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Friday, 6 March, 2026
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सिद्धारमैया ने तीसरा घाटे वाला बजट पेश किया, 5 गारंटी योजनाओं के लिए 52,000 करोड़ रुपये का प्रावधान

2026-27 में रेवेन्यू डेफिसिट 22,957 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 19,262 करोड़ रुपये से लगातार बढ़ रहा है.

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बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को लगातार तीसरा राजस्व घाटे वाला बजट पेश किया. इस बजट में यह दिखता है कि सरकार को विकास, गारंटी योजनाओं और बढ़ती वित्तीय देनदारियों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ती जा रही है.

2026-27 में राजस्व घाटा 22,957 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. यह पिछले वित्त वर्ष के 19,262 करोड़ रुपये से बढ़ गया है. सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्र से कम पूंजी प्रवाह और अन्य अनुमानित नुकसान ने इन चुनौतियों को और बढ़ा दिया है.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राजस्व की उपलब्धता की इन सीमाओं के बीच “राज्य ने विकास, कल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अपने खर्च को सावधानी से प्राथमिकता दी है.”

हाल के वर्षों में कर्ज बढ़ने के बावजूद यह दक्षिणी राज्य मुश्किल से वित्तीय जिम्मेदारी के मानकों के भीतर रह पाया है.

सरकार के 1,32,000 करोड़ रुपये कर्ज लेने का अनुमान है, जो पहले 1,16,000 करोड़ रुपये था.

बजट के अनुसार, “वित्तीय घाटा 99,449 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो जीएसडीपी का 2.95 प्रतिशत है. साल के अंत तक कुल देनदारियां 8,24,389 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो जीएसडीपी का 24.94 प्रतिशत है.”

सिद्धारमैया ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा, जबकि बजट का आकार 2025-26 के 4,09,549 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 4,48,004 करोड़ रुपये हो गया. हालांकि कुल खर्च के संशोधित अनुमान को घटाकर 3,95,307 करोड़ रुपये कर दिया गया.

राज्य सरकार ने केवल कर्ज चुकाने के लिए 35,316 करोड़ रुपये अलग रखे हैं.

इन सीमाओं के बावजूद सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने अपनी पांच गारंटी योजनाओं के लिए फंड पर ध्यान बनाए रखा है.

अब तक सरकार इन पांच गारंटी योजनाओं पर 1,21,598 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. इनमें से लगभग 52,000 करोड़ रुपये इस वित्त वर्ष के लिए तय किए गए हैं.

गृह लक्ष्मी योजना पर 28,608 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि गृह ज्योति योजना पर 10,578 करोड़ रुपये खर्च होंगे. युवा निधि योजना की लागत 913 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. अन्न भाग्य योजना पर 6,200 करोड़ रुपये खर्च होंगे. महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना शक्ति पर 5,300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

हालांकि कर्नाटक सरकार ने गारंटी योजनाओं को केवल जरूरतमंद लोगों तक सीमित करके उन्हें व्यवस्थित करने की कोशिश की है, लेकिन कांग्रेस ने अपने रुख में सावधानी बरती है ताकि किसी भी वर्ग को नाराज न किया जाए, खासकर शहरी और ग्रामीण निकायों के आने वाले चुनावों को देखते हुए.

सरकार ने पूंजीगत खर्च के लिए 74,682 करोड़ रुपये अलग रखे हैं, जबकि 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह 92,456 करोड़ रुपये था, जिसमें कर्ज चुकाने का पैसा भी शामिल था.

इन सीमाओं के बावजूद सरकार ने विवादित टनल रोड परियोजना के लिए 40,000 करोड़ रुपये अलग रखे हैं.

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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