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Friday, 20 March, 2026
होमराजनीतिकौन है अशोक खरात—सैलर से ‘गॉडमैन’ बना, महायुति नेताओं के बीच सम्मानित, अब रेप केस का आरोपी

कौन है अशोक खरात—सैलर से ‘गॉडमैन’ बना, महायुति नेताओं के बीच सम्मानित, अब रेप केस का आरोपी

‘कैप्टन खरात’ ने अपनी गिरफ़्तारी तक महाराष्ट्र के राजनीतिक दिग्गजों तक पहुंच बना रखी थी. राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया है; वहीं महिला आयोग की प्रमुख पर ‘हितों के टकराव’ को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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मुंबई: वह खुद को ‘कैप्टन’ कहता था. उसका दावा था कि वह 154 देशों में जा चुका है, 22 साल समुद्र में काम कर चुका है और पूरी दुनिया देख चुका है.

जब वह नासिक लौटकर आया, तो उन्होंने सिन्नर की पहाड़ियों में एक मंदिर बनवाया, एक ट्रस्ट बनाया, खुद को ज्योतिषी और न्यूमरोलॉजिस्ट के रूप में पेश करना शुरू किया और प्रभावशाली लोगों से मिलना लगा. एक मुख्यमंत्री वहां पहुंचे. मंत्री पहुंचे. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष भी पहुंचीं और कम से कम एक बार उन्होंने उसके पैर भी धोए.

इस हफ्ते अशोक खरात — जिसे ‘कैप्टन खरात’, बाबा और भविष्य बताने वाला कहा जाता था — को गिरफ्तार कर लिया गया. नासिक पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक उस पर कई महिलाओं के साथ बलात्कार करने का आरोप है. जांच के दौरान पुलिस को उसके पास से एक पेनड्राइव मिली, जिसमें महिलाओं के 58 वीडियो मिले. फिलहाल वह पुलिस हिरासत में है.

नासिक के सरकारवाड़ा पुलिस स्टेशन में 35 साल की एक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई है. महिला ने आरोप लगाया कि खरात ने खुद को दैवी शक्तियों वाला बताकर उसका भरोसा जीता. फिर उसने उसे शहर में अपने दफ्तर बुलाया और नशीली ड्रिंक पिलाने के बाद उसके साथ यौन उत्पीड़न किया. महिला का आरोप है कि यह शोषण 2022 से दिसंबर 2025 तक चलता रहा.

महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तेजस्वी सातपुते की अगुवाई में एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी बनाई है.

खरात एक रिटायर्ड मर्चेंट नेवी अधिकारी है, जिसने बाद में खुद को न्यूमरोलॉजी, ब्रह्मांड विज्ञान और आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भाषा में नया रूप दिया. वह श्री शिवनिका संस्थान का अध्यक्ष है. यही ट्रस्ट उसके बनाए मिरगांव, नासिक स्थित ईशान्येश्वर महादेव मंदिर का प्रबंधन करता है.

18 मार्च को उसे नासिक जिला सत्र अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 (बलात्कार) और 74 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज हुआ है. साथ ही महाराष्ट्र मानव बलि और अन्य अमानवीय, बुरी तथा अघोरी प्रथाओं और काला जादू रोकथाम अधिनियम, 2013 की धाराएं भी लगाई गई हैं.

क्राइम ब्रांच यूनिट 1 के वरिष्ठ निरीक्षक आंचल मुदगल ने पुष्टि की कि अभी एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने कहा, “फिलहाल उसका पूरा बैकग्राउंड साफ नहीं है, लेकिन जांच जारी है.”

राजनीतिक पहुंच

महाराष्ट्र की राजनीति में खरात को अहम बनाने वाली चीज मंदिर नहीं थी, बल्कि वहां आने वाले लोग थे.

नवंबर 2022 में — जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना से अलग होकर पार्टी पर अपना दावा मजबूत किया था — तब तत्कालीन मुख्यमंत्री मिरगांव पहुंचे थे. उनके साथ उनकी पत्नी, उस समय के राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और उस समय के प्राथमिक शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर भी थे. उस दौरे की तस्वीर उस समय काफी फैली थी.

विवाद बढ़ने पर दीपक केसरकर ने सफाई दी थी: “कैप्टन खरात का ईशान्येश्वर मंदिर है. शिंदे साहब ने वहां बनने वाली गौशाला के लिए दान दिया था.”

केसरकर ने उस समय पत्रकारों से कहा था कि वह खुद नासिक में गौशाला निर्माण का काम शुरू कर रहे थे और चाहते थे कि काम शुरू होने से पहले शिंदे वहां आकर जगह देख लें. उन्होंने यह भी कहा, “कैप्टन खरात का पेशा भविष्य बताना है, लेकिन अगर शिंदे को भविष्य जानना होता तो वे वहां क्यों जाते? वे खरात को मुंबई बुला सकते थे.”

दिप्रिंट ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया के लिए शिंदे से संपर्क किया है. जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

जिन लोगों की मौजूदगी पर अब सवाल उठ रहे हैं, उनमें महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर भी शामिल हैं. वह खरात के ट्रस्ट की नामित सदस्य भी हैं.

खुद को बाबा बताने वाले खरात की गिरफ्तारी के कुछ घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से फैलने लगा, जिसमें कथित तौर पर चाकणकर एक समारोह में खरात के पैर धोती दिख रही हैं. एक तस्वीर में वह उसके लिए छाता पकड़े भी दिखीं.

भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने ट्विटर पर एक दस्तावेज साझा किया, जिसे उन्होंने ट्रस्ट के सदस्यों की सूची बताया. उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा: “महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष उस अशोक खरात के पैर धो रही हैं जिस पर बलात्कार के आरोप हैं? ये लोग उसे कितने साल से जानते हैं? उनका संगठन? और वहां उनकी क्या भूमिका है?”

चाकणकर ने जल्दी ही खुद को खरात से अलग दिखाने की कोशिश की.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा: “शिवनिका संस्थान ट्रस्ट महादेव देवस्थान का ट्रस्ट है और वहां कभी-कभी सामाजिक कार्यक्रम भी होते हैं. इसी वजह से हममें से कई लोग ट्रस्ट की गतिविधियों से जुड़े थे. इसमें समाज के कई सम्मानित लोग भी शामिल थे.”

एक अलग पोस्ट में उन्होंने लिखा: “मुझे कैप्टन खरात की निजी जिंदगी या उस पर लगे आरोपों की कोई जानकारी नहीं है. जो आरोप अब लगाए जा रहे हैं, उनकी पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी. मुझे पुलिस जांच पर पूरा भरोसा है.”

लेकिन इस बयान के तुरंत बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता सुषमा अंधारे ने इसका विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि चाकणकर को खरात के व्यवहार की जानकारी उसकी गिरफ्तारी से कम से कम एक साल पहले से थी और उन्होंने इसे सामने आने से रोकने की कोशिश की थी.

अंधारे ने एक स्थानीय अखबार से लिया गया कथित माफीनामा साझा करते हुए लिखा: “रुपाली चाकणकर नंबर एक झूठी हैं. जब स्थानीय अखबार ‘खबरदार पुढारी’ ने खरात के गलत कामों को सामने लाने की कोशिश की, तो उन्होंने उस पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी और रिपोर्टर से माफीनामा लिखवाया.”

अंधारे ने आगे लिखा: “जो चाकणकर अब कह रही हैं कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं थी, वह इस माफीनामे पर क्या कहेंगी.”

विपक्ष ने दबाव बढ़ाया

खरात की गिरफ्तारी ने विपक्ष को एक मुद्दा दे दिया है.

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने खरात की तस्वीरें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, एकनाथ शिंदे और रुपाली चाकणकर के साथ साझा कीं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सीधे संदेश दिया. “कैप्टन अशोक खरात, यह बलात्कारी ज्योतिषी, आपकी भारतीय जनता पार्टी और महायुति सरकार से करीबी संबंध रखता है. आपने अपने स्वार्थ के लिए ऐसे कई बेवकूफ लोगों को अपने आसपास रखा है. अब उसे बचाने की गलती मत कीजिए.”

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने इस मामले को “महाराष्ट्र की एपस्टीन फाइल” बताया और एक्टिविस्ट विजय कुंभार की पोस्ट को शेयर किया, जिसमें इस गिरफ्तारी को एक बड़े संरक्षण नेटवर्क के खुलासे के रूप में दिखाया गया.

महायुति गठबंधन के अंदर से भी आलोचना हुई. एनसीपी (अजित पवार) नेता रुपाली थोमरे पाटिल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चाकणकर पर कार्रवाई की मांग की और इसे जानबूझकर की गई लापरवाही बताया.

उन्होंने कहा, “इस फर्जी बाबा की हिम्मत उसके समर्थन की वजह से बढ़ी. बिना समर्थन के कोई अपराधी इतना खुलकर काम नहीं कर सकता. अगर उन्होंने माफी मांगने को नहीं कहा होता, तो उन महिलाओं को एक साल पहले बचाया जा सकता था.”

पाटिल ने चाकणकर को हटाने की भी मांग की और कहा कि अगर वह पद पर बनी रहीं तो जांच प्रभावित हो सकती है. “मुझे 100 प्रतिशत यकीन है कि अगर श्रीमती रुपाली निलेश चाकणकर महिला आयोग में बनी रहीं, तो वह केस बदल देंगी. वह पुलिस को आदेश देंगी और पुलिस की सहमति से वीडियो को नष्ट कर देंगी. क्योंकि इस वीडियो को जब्त करना है, पुलिस कस्टडी से निकालकर कोर्ट में पेश करना है,” उन्होंने कहा.

इस मामले पर पूछे जाने पर बीजेपी के राज्य प्रवक्ता नवनाथ बान ने दिप्रिंट से कहा कि मामला जांच में है और पार्टी किसी भी दोषी को बचाएगी नहीं. “यह महिलाओं की सुरक्षा का मामला है. पार्टी पुलिस को स्वतंत्र रूप से जांच करने देगी और किसी भी दोषी को बचाएगी नहीं,” उन्होंने कहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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