता है. अगर सत्र शुक्रवार शाम को स्थगित होता है तो अपने क्षेत्र में लौटने के लिए शनिवार का भत्ता भी मिलता है. और अगर सत्र सोमवार को फिर से शुरू होता है तो रविवार का भत्ता भी मिल जाता है. इस तरह तीन दिन के सत्र में पांच से छह दिन का भत्ता मिल सकता है.

भट्टू कलां, फतेहाबाद और नलवा से छह बार विधायक रह चुके संपत सिंह ने शर्मा की बात से सहमति जताई, लेकिन कहा कि इसमें और भी कारण हैं.

उन्होंने कहा, “दैनिक भत्ता और यात्रा भत्ता एक बात है, लेकिन आजकल इसका ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्योंकि लोगों के पास काफी पैसा है और ये भत्ते ज्यादा मायने नहीं रखते. बड़ा कारण यह है कि अगर राज्यपाल का अभिभाषण शुक्रवार को होता है तो विधायकों को उस पर बहस की तैयारी के लिए कम से कम दो दिन मिल जाते हैं.”

सिंह ने याद किया कि एक समय था जब ये भत्ते मामूली नहीं थे. 1980 के शुरुआती दशक में जब वह विधायक बने, तब 16 रुपये प्रति किलोमीटर का यात्रा भत्ता उनके और उनके साथियों के लिए काफी मायने रखता था.

उन्होंने कहा, “स्वर्गीय चौधरी वीरेंद्र सिंह, जो हिसार के नारनौंद विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे, उनके पास फिएट कार थी. वह हिसार स्थित अपने घर से मेरे घर आते, मुझे साथ लेते और हम हिसार बस स्टैंड तक कार से जाते. वहां कार खड़ी करके हम हरियाणा रोडवेज की बस से चंडीगढ़ जाते और समय पर विधानसभा पहुंचने के लिए रिक्शा लेते. हमें हर हफ्ते 16 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से यात्रा भत्ता मिलता था, जो उस समय हमारे लिए बहुत मायने रखता था.”

आज विधायकों को यात्रा के लिए 18 रुपये प्रति किलोमीटर मिलते हैं. साप्ताहिक उपसमिति बैठकों के कारण विधानसभा से जुड़े भत्ते ज्यादातर महीनों में मिलते रहते हैं, सिर्फ सत्र के दौरान ही नहीं.

हालांकि हर कोई इस सवाल पर बोलने को तैयार नहीं था.

मुलाना से पूर्व कांग्रेस सांसद वरुण चौधरी, जिनकी पत्नी पूजा अब यह सीट संभाल रही हैं, ने कहा कि सत्र की तारीख तय करना राज्यपाल का अधिकार है और इसके कारणों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि सत्र किस दिन शुरू होता है, बल्कि यह है कि वह कितने दिन चलता है.

इस बात पर गौर करने की जरूरत है. यह बजट सत्र 18 मार्च तक चलेगा और 17 कार्य दिवसों में 9 छुट्टियां शामिल हैं. 16 मार्च को हरियाणा से राज्यसभा की दो खाली सीटों के लिए मतदान होना है. उस दिन कार्यवाही दोपहर 2 बजे शुरू होगी और सभी सदस्यों से उम्मीद है कि वे उससे पहले वोट डाल लें. छुट्टी के बाद वाले दिनों में भी सदन दोपहर 2 बजे शुरू होगा. सामान्य दिनों में कार्यवाही सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी.

हरियाणा सरकार के एक प्रवक्ता ने दिप्रिंट से कहा कि विधानसभा सत्र की तारीखें कई बातों को ध्यान में रखकर तय की गई हैं और विधायकों के अतिरिक्त भत्ते उनमें शामिल कारण नहीं हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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