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Tuesday, 25 March, 2025
होमराजनीतिआखिर यह गाना किसका है? हरियाणा के राज्य गीत के रिलीज़ से पहले क्यों हो रहा है विवाद

आखिर यह गाना किसका है? हरियाणा के राज्य गीत के रिलीज़ से पहले क्यों हो रहा है विवाद

हरियाणा के विधायकों की पांच सदस्यीय समिति ने बजट सत्र में जारी होने वाले गीत को फाइनल कर दिया है. स्पीकर ने अब समिति को निर्देश दिया है कि इसे राज्य गीत के रूप में अपनाने से पहले इस मुद्दे को सुलझाया जाए.

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गुरुग्राम: यह गीत राज्य की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास को सेलिब्रेट करने के वास्ते बनाया गया था, लेकिन हरियाणा का राज्य गीत बनने से पहले यह विवाद में पड़ गया है क्योंकि इसके लेखक, एक विद्वान और पूर्व शिक्षाविद पर साहित्यिक चोरी के आरोप लगे हैं.

पांच सदस्यीय चयन समिति ने पिछले महीने विधानसभा को इस रचना को हरियाणा के राज्य गीत के रूप में अपनाने की सलाह दी थी. जैसा कि दिप्रिंट ने पहले भी रिपोर्ट की थी, राज्य गीत को चालू बजट सत्र में अपनाया जाना था.

‘जय जय जय हरियाणा’ पर विवाद तब शुरू हुआ जब गीतू परी नामक एक कलाकार ने आरोप लगाया कि अंतिम रचना में उनके गीत ‘जय जय मेरा हरियाणा’ के अंश शामिल हैं. इसके तुरंत बाद, फतेहाबाद के ढिंगसरा गांव में जवाहर नवोदय विद्यालय और केंद्रीय विद्यालय में एंट्रेंस के बच्चों को पढ़ाने वाले कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि राज्य के कला और संस्कृति विभाग को सौंपी गई उनकी रचना में से 85 प्रतिशत से अधिक रचना “चुराई गई” है.

हिंदी और हरियाणवी लोक साहित्य के विद्वान डॉ. बालकिशन शर्मा, जिन्हें पांच सदस्यीय समिति ने फाइनल गीत का लेखक होने का क्रेडिट दिया है, उन्होंने सोमवार को दिप्रिंट द्वारा संपर्क किए जाने पर आरोपों से इनकार किया.

हालांकि, विधानसभा को अभी इन दावों से निपटना है, लेकिन दिप्रिंट को मिली जानकारी के अनुसार, साहित्यिक चोरी की तीन और शिकायतें मिली हैं. स्पीकर हरविंदर कल्याण ने रेवाड़ी से भाजपा विधायक लक्ष्मण सिंह यादव की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति को निर्देश दिया है कि रचना को राज्य गीत के रूप में अपनाने से पहले इन मुद्दों को सुलझाया जाए.

यादव ने सोमवार को दिप्रिंट से पुष्टि की कि इस रचना को राज्य गीत के रूप में अपनाने में देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि चयन समिति मौजूदा बजट सत्र के समाप्त होने से पहले इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रही है. शेड्यूल के अनुसार, हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में केवल तीन बैठकें बची हैं — 26, 27 और 28 मार्च.

समिति के अन्य सदस्यों में झज्जर कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल, हांसी भाजपा विधायक विनोद भयाना, फतेहाबाद कांग्रेस विधायक बलवान सिंह दौलतपुरिया और डबवाली आईएनएलडी विधायक आदित्य देवीलाल सदस्य हैं.

यादव ने कहा, “ज़्यादातर दावे प्रथम दृष्टया बेबुनियाद लगते हैं.”

‘जय जय जय हरियाणा’ गीत का क्रेडिट डॉ. बालकिशन शर्मा को जाता है, जो एसडी पीजी कॉलेज, पानीपत में हिंदी के पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं. हरियाणवी लोक साहित्य के विद्वान शर्मा ने आठ किताबें लिखी हैं. अंतिम रचना पारस चोपड़ा द्वारा रचित और रोहतक की मालविका पंडित द्वारा निर्देशित है. इस रचना को अपनी आवाज़ देने के लिए गायक कैलाश खेर को चुना गया था, लेकिन आखिरकार यह काम हरियाणवी गायक डॉ. श्याम शर्मा को मिला.

तीन मिनट की इस रचना में 21 पंक्तियां हैं, जो हरियाणा की जीवनशैली और दूध और दही से भरपूर इसके पारंपरिक आहार को दर्शाती हैं. यह राज्य के सामाजिक ताने-बाने, इसकी प्रगति और सांग और रागिनी सहित इसकी जीवंत लोक कलाओं पर भी प्रकाश डालती है.

‘उचित क्रेडिट’ का दावा

‘जय जय जय हरियाणा’ को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब सोनीपत की रहने वाली अभिनेत्री और लेखिका गीतू परी ने इस महीने की शुरुआत में दावा किया कि उन्होंने 29 जनवरी, 2024 को ‘बहुत मिलती-जुलती’ रचना लिखी थी.

उन्होंने कहा, “मैंने अपने गीत में ‘जय-जय’ दो बार लिखा था, लेकिन राज्य गीत में इसे तीन बार बदल दिया गया है. गीत के बोल बहुत मिलते-जुलते हैं. जब मैंने मीडिया में राज्य गीत के बोल पढ़े, तो मुझे लगा कि इसकी कई पंक्तियां मेरी पंक्तियों से मिलती-जुलती हैं. मेरे गीत से कई छंदों को चुराया गया है, जिसमें दिवाली, मस्जिद, मंदिर और गुरुद्वारा जैसे शब्द शामिल हैं. मैंने हरियाणवी महिलाओं की बुद्धिमत्ता के बारे में भी लिखा है और मेरी कुछ पंक्तियों को शब्दशः कॉपी किया गया है.”

परी ने दिप्रिंट से कहा कि वे बस रचना के लिए साझा क्रेडिट चाहती हैं.

लेकिन क्रेडिट लेने की होड़ में परी अकेली नहीं हैं. हरियाणा के फतेहाबाद जिले के कृष्ण कुमार भी दावा कर रहे हैं कि यह रचना मूल रूप से उनकी है.

कुमार ने दिप्रिंट को बताया कि उन्होंने हरियाणवी में रचना लिखी थी, अब इसका हिंदी में अनुवाद किया गया है. जब राज्य ने 2021 में पहली बार अखबारों में विज्ञापन जारी कर राज्य गीत के लिए एंट्रीज़ मांगी, तो कुमार ने विज्ञापित डाक पते पर अपनी रचना भेजी. उन्होंने कहा, “बाद में, मुझे पता चला कि मेरा गीत तीन शॉर्टलिस्ट की गई एंट्रियों में से एक था, लेकिन इसे अंतिम रूप से नहीं चुना गया. अब, मुझे पता चला है कि अंतिम संस्करण में 85 प्रतिशत गीत के बोल मेरे थे, जबकि केवल 15 प्रतिशत को किसी और को क्रेडिट देने के लिए संशोधित किया गया था.”

उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें भी उचित क्रेडिट मिलना चाहिए.

डॉ. बालकिशन शर्मा ने परी और कुमार के आरोपों को खारिज करते हुए दिप्रिंट को बताया कि एंट्री आमंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा जारी विज्ञापन में एक व्यापक रूपरेखा थी — कि एंट्री राज्य के सांस्कृतिक लोकाचार को उजागर करनी चाहिए — यही वजह है कि कुछ शब्द सभी एंट्रियों में दिखाई देने के लिए बाध्य हैं.

उन्होंने कहा, “आप 100 छात्रों की एक प्राथमिक कक्षा को गाय पर एक निबंध लिखने के लिए कहेंगे तो लगभग सभी लिखेंगे कि गाय के चार पैर, दो आंखें, दो कान, दो सींग और एक पूंछ होती है. कोई इसे कैसे भूल सकता है? इसी तरह, हरियाणा के लिए ‘राज्य गीत’ लिखते समय, हर कोई लिखेगा कि यह महाभारत की भूमि है जहां कृष्ण ने गीता का संदेश दिया, दूध दही का खाना, इसके पहलवान और एथलीट वगैरह.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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