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बेरोजगारी की बढ़ती कतार, विधानसभा में आई वैकेंसी इंजीनियर की लगी कतार
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नई दिल्ली: बेरोजगारी भारत की सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभरी है. नोटबंदी और जीएसटी के बाद आंकड़े बताते हैं कि किस तरह से बेरोजगारी देश में बढ़ी है. पिछले दिनों नेशनल सैंपल सर्वे आफिस की एक रिपोर्ट लीक हुई जिससे खुलासा हुआ कि वर्ष 2017-18 के दौरान भारत में बेरोजगारी दर बीते 45 वर्षों में सबसे ज्यादा रही है. वहीं इसी साल खबर आई ती कि बीते साल करीब 1.10 करोड़ नौकरियां खत्म हुई हैं.


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यह बात भूलनी नहीं चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में बार बार कहा था कि वह 2करोड़ नौकरियां उत्पन्न करेंगे. लेकिन देश में बेरोजगारों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है.

तमिलनाडु विधानसभा में 14 स्वीपर की पोस्ट के लिए इंजीनियर और एमबीए ने किया आवेदन 

नया मामला तमिलनाडु का है जहां विधानसभा में स्वीपर और सेनीटरी वर्कर के 14 पदों के लिए आवेदन मंगाए गए थे. इसके लिए करीब 4600 उम्मीदवारों ने प्रविष्टियां भेजी हैं. चौंकाने वाली बात ये हैं कि इन प्रविष्टियों में इंजीनियरों और एमबीए किए उम्मीदवारों की संख्या हजारों में है यही नहीं इनमें डिप्लोमाधारियों ने भी इन पदों के लिए आवेदन भेजा है.


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विधानसभा सचिवालय ने इन पदों के लिए बीते 26 सितंबर को आवेदन मंगाए थे. उम्मीदवारों के सिलेक्शन के लिए एकमात्र योग्यता शारीरिक रूप से सक्षम और न्यूनतम उम्र 18 साल रखी थी. जबकि अधिकतम उम्र के बारे में इसमें कोई जिक्र नहीं था. सचिवालय को इस मामले में कुल 4607 प्रविष्टियां प्राप्त हुए, जिसमें एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज से आईं एप्लीकेशन भी शामिल हैं. इसमें से 677 एप्लीकेशन सिरे से खारिज कर दी गईं हैं क्योंकि ये वही लोग थे जिन्होंने एमबीए और इंजीनियरिंग की थी

स्वीपर की पोस्ट के लिए 10 रिक्तियां थी वहीं सैनिटरी वर्कर के लिए 4 वैकेंसी थी.

बता दें कि रोजगार के अवसर पैदा करने में सरकारों की बड़ी भूमिका होती है. लेकिन इनदिनों भारत में बेरोज़गारी की दर 45 साल में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर 2017-18 में 6.1 प्रतिशत रही है . इसने एक बार फिर मोदी सरकार के रोज़गार सृजन पर सवाल उठाया है और. वहीं सरकार ने अपनी किरकिरी होने पर कहा है कि डाटा को नये तरीके से तैयार किया जा रहा था, इसलिए ये रिपोर्ट जारी नहीं की गई.

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस की रिपोर्ट जिसे सरकार ने दबा के रखा था, में बेरोज़गारी की दर शहरी क्षेत्र में महिलाओं में 27.2 प्रतिशत और पुरुषों में 18.7 प्रतिशत रही. यही आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के लिए 13.6 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 17.4 प्रतिशत रहा.


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