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Friday, 20 February, 2026
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2 राज्यों ने रमज़ान में मुसलमानों को जल्दी छुट्टी दी तो एक पर क्यों लगे ‘धर्मनिरपेक्षता विरोधी’ आरोप

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के इस्लामिक विद्वानों ने फैसला किया है कि 40 दिन का यह त्योहार 19 फरवरी से मनाया जाएगा.

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नई दिल्ली: तेलंगाना सरकार ने मंगलवार को अपने मुस्लिम कर्मचारियों को रोज़ा खोलने और रमज़ान की खास नमाज़ में शामिल होने के लिए एक घंटा पहले, शाम 4 बजे काम छोड़ने की इजाज़त देने का फ़ैसला किया. इस फ़ैसले पर, भारतीय जनता पार्टी समेत विपक्ष ने यह तर्क दिया है कि सरकार धार्मिक भेदभाव कर रही है.

राज्य सरकार का कहना है कि यह कोई सांप्रदायिक कदम नहीं है.

सिर्फ तेलंगाना ही नहीं, बल्कि चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार ने भी राज्य के सभी विभागों, जिनमें गांव और वार्ड सचिवालय शामिल हैं, के मुस्लिम कर्मचारियों को यह काम में छूट दी है, जिससे वे शाम 4 बजे तक काम खत्म कर सकें. लेकिन आंध्र प्रदेश में, पिछले हफ्ते अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री एनएमडी फारूक द्वारा जारी सरकारी आदेश पर ज़्यादा ध्यान नहीं गया और इस पर वैसी आलोचना नहीं हुई.

दिप्रिंट से बात करते हुए फारूक ने कहा कि उन्होंने रमज़ान के दौरान आंध्र प्रदेश की जेलों में कैदियों के लिए खास इफ्तार पार्टी की भी मांग की थी. लेकिन अब तक न तो बीजेपी और न ही पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जन सेना पार्टी, जो खुलकर हिंदुत्व का समर्थन करती है, ने कोई आपत्ति जताई है.

तेलंगाना सरकार का आदेश 17 फरवरी की देर रात मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के तहत सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किया गया. इस आदेश में कहा गया है कि सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सरकारी कंपनियों में काम करने वाले स्थायी और कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए मुस्लिम कर्मचारियों को 19 फरवरी से 20 मार्च तक रमज़ान के दौरान शाम 4 बजे दफ्तर या स्कूल से घर जाने की इजाज़त होगी. लेकिन मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव के साइन वाले ज्ञापन में यह भी साफ किया गया है कि अगर कोई आपात स्थिति हो, तो कर्मचारियों को शाम 4 बजे के बाद वापस बुलाया जा सकता है और उन्हें काम करना होगा.

आदेश जारी होने के बाद विपक्ष, जो पहले भी तेलंगाना के मुख्यमंत्री पर “मुस्लिम तुष्टिकरण” का आरोप लगाता रहा है, ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की.

हालांकि, तेलंगाना कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रवक्ता सैयद निजामुद्दीन ने दिप्रिंट से कहा, “आंध्र प्रदेश में, जहां वे तेलुगु देशम के साथ सरकार में हैं, वहां बीजेपी इस फैसले की आलोचना क्यों नहीं करती. अगर हिंदुओं को दशहरा या शिवरात्रि के दौरान ऐसी छूट दी जाए तो हमें कोई समस्या नहीं होगी.”

तेलंगाना सरकार के आदेश के बाद, स्कूल शिक्षा निदेशक ने रमज़ान के दौरान स्कूलों का समय आधिकारिक रूप से बदल दिया. सभी उर्दू माध्यम सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल, साथ ही समानांतर माध्यम वाले स्कूलों में उर्दू सेक्शन और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान कॉलेज, अब सुबह 8 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक कक्षाएं चलाएंगे. बाकी शैक्षणिक सत्र में अतिरिक्त एक घंटे की कक्षाएं लेकर पढ़ाई की कमी पूरी की जा सकती है.

हैदराबाद और अन्य जिलों में भारतीय जनता पार्टी इकाइयों ने इस ज्ञापन को “पूरी तरह से अल्पसंख्यक तुष्टिकरण” बताया है.

इसे “असंवैधानिक” बताते हुए बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पद्मा वीरापनेनी ने कहा कि राज्य या केंद्र के श्रम कानूनों में ऐसा कोई नियम नहीं है.

उन्होंने कहा, “क्या वे भगवान के खास बच्चे हैं कि उन्हें यह विशेष छूट दी जा रही है. जब हिंदू 40 दिनों का व्रत रखते हैं, तब सबरीमाला यात्रा के दौरान ऐसी अनुमति क्यों नहीं दी जाती. संविधान की रक्षा की लड़ाई और पूरे देश में ‘रेड बुक’ लेकर घूमने के बावजूद, यह साफ तौर पर भेदभाव का मामला है. यह समानता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है, जहां एक ही वेतन पाने वाले लोगों के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है.”

‘धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ’

पिछले समय में भी, के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली भारत राष्ट्र समिति सरकार के दौरान रमज़ान महीने में यह राहत दी जाती थी. तब के मुख्य सचिव सोमेश कुमार के ज्ञापन में भी तेलंगाना के मुस्लिम कर्मचारियों को सरकारी या स्कूल के काम से शाम 4 बजे तक जाने की अनुमति दी गई थी.

केसीआर सरकार ने संक्रांति और दशहरा के दौरान लंबी छुट्टियां, साथ ही समक्का–सरक्का जनजातीय यात्रा, जिसे राज्य उत्सव घोषित किया गया था, की भी अनुमति दी थी. यह परंपरा रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार में भी जारी है.

विपक्ष के अनुसार, उसने कांग्रेस सरकार के इस कदम का विरोध इसलिए भी किया है क्योंकि ईसाई, जो ईस्टर के बाद आने वाले लेंट के दौरान 40 दिन का उपवास रखते हैं, को रेवंत रेड्डी सरकार के सत्ता में आने के बाद अब तक कोई विशेष छूट या अवकाश नहीं दिया गया है.

उत्तरी तेलंगाना के आसिफाबाद जिले के सिरपुर से भाजपा विधायक पलवई हरीश बाबू ने रमज़ान महीने की शुरुआत में राज्य के इस कदम को “धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ” बताया. उन्होंने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए पिछले साल जुबली हिल्स उपचुनाव के दौरान रेवंत रेड्डी के बयान को याद किया.

उस समय, अपने कैबिनेट में पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन को मंत्री बनाने का बचाव करते हुए रेवंत रेड्डी ने कहा था, “उन्हें मंत्री बनाकर हमने उन्हें अल्पसंख्यक हिस्सा दिया. मुसलमान मतलब कांग्रेस और कांग्रेस मतलब मुसलमान. आज कांग्रेस की ताकत, तेलंगाना सरकार की ताकत, उनके मुस्लिम भाई और बहन हैं. तेलंगाना सरकार की दो आंखें, मुसलमान और हिंदू, हमने कभी दोनों में कोई फर्क नहीं देखा.”

यह कहते हुए कि यह बयान सरकार की मंशा को सिर्फ एक समुदाय को खुश करने वाला दिखाता है, पलवई हरीश बाबू ने कहा, “अगर सरकार ने पहले ही सभी विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि दिशानिर्देशों को समान रूप से लागू किया जा सके, तो यह दिखाता है कि यह जानबूझकर किया गया है.”

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों राज्य सरकारों ने ये आदेश उस समय जारी किए जब सऊदी अरब के अधिकृत चांद देखने वाली समितियों ने चांद दिखाई देने के बाद बुधवार को रमज़ान की आधिकारिक शुरुआत की घोषणा की. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के इस्लामी विद्वानों के अनुसार, 40 दिन का यह त्योहार 19 फरवरी से मनाया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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