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Sunday, 25 February, 2024
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फिर से पैरोल पर बाहर बलात्कारी-हत्यारे गुरमीत राम रहीम पर इतनी मेहरबान क्यों है हरियाणा की BJP सरकार

2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद नौंवी और पिछले दो साल में यह सातवीं बार है जब राम रहीम सिंह जेल से बाहर आया है.2022 और 2023 में सिंह छह मौकों पर जेल से बाहर था.

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गुरुग्राम: बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी पाया गया सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के 19 जनवरी को पैरोल पर बाहर आने के एक दिन बाद, उसने अपने यूट्यूब चैनल ‘सेंट एमएसजी’ पर एक वीडियो पोस्ट किया. एमएसजी वो निकनेम है जिसका उपयोग वो डेरा के अब तक के तीन प्रमुखों – शाम मस्ताना, शाह सतनाम सिंह और स्वयं राम रहीम सिंह) के नामों पर करता है.

49 सेकंड के वीडियो में जिसे मंगलवार दोपहर तक 3,62,000 बार देखा गया था, राम रहीम — जो वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बरनावा में अपने आश्रम में रहता है — अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहता है, “एक बार फिर, मैं आपकी सेवा में वापस आ गया हूं.”

रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का ज़िक्र करते हुए उसने कहा, “राम जी का उत्सव 22 जनवरी को पूरे देश में मनाया जा रहा है. आप सभी को इस उत्सव में भाग लेना चाहिए और इस त्यौहार को दिवाली की तरह मनाना चाहिए.”

हालांकि, इस बीच डेरा प्रमुख ने अपने समर्थकों से फिलहाल उससे मिलने आने से मना किया. उसने कहा, “अभी किसी को भी उत्तर प्रदेश (आश्रम) में नहीं आना चाहिए.”

सिंह ने अपने समर्थकों को महीने भर चलने वाले ‘एमएसजी भंडारा’, या शाह सतनाम सिंह की जयंती (25 जनवरी) के उत्सव के अवसर पर भी बधाई दी.

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सुप्रसिद्ध और प्रभावी स्वयंभू धर्मगुरु गुरमीत राम रहीम सिंह इस समय 50 दिनों के लिए पैरोल पर बाहर हैं. पैरोल 21 दिन की फरलो के बाद 14 दिसंबर 2023 को हरियाणा की सुनारिया जेल में लौटने के ठीक एक महीने बाद आई है.

2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद नौंवी और पिछले दो साल में यह सातवीं बार है जब राम रहीम सिंह जेल से बाहर आया है.

2022 और 2023 में सिंह छह मौकों पर जेल से बाहर था, — 7 फरवरी 2022 को 21 दिन की फरलो, 17 जून 2022 को 30 दिन की पैरोल, 15 अक्टूबर 2022 को 40 दिन की पैरोल, 21 जनवरी 2023 को एक दिन की पैरोल, 20 जुलाई 2023 को 30 दिन की पैरोल और 21 नवंबर 2023 को 21 दिन की फरलो.

इससे पहले, डेरा प्रमुख को 24 अक्टूबर 2020 को पुलिस द्वारा “गुप्त” तरीके से 24 घंटे के लिए पैरोल पर बाहर लाया गया था. इसके अलावा 21 मई 2021 को एक दफा और एक दिन की पैरोल दी गई थी ताकि वह अपनी बीमार मां से मिल सके.

डेरा प्रमुख को दो महिला अनुयायियों के बलात्कार के लिए 25 अगस्त 2017 को दोषी ठहराया गया और 20 साल की कैद की सज़ा सुनाई गई. इसके अलावा पत्रकार राम चंदर छत्रपति और पूर्व डेरा प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के लिए क्रमश: जनवरी 2019 और अक्टूबर 2021 में दो आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गईं.

सिंह की राजनीति में गहरी रुचि को देखते हुए — वह एकमात्र डेरा प्रमुख है, जो राजनीति में दखल देने के लिए जाना जाता है — जेल से उसकी लगातार रिहाई ने हरियाणा की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार के लिए आरोपों का तूफान खड़ा कर दिया है, खासकर लोकसभा चुनाव नज़दीक आने के संदर्भ में.

छत्रपति की हत्या के बाद डेरा के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाली सामाजिक संस्था जन संघर्ष मंच की महासचिव सुदेश कुमारी ने कहा कि यह अकेले भाजपा नहीं थी बल्कि पिछली सभी सरकारों ने गुरमीत राम रहीम सिंह की मदद की थी.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “बीजेपी के साथ समस्या यह है कि वह कहती कुछ है और करती बिल्कुल उसका उल्टा है.”

कुमारी ने कहा, “सरकार 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के लिए मृत्युदंड का प्रस्ताव करने वाला कानून 2018 में ले आई और यहां एक व्यक्ति है जिसके खिलाफ उसकी दो शिष्यों का बलात्कार पहले ही अदालतों में साबित हो चुका है और भाजपा उसे जेल से बाहर आने में बार-बार मदद कर रही है.”

हालांकि, भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि सिंह के पैरोल/फरलो आवेदनों से संबंधित फैसलों से उनका कोई लेना-देना नहीं है.

दिप्रिंट से बात करते हुए हरियाणा के जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने कहा कि यह फैसला जेल अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा लिया गया है.

दिप्रिंट ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए विपक्ष के कुछ वरिष्ठ नेताओं — कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) — से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की और मामले से दूर रहने का आग्रह किया.


यह भी पढ़ें: बलात्कार-हत्या का दोषी डेरा प्रमुख राम रहीम जेल से आया बाहर, हरियाणा सरकार बोली- चुनाव से लेना-देना नहीं


राजनीतिक ब्रश

नाम न छापने की शर्त पर एक राजनीतिक विश्लेषक ने दिप्रिंट को बताया कि डेरा सच्चा सौदा ने केवल गुरमीत राम रहीम सिंह के नेतृत्व में राजनीति में हाथ आजमाना शुरू किया था, उन्होंने कहा कि उनके पूर्ववर्तियों ने कभी ऐसा नहीं किया.

सिंह ने 1990 में डेरा की बागडोर संभाली. इसके तुरंत बाद वह क्षेत्र के राजनेताओं के लिए आकर्षण बन गया. उसने पहली बार 2007 के पंजाब विधानसभा चुनावों में एक पार्टी को सार्वजनिक समर्थन की पेशकश की.

डेरा ने चुनाव में कांग्रेस का समर्थन किया, लेकिन जीत शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन की हुई.

हालांकि, अकाली दल पंजाब के मालवा क्षेत्र में अधिकांश सीटें हार गया, जहां राम रहीम का काफी प्रभाव था.

महीनों बाद सिंह पर पंजाब के सलाबतपुरा में एक मण्डली के दौरान कथित तौर पर गुरु गोबिंद सिंह की तरह कपड़े पहनने के लिए ईशनिंदा का मामला दर्ज किया गया था.

डेरा ने बाद में एक ‘राजनीतिक मामलों की शाखा’ की स्थापना की.

हरियाणा में 2014 के विधानसभा चुनावों में डेरा ने खुले तौर पर भाजपा का समर्थन किया, उस साल अक्टूबर में सिरसा में पीएम नरेंद्र मोदी की आयोजित रैली में सिंह के हज़ारों समर्थकों ने भाग लिया.

मतदान से पहले, कैलाश विजयवर्गीय, जो उस समय हरियाणा के लिए भाजपा के प्रभारी थे, 13 अक्टूबर 2014 को पार्टी के 40 उम्मीदवारों को राम रहीम के पास “आशीर्वाद लेने” के लिए ले गए.

उस साल, भाजपा ने पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाई.

सरकार बनने के बाद 18 से ज्यादा विधायक और कुछ मंत्री विजयवर्गीय के साथ राम रहीम सिंह के पास समर्थन के लिए धन्यवाद देने पहुंचे थे.

दिप्रिंट से बात करते हुए छत्रपति के बेटे अंशुल ने कहा कि डेरा प्रमुख के साथ बीजेपी का रिश्ता “बदले का एक आदर्श उदाहरण है”.

उन्होंने कहा, “2014 के विधानसभा चुनावों के दौरान डेरा प्रमुख, जो हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में अपने समर्थकों के होने का दावा करता है, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिरसा की रैली में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में अपने समर्थकों को भेज कर भाजपा को समर्थन दिया था.”

अंशुल ने कहा, “मोदी ने भी डेरा द्वारा स्वच्छता अभियान की बात की थी. राम रहीम को दोषी ठहराए जाने से पहले, खट्टर कैबिनेट के कई मंत्री राम रहीम का आशीर्वाद लेने के लिए डेरा गए थे. करनाल में स्वच्छता अभियान के दौरान राम रहीम को सीएम मनोहर लाल खट्टर के साथ देखा गया था.”

ऑल इंडिया वूमेन डेमोक्रेटिक एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) की उपाध्यक्ष जगमती सांगवान ने कहा, “हर कोई जानता है कि बीजेपी हर चुनाव से पहले राम रहीम को रिहा कर देती है और उसे इसका कोई अफसोस नहीं है.”

उन्होंने कहा, “पिछले साल मार्च में डेरा प्रमुख को पैरोल का बचाव करते हुए हरियाणा सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को बताया था कि राम रहीम कोई कट्टर अपराधी या सीरियल किलर नहीं है.”

सांगवान ने कहा, “हम यह सोचकर कांप उठते हैं कि जिस व्यक्ति पर दो शिष्याओं के साथ बलात्कार और दो पुरुषों की हत्या का मामला अदालत में साबित हो चुका है, उनमें से एक बलात्कार पीड़िता का सगा भाई है, वो आदमी भाजपा सरकार के लिए कट्टर अपराधी नहीं है.”

उन्होंने कहा, “भाजपा बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपियों का भरपूर समर्थन कर रही है.”

एआईडीडब्ल्यूए की उपाध्यक्ष ने कहा, “बिलकिस बानो मामले के दोषियों, बृज भूषण शरण सिंह (सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख) और हरियाणा के मंत्री संदीप सिंह का उदाहरण लें, तो एक ट्रेंड का पता चल जाएगा.”

उन्होंने कहा कि यह रवैया ही “सही कारण है कि हाल के महीनों में हरियाणा के जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) में गिरावट देखी गई है”.

उन्होंने कहा, “सरकार का ऐसा रवैया लड़कियों के प्रति लोगों की मानसिकता को प्रभावित करता है.”


यह भी पढ़ें: पैरोल पर बाहर आए डेरा प्रमुख ‘पिताजी’ राम रहीम का आशीर्वाद लेने जुटे हरियाणा के BJP नेता


‘कुछ भी गलत नहीं’

दिप्रिंट से बात करते हुए हरियाणा के जेल मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने सिंह की बार-बार जेल से रिहाई के आरोपों पर प्रकाश डाला.

उन्होंने कहा कि डेरा प्रमुख के लिए पैरोल में कुछ भी अवैध नहीं है और यह हरियाणा अच्छे आचरण वाले कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 2022 के तहत दी गई है.

उन्होंने कहा, “इस अधिनियम के तहत, एक दोषी कैदी को एक कैलेंडर वर्ष में 10 हफ्ते (70 दिन) के लिए पैरोल पर रिहा किया जा सकता है और कैदी इसका लाभ दो भागों में उठा सकता है. इसी तरह, एक दोषी कैदी को एक कैलेंडर वर्ष में तीन हफ्ते (21 दिन) की अवधि के लिए फरलो पर रिहा किया जा सकता है और इस अवधि का लाभ भागों में नहीं लिया जा सकता है.”

उन्होंने आगे कहा, राजनीतिक नेतृत्व तस्वीर में भी नहीं आता है. “दोषी जेल अधीक्षक के समक्ष (पैरोल/फरलो के लिए) आवेदन करता है और अगर दोषी की सज़ा सात साल से कम है तो रिहाई आदेश डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी किए जाते हैं और अगर सज़ा सात साल से अधिक है तो कमिश्नर द्वारा जारी किए जाते हैं.”

चौटाला ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है कि इस बार, सिंह अपनी पिछली फरलो समाप्त होने के एक महीने बाद ही जेल से बाहर है.

उन्होंने कहा, “आखिरी बार राम रहीम को 21 नवंबर 2023 को 21 दिन की फरलो मिली थी, जबकि अब वह जनवरी 2024 में 50 दिन की पैरोल पर बाहर है. चूंकि कैलेंडर वर्ष बदल गया है, इसलिए कोई अनियमितता नहीं है.”

हालांकि, छत्रपति ने कहा कि हरियाणा अच्छे आचरण वाले कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम को डेरा प्रमुख के अनुरूप 2022 में संशोधित किया गया था.

उन्होंने कहा, “इस संशोधन से पहले राम रहीम का आवेदन तीन बार खारिज कर दिया गया था क्योंकि वह पुराने कानून के तहत शर्तों को पूरा नहीं करता था. एक बार, उसने अपने कृषि क्षेत्रों की देखभाल के लिए रिहाई के लिए आवेदन किया, लेकिन अधिकारियों की रिपोर्ट में कहा गया कि उसके नाम पर कोई ज़मीन ही नहीं है.”

छत्रपति ने कहा, “दूसरी बार उसने अपनी मुंह बोली बेटी की शादी का हवाला दिया, लेकिन अधिकारियों की रिपोर्ट में कहा गया, दो बेटियों के पिता के रूप में, वह कानूनी तौर पर एक बेटी को गोद लेने के योग्य नहीं थे.” इसके बाद, तीसरे खारिज किए गए आवेदन में बीमार मां के इलाज का हवाला दिया गया था.

उन्होंने कहा, “लेकिन अधिकारियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि सिरसा में डेरा सच्चा सौदा जहां राम रहीम सिंह की मां रहती थीं, परिसर में एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल था और उनकी देखभाल के लिए उनके पास एक पोता और पोती और उनके परिवार थे.”

उन्होंने कहा, कई मौकों पर आवेदन खारिज होने के बाद, सरकार ने “राम रहीम के लिए इन सभी शर्तों को हटा दिया”.

टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर हरियाणा जेल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि राज्य सरकार ने “कैदियों के लिए पैरोल और फरलो लेना आसान बनाने के लिए” कानूनों में संशोधन किया है.

अधिकारी ने कहा,“संशोधन से पहले, हम हरियाणा अच्छे आचरण कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 1988 का पालन कर रहे थे. पुराने कानून के तहत, परिवार में मृत्यु या गंभीर बीमारी जैसी कुछ स्थितियां, कैदी की, बेटे या बेटी, पोते, भाई या बहन का विवाह, कटाई, बुआई या अन्य कृषि कार्य जैसे कुछ कारण पैरोल की अनुमति के लिए काफी थे.”

उन्होंने कहा, “लेकिन नए अधिनियम के तहत, ये सभी शर्तें हटा दी गई हैं, क्योंकि कैदी पैरोल के लिए आवेदन करने के लिए नकली दस्तावेज़ बनाते थे.”

सुदेश कुमारी ने कहा कि इस सरकार या यहां तक कि अब विपक्ष के राजनीतिक दलों से यह उम्मीद करना मूर्खता होगी कि वे डेरा प्रमुख के बारे में (जब वे सत्ता में आए) कुछ करेंगे.

उन्होंने कहा, “अगर उसे (डेरा प्रमुख) अंततः 2017 में दंडित किया जा सका, तो यह न्यायपालिका के कारण था.”

कुमारी ने कहा, “अब भी, कोई उम्मीद करता है कि न्यायपालिका स्वत: कार्रवाई करेगी और राम रहीम को बार-बार रिहा करके व्यवस्था का जो मजाक उड़ाया जा रहा है, उसका संज्ञान लेगी.”

(संपादन : फाल्गुनी शर्मा)

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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