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Friday, 20 February, 2026
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पहले मौर्य, अब पाठक: UP के CM आदित्यनाथ को अपने डिप्टी से क्यों रहना पड़ सकता है सतर्क

गुरुवार को UP के डिप्टी CM मौर्य और पाठक ने लखनऊ में RSS चीफ मोहन भागवत से मुलाकात की. सरसंघचालक ने पिछले दिन CM योगी आदित्यनाथ के साथ भी मीटिंग की थी.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को यहां अपने सरकारी आवास पर 100 से अधिक युवा ब्राह्मणों यानी ‘बटुकों’ को बुलाया. इसे उनके ‘प्रो-ब्राह्मण’ रुख को मजबूत करने और एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

इस कार्यक्रम में पूजा हुई और पुष्प वर्षा भी की गई, जिसमें बटुकों पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं. दिन में बाद में पाठक और दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की. एक दिन पहले सरसंघचालक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीब 35 मिनट तक मुलाकात की थी.

युवा ब्राह्मणों तक पहुंच बनाने की यह कोशिश उस घटना के दो दिन बाद आई, जब पाठक, जो लखनऊ सेंट्रल से बीजेपी विधायक हैं, मौर्य के साथ प्रयागराज में पिछले महीने हुए माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के लिए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ जा रहे बटुकों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना में शामिल हुए थे. अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य हैं.

पाठक ने पुलिस कार्रवाई को “महापाप” बताते हुए मंगलवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम में कहा था, “चोटी पकड़ कर बटुकों को खींचना बहुत गलत था. महापाप.”

पाठक के करीबी माने जाने वाले उत्तर प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “ब्राह्मणों की नाराजगी की चर्चा पहले से चल रही थी, और बटुकों पर लाठीचार्ज ने इसे और बढ़ा दिया. ऐसे समय में किसी को इस मुद्दे को उठाना चाहिए. इसकी जगह मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य की उपाधि पर सवाल उठा दिए. यह हिंदुओं को जोड़ने का समय है, ऐसे सवाल उठाने का नहीं. यह ब्राह्मणों की चिंताओं को दूर करने का भी समय है.”

“पाठक जी ने सही समय चुना है क्योंकि वह एक लोकप्रिय ब्राह्मण चेहरा हैं. पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उन्हें इसका इनाम आने वाले कैबिनेट विस्तार में या चुनाव के बाद दे सकता है,” उस पदाधिकारी ने आगे कहा.

लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में ब्रजेश पाठक का यह रुख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पसंद नहीं आ सकता. माघ मेले की घटना को लेकर साधु ने पहले ही प्रशासन के रवैये पर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा था. भीड़ नियंत्रण के कारण अविमुक्तेश्वरानंद को हाथ से खींची जाने वाली सवारी में मौनी अमावस्या स्नान के लिए आगे बढ़ने से रोक दिया गया था.

इसके बाद साधु ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को “हिंदू विरोधी” कहा, जबकि उनके सहायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को “ब्राह्मण विरोधी” बताया.

मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए “शंकराचार्य” की उपाधि के इस्तेमाल पर सवाल उठाए. विधानसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हर कोई यह उपाधि नहीं ले सकता और धार्मिक मर्यादा तथा कानून दोनों का पालन जरूरी है. उन्होंने अपने एक बयान में “कालनेमी” शब्द का भी इस्तेमाल किया, और कहा कि कुछ लोग धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करते हैं.

पाठक की इस पहल से कुछ हफ्ते पहले उपमुख्यमंत्री मौर्य ने भी प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद के करीबी सहयोगियों पर हुए लाठीचार्ज की खुलकर आलोचना की थी और उनसे मौनी अमावस्या स्नान के लिए आगे बढ़ने का अनुरोध किया था. इसके जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि मौर्य को मुख्यमंत्री होना चाहिए क्योंकि उन्हें “ऐसी स्थितियों को संभालना आता है.”

मौर्य के एक करीबी सहयोगी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “मौर्य जी कई बार कह चुके हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, इसलिए वह कहते हैं कि संगठन सरकार से बड़ा है. अगर कार्यकर्ता खुद को किनारे लगा हुआ महसूस करेंगे, तो पार्टी दोबारा सरकार कैसे बनाएगी. वह सिर्फ सरकार को सही रास्ते पर रहने की याद दिलाते हैं.”

“चुनाव में सिर्फ 11 महीने बचे हैं. सुधार की जरूरत है. बुलडोजर या लाठीचार्ज हर जगह काम नहीं करेगा,” सहयोगी ने कहा.

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. एसके द्विवेदी, जो लखनऊ विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं, ने इन घटनाओं को “स्वाभाविक सत्ता संघर्ष” बताया.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके उपमुख्यमंत्रियों के बीच ऐसे मतभेद असामान्य नहीं हैं. “लेकिन चुनाव नजदीक होने पर नेताओं को सार्वजनिक मतभेद कम करने चाहिए. योगी आदित्यनाथ निस्संदेह बहुत लोकप्रिय हैं, लेकिन केंद्रीय संगठन को कैबिनेट सहयोगियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना चाहिए. वरना विपक्ष को सवाल उठाने का मौका मिल सकता है,” डॉ. द्विवेदी ने द प्रिंट से कहा.

‘स्वाभाविक सत्ता संघर्ष’ उत्तर प्रदेश बीजेपी में

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब योगी आदित्यनाथ के उपमुख्यमंत्रियों ने खुलकर मुख्यमंत्री के रुख पर सवाल उठाए हों. जुलाई 2022 में पाठक ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के तबादलों के तरीके पर सवाल उठाए थे.

उन्होंने कहा था कि तबादले नियमों के मुताबिक नहीं हो रहे और विशेषज्ञ डॉक्टरों को लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से बिना सही व्यवस्था किए हटाया जा रहा है.

चूंकि पाठक खुद स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री हैं, इसलिए उनकी यह टिप्पणी मुख्यमंत्री कार्यालय की आलोचना मानी गई थी. अप्रैल 2021 में कोविड-19 मामलों में तेजी के दौरान भी पाठक ने एक पत्र लिखकर अस्पतालों में बेड और एंबुलेंस की कमी पर चिंता जताई थी और लखनऊ में खराब प्रबंधन पर सवाल उठाए थे.

इसी तरह 2024 में उपमुख्यमंत्री मौर्य ने नियुक्ति और कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर कहा था कि आउटसोर्सिंग या अनुबंध पर होने वाली सरकारी भर्तियों में आरक्षण नीति का सही पालन किया जाए. “संगठन सरकार से बड़ा है,” मौर्य ने अगस्त 2022 में और फिर 2024 में भी कहा था. इसे योगी आदित्यनाथ के लिए एक संकेत के रूप में देखा गया था.

गौरतलब है कि भाजपा ने 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मौर्य के नेतृत्व में लड़ा था, जब वह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे.

उत्तर प्रदेश के एक भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा कि पाठक और मौर्य दोनों को पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है. “जरूरत पड़ने पर वे अलग रुख अपना सकते हैं, और कभी-कभी यह जरूरी भी हो जाता है,” भाजपा नेता ने कहा.

उन्होंने आगे कहा, “हमें अपने वोट आधार को भी ध्यान में रखना है और पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय भी रखना है. इसमें कोई गलत बात नहीं है, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मुद्दे बहुत बड़े न बन जाएं.

अगर शंकराचार्य के करीबी सहयोगियों पर लाठीचार्ज होता है और उससे ब्राह्मणों के बीच गलत संदेश जाता है, तो किसी को आवाज उठानी चाहिए.”

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ मुद्दों पर सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं, और यही उनकी खास पहचान बन गई है.

“लोग उन्हें एक मजबूत और सख्त नेता के रूप में पसंद करते हैं. उन्होंने पहले भी आंतरिक चुनौतियों का सामना किया है, फिर भी वह नौ साल से अधिक समय से मुख्यमंत्री हैं. इससे साफ है कि उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का भरोसा हासिल है,” अधिकारी ने कहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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