नई दिल्ली: बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. इसकी वजह यह रही कि राहुल गांधी ने बिट्टू को ‘गद्दार’ कहा, जिस पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई.
दिन की कार्यवाही से पहले संसद परिसर में कांग्रेस सांसद प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान जब बिट्टू मकर द्वार के पास प्रदर्शन कर रहे सांसदों के सामने से गुज़रे, तो राहुल गांधी ने उन्हें ‘गद्दार दोस्त’ कहते हुए कहा कि वह “कांग्रेस में वापस आ जाएंगे”.
बिट्टू ने 2024 में कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी जॉइन की थी. वह इस समय रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री हैं. अगस्त 2024 से वह राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं.
राहुल गांधी ने कहा, “देखिए, यहां एक गद्दार चल आ रहा है. ज़रा चेहरा देखिए, ऐसा ही दिखता है. हेलो भाई, मेरे गद्दार दोस्त. चिंता मत करो, तुम वापस आ जाओगे (कांग्रेस में).” इसके बाद गांधी ने बिट्टू से हाथ मिलाने की कोशिश की. जवाब में बिट्टू ने गांधी को “देश के दुश्मन” कहा और हाथ मिलाने से इनकार कर दिया.
बिट्टू ने मीडिया से कहा, “जब मैं अंदर जा रहा था, तब उन्होंने सदन के अंदर भी यही किया. स्पीकर ने उन्हें बाहर भेज दिया. मैं आगे की कार्रवाई पर चर्चा कर रहा हूं. बाहर भी उनका व्यवहार ‘सड़क के गुंडे’ जैसा था. गांधी परिवार ने हमेशा सिखों और पगड़ी को निशाना बनाया है. वहां बैठे किसी और सांसद ने कुछ नहीं कहा. सभी निलंबित सांसद बैठे थे. हम सब रोज़ मिलने वाले सहकर्मी हैं. राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन मुझे नहीं पता उन्हें क्या हो गया है.”
राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए बिट्टू ने कहा, “उन्हें लगता है कि वही सबसे बड़े देशभक्त हैं, कि उनके पिता ने बलिदान दिया. कांग्रेस पार्टी और गांधी परिवार ने पंजाब को आग में झोंका. हमारे सबसे बड़े गुरुद्वारे स्वर्ण मंदिर पर गोलियां चलीं. हज़ारों सिखों और पंजाबियों को निशाना बनाया गया और मारा गया.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर राजीव गांधी को ‘शहीद’ कहा जाता है, तो हमें शहीद-ए-आज़म सरदार बेअंत सिंह को भी शहीद कहना चाहिए. मैं भी उसी परिवार से आता हूं, यह मेरा दर्द है. एक शहीद का पोता तब तक ठीक था, जब तक मैं उनके साथ था. अब जब मैं भाजपा में हूं, तो वह मेरे लिए ऐसे शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं. वह खुद को क्या समझते हैं. उन्होंने मुझसे ऐसे हाथ मिलाने की कोशिश की, जैसे वह कोई सम्राट हों. वह खुद को इस देश का, इस दुनिया का मालिक समझते हैं.”
बिट्टू ने कहा, “मैं गांधी परिवार से नहीं हूं, लेकिन मेरे सिर पर पगड़ी है. इसलिए जब उन्होंने मुझसे हाथ मिलाने की कोशिश की, तो मैंने कहा ‘आप लोग तो देश के गद्दार हो, देश के दुश्मन हो’, जो रोज़ सेना और देश के खिलाफ बोलते हैं. गांधी परिवार सिखों का कातिल है. मैं उस परिवार के बेटे से हाथ नहीं मिलाऊंगा.”
बिट्टू पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं. वह 2014 से लोकसभा में तीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में वह बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर हार गए थे. वह 11 मार्च 2021 से 18 जुलाई 2021 तक लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप भी रहे. जनवरी 2021 में सिंघु बॉर्डर पर जन संसद कार्यक्रम के दौरान उन पर हमला भी हुआ था.
भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें 2024 लोकसभा चुनाव में लुधियाना से उतारा, लेकिन वह पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से हार गए. चुनाव हारने के बावजूद, पंजाब में भाजपा की पकड़ मज़बूत करने के मकसद से उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया.
बिट्टू इससे पहले 2014 और 2019 में लुधियाना से और 2009 में आनंदपुर साहिब से चुनाव जीत चुके हैं. उनके दादा बेअंत सिंह को पंजाब में दो दशक चली उग्रवाद की हिंसा को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है और उन्हें राज्य में आतंकवाद विरोधी अभियान का बड़ा चेहरा माना जाता है. बेअंत सिंह की मुख्यमंत्री रहते हुए हत्या कर दी गई थी.
बीजेपी नेता और आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने राहुल गांधी के व्यवहार को ‘शर्मनाक’ बताया और माफी की मांग की. उन्होंने एक्स पर लिखा, “केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू को ‘गद्दार’ कहना बेहद शर्मनाक है. यह वही घमंड और हक़ जमाने वाली सोच दिखाता है, जो लंबे समय से नेहरू-गांधी परिवार की पहचान रही है. उन्हें तुरंत माफी मांगनी चाहिए.”
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस पर हमला बोला. उन्होंने कहा, “मैं संसद में आज सिख मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जी के खिलाफ राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा की कड़ी निंदा करता हूं. उन्हें गद्दार कहना बेहद शर्मनाक है. एक सिख सरदार कभी गद्दार नहीं हो सकता.”
सिरसा ने आगे कहा, “अगर कोई गद्दार है, तो वह गांधी परिवार है. उन्होंने श्री दरबार साहिब पर टैंकों और तोपों से हमला किया, श्री अकाल तख्त साहिब को गिराया, और निर्दोष सिखों को टायर डालकर जिंदा जलाया. यह सिखों का अपमान है और इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. 1980 के दशक का ज़हर आज भी कांग्रेस की सोच में मौजूद है.”
सिरसा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
इसके बाद यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया. भाजपा ने इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसे सिरसा, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पार्टी प्रवक्ता आर.पी. सिंह और दिल्ली विधायक अरविंदर सिंह लवली ने संबोधित किया.
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राहुल गांधी की टिप्पणी की निंदा की और कहा कि यह “शालीनता, मर्यादा और गरिमा की सारी सीमाएं पार करता है”.
पुरी ने कहा, “यह संभव है कि मोदी सरकार की विकास की नीतियों को चुनने पर उन्हें बिट्टू जी से गहरी नाराज़गी हो. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि एक गर्वित सिख पर ऐसा आरोप लगाया जाए, जिनके दादा को आतंकवादियों ने मार दिया था.”
पुरी ने कहा कि बिना किसी आधार के एक ‘सम्मानित सिख’ को गद्दार कहना पूरी सिख समुदाय का अपमान है. उन्होंने कहा, “यह हर सिख पर हमला है. यह हर क्षेत्र में सिखों के योगदान का अपमान है. यह हमारे धर्म, मातृभूमि के प्रति प्रेम और बिट्टू जी के दादा, पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह जी के बलिदान का अपमान है. हमें 1984 में स्वर्ण मंदिर की बेअदबी को भी नहीं भूलना चाहिए, जो इसी सोच का नतीजा थी.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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