चेन्नई: 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ कुछ ही हफ्ते बचे हैं. ऐसे समय में पार्टी की महिला इकाई और कार्यकारिणी की सदस्य रंजना नाचियार ने तमिलगा वेत्री कझगम यानी टीवीके से इस्तीफा दे दिया है और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके का साथ ले लिया है.
पेशे से अभिनेत्री रंजना नाचियार जनवरी 2026 में टीवीके में शामिल हुई थीं. उससे पहले उन्होंने पिछले साल फरवरी में भाजपा छोड़ दी थी. उन्होंने भाजपा छोड़ने की वजह कथित हिंदी थोपने, द्रविड़ विचारधारा के प्रति नफरत और तमिलनाडु की लगातार अनदेखी को बताया था. वह भाजपा की राज्य इकाई के कला और सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की राज्य सचिव रह चुकी थीं और आठ साल से ज्यादा समय तक भाजपा से जुड़ी रहीं. तमिलनाडु में टीवीके खुद को एक मजबूत वैकल्पिक राजनीतिक ताकत के रूप में पेश करना चाहती है, इसलिए यह कदम विजय के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है.
रंजना ने टीवीके प्रमुख विजय पर महिलाओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पार्टी के नेता महिलाओं का सम्मान नहीं करते और महिला दिवस के मंच से उनके बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की गईं. रंजना ने उन टिप्पणियों का जिक्र किया जिनमें विजय ने कथित तौर पर निजी मामलों को “कोई खास बात नहीं” कहा था. रंजना ने इसे उनकी अलग रह रही पत्नी संगीता के प्रति असम्मान माना. उन्होंने पूछा, “कोई खास बात नहीं क्या है, आपकी पत्नी या आपकी शादी?” उन्होंने कहा कि जिस नेता को लाखों युवा फॉलो करते हैं, उसे सार्वजनिक बयान देते समय सावधानी रखनी चाहिए ताकि गलत उदाहरण न बने.
अब टीवीके छोड़ने की वजह बताते हुए रंजना ने कहा कि पार्टी नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं के दर्द की परवाह नहीं करता. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने विजय पर आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी में “अलग तरह की राजनीति” करने के अपने वादे पूरे नहीं किए.
रंजना नाचियार ने दिप्रिंट से कहा, “सबसे बड़ी समस्या यह थी कि फैसले अक्सर एकतरफा होते थे और जमीनी स्तर की आवाजों को सुनने की बहुत कम जगह थी. जो कार्यकर्ता सक्रिय रूप से काम कर रहे थे, उन्हें लगता था कि उनकी मेहनत को सही तरीके से पहचाना नहीं जा रहा. मैंने जो कहा, वह सिर्फ मेरे बारे में नहीं था, बल्कि कई जमीनी कार्यकर्ताओं की चिंता थी.”
उन्होंने कहा कि नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो सबको साथ लेकर चले और जहां जमीनी कार्यकर्ता भी भरोसे के साथ महसूस करे कि उसकी बात मायने रखती है. लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा माहौल नहीं है और इसी वजह से निराशा पैदा हुई.
रंजना ने कहा कि विजय ने घोषणा की थी कि वह पार्टी में अलग सोच, अलग विचारधारा और बिना गठबंधन की राजनीति लेकर आएंगे. “लेकिन उन्होंने अपना वादा नहीं निभाया. उन्हें लोगों, कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिलना चाहिए. वह कार्यकर्ताओं के लिए भी उपलब्ध नहीं हैं और आम जनता के लिए भी नहीं. नेतृत्व सिर्फ अधिकार का नाम नहीं है, यह हर कार्यकर्ता के प्रति जिम्मेदारी भी है. जब जमीनी आवाजें नहीं सुनी जातीं तो नींव कमजोर हो जाती है. मैंने यह दूरी महसूस की,” नच्चियार ने कहा.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर सवालों को “एकतरफा तरीके” से संभाला जाता है और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी होती है. उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा था कि वह एमजी रामचंद्रन से प्रेरणा लेते हैं, इसलिए लोगों को उनसे उम्मीद थी और मुझे भी उम्मीद थी कि वह एमजीआर जैसे होंगे. एमजीआर ऐसे नहीं थे. वह लोगों से मिलते थे और उनसे बात करते थे, लेकिन विजय सिर्फ दूर कार में बैठकर हाथ हिलाते हैं और हमने ऐसा नहीं सोचा था.”
रंजना गुरुवार को डीएमके में शामिल हो गईं और उन्होंने टीवीके की तुलना डीएमके की स्थापित राजनीतिक स्थिति और लोगों के भरोसे से की. उन्होंने कहा, “डीएमके पहले से सत्ता में है और हम जानते हैं कि लोग उन पर भरोसा करते हैं और डीएमके पर विश्वास करते हैं.”
उन्होंने अपने इस फैसले को ज्यादा परिपक्व और जवाबदेह राजनीतिक ताकत के साथ जुड़ने का कदम बताया. उन्होंने कहा, “डीएमके में शामिल होने का मेरा फैसला इस भरोसे पर आधारित है कि मैं ऐसे सिस्टम में काम कर सकती हूं जहां ढांचा मजबूत हो, कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संवाद बेहतर हो. मैं लोगों की प्रभावी सेवा पर ध्यान देना चाहती हूं. मैं राजनीति में पद के लिए नहीं आई, असर के लिए आई हूं. मुझे लगता है कि डीएमके मुझे लोगों के लिए वास्तव में काम करने का बेहतर मंच देती है.”
टीवीके ने अभी तक रंजना नाचियार के इस्तीफे या उनकी आलोचनाओं पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. संपर्क करने पर टीवीके के संयुक्त महासचिव सीटीआर निर्मलकुमार ने कहा कि वह रंजना नाचियार के इस्तीफे को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहते, क्योंकि वह अभी हाल ही में पार्टी में आई थीं और किसी पद की उम्मीद कर रही थीं. उन्होंने कहा, “उन्हें पद नहीं मिला तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी. अब आगे बढ़ते हैं.”
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