बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार ने शनिवार को मीडिया के सामने एकजुटता का प्रदर्शन किया. इसका उद्देश्य उनके बीच बढ़ते विवाद की अटकलों को खत्म करना था.
शिवकुमार ने सिद्धारमैया के सरकारी आवास पर नाश्ता किया. यह कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर किया गया ताकि दोनों नेताओं में कम से कम अस्थायी सुलह हो सके. नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद राज्य सरकार की स्थिरता और पार्टी के एक अहम गढ़ को प्रभावित कर रहा था.
“हम एकजुट हैं और मेरे तथा डीके शिवकुमार के बीच कोई मतभेद नहीं है,” सिद्धारमैया ने कहा.
उन्होंने बताया कि हाईकमान ने दोनों नेताओं को अपने मतभेद दूर करने का निर्देश दिया है.
77 वर्ष के सिद्धारमैया ने यह भी बताया कि वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने मुख्यमंत्री के कानूनी सलाहकार एएस पोन्नाना को फोन कर नाश्ते की बैठक तय करने और शिवकुमार को बुलाने को कहा था.
सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि वे बाद में शिवकुमार के घर दोपहर के खाने पर जाएंगे.
दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से प्रभुत्व को लेकर खींचतान चल रही है. शिवकुमार पार्टी हाईकमान से उस वादे को पूरा करवाने की कोशिश में हैं जिसमें मौजूदा कार्यकाल के बीच में मुख्यमंत्री बदलने की बात कही गई थी.
दोनों नेताओं ने बारी-बारी से मीडिया को संबोधित किया और बार-बार कहा कि उनके बीच कोई दुश्मनी नहीं है. सिद्धारमैया ने तो यहां तक कहा कि मीडिया ही “भ्रम फैला रहा है”.
हालांकि शिवकुमार सार्वजनिक तौर पर सिद्धारमैया के आगे झुकते नजर आए हैं, लेकिन घटनाक्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि डिप्टी सीएम अंदरूनी तौर पर दबाव बढ़ा रहे हैं.
कांग्रेस हाईकमान ने मई 2023 में दोनों नेताओं के बीच सुलह करवाई थी और भरोसा दिलाया था कि दोनों बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनेंगे.
लेकिन दोनों का रुख इस पर अलग-अलग रहा है. सिद्धारमैया कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे. शिवकुमार का रुख कभी-कभी बदलता रहा है. वे “गुप्त समझौते” की बात स्वीकार भी कर चुके हैं और सार्वजनिक तौर पर सिद्धारमैया के बयान का समर्थन भी कर चुके हैं.
शनिवार को सिद्धारमैया ने ऐसे किसी समझौते के सवाल पर जवाब देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, “हाईकमान जो भी कहेगा, हम उसका पालन करेंगे.”
दोनों नेताओं ने कहा कि हाईकमान के कहने पर वे दिल्ली जाएंगे.
उन्होंने यह भी कहा कि विधायक और अन्य नेता जो दिल्ली जा रहे हैं, वे संभावित कैबिनेट विस्तार की स्थिति में मंत्री पद मांगने के लिए जा रहे हैं.
शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस में कोई गुटबाज़ी नहीं है और वे दोनों पार्टी के वफादार सिपाही हैं.
दोनों ने कहा कि बैठक में 2028 चुनाव रणनीति, आगामी शीतकालीन सत्र में विपक्ष का मुकाबला कैसे किया जाए और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई. लेकिन नेतृत्व विवाद पर कोई बात नहीं हुई.
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