बेंगलुरु: कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे ने डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के सामने कम से कम दो विकल्प खोल दिए हैं. 34 सदस्यीय कैबिनेट में महिलाओं और वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिलने को लेकर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को दूर करने का यह एक मौका हो सकता है.
कैबिनेट में शामिल होने की दौड़ में एक नाम संदूर से पहली बार विधायक बनीं ई. अन्नपूर्णा तुकाराम का है. दूसरा विकल्प एम. कृष्णप्पा या बसवराज शिवन्नावर को शामिल करना है. ये दोनों वरिष्ठ कांग्रेस नेता पहले कैबिनेट विस्तार में नज़रअंदाज़ कर दिए गए थे.
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “नगेंद्र की जगह अन्नपूर्णा को शामिल किए जाने की संभावना है, क्योंकि वह तीनों श्रेणियों में फिट बैठती हैं—महिला, अनुसूचित जनजाति और क्षेत्र.”
शिवकुमार सरकार अब तक कैबिनेट में किसी महिला सदस्य को शामिल करने पर सहमति नहीं बना पाने के कारण कड़ी आलोचना का सामना कर रही है. इससे महिलाओं के समर्थन पर काफी हद तक निर्भर पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है. अगर अन्नपूर्णा को कैबिनेट में शामिल किया जाता है, तो इससे वंचित समुदायों के साथ अन्याय के आरोपों को कम करने में मदद मिल सकती है.
कल्याण कर्नाटक क्षेत्र की रहने वाली अन्नपूर्णा, बेल्लारी के सांसद ई. तुकाराम की पत्नी हैं. उन्होंने नवंबर 2024 में अपने पति की खाली की गई सीट पर चुनाव जीता था. उन्होंने BJP के ST मोर्चा अध्यक्ष बंगारू हनुमंतु को हराया था.
नागेंद्र के इस्तीफे के बाद अन्नपूर्णा के कैबिनेट में शामिल होने की संभावना बढ़ गई है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है.
लेकिन इस देरी ने राज्य में विपक्ष को शिवकुमार सरकार और कांग्रेस को घेरने का मौका दे दिया है. विपक्ष कैबिनेट और पार्टी की राज्य इकाई के अहम पदों पर किसी भी महिला नेता के नहीं होने का मुद्दा उठा रहा है.
‘पार्टी हाईकमान का फैसला मानेंगे’
महिला संगठनों और कांग्रेस की अपनी महिला मोर्चा ने भी कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इससे महिला समर्थकों के बीच पार्टी की छवि को नुकसान हो रहा है.
शिवकुमार ने 3 जून को सिद्धारमैया की जगह मुख्यमंत्री का पद संभाला था. उस समय उनके मंत्रिपरिषद में 13 अन्य लोगों को शामिल किया गया था. इसके बाद उन्हें बाकी खाली पद भरने के लिए पूरे दो महीने इंतज़ार करना पड़ा. इस दौरान ज्यादातर विधायक दिल्ली में डेरा डाले रहे और कैबिनेट में जगह पाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व के सामने लॉबिंग करते रहे.
इस महीने की शुरुआत में हुए कैबिनेट विस्तार से पार्टी के भीतर चल रहा असंतोष खत्म नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया. कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने उन्हें नजरअंदाज किया है. कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ने के संकेत भी दिए.
बढ़ते असंतोष ने शिवकुमार की मुश्किलें और बढ़ा दीं. इससे उनका ज्यादा समय सरकार चलाने पर ध्यान देने के बजाय पार्टी के अंदर बार-बार उठ रहे विवादों को संभालने में जा रहा है.
दिप्रिंट को दिए एक पुराने इंटरव्यू में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद ने देरी की वजह “खींचतान और दबाव” को बताया था. घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक, लंबे समय से जोरदार लॉबिंग चल रही है. वरिष्ठ नेता अपनी पसंद के उम्मीदवारों के लिए दबाव बना रहे हैं और दूसरे नेताओं की ओर से सुझाए गए नामों का विरोध कर रहे हैं.
इस महीने की शुरुआत में महिलाओं पर केंद्रित संगठन ‘नावेद्दु निल्लदिद्दारे’ ने मुख्यमंत्री को लिखे खुले पत्र में कहा था कि कैबिनेट ने “महिलाओं को बाहर रखने की स्थिति को और मजबूत किया है.” संगठन ने कहा था कि सिर्फ पुरुषों वाली कैबिनेट “कोई भूल नहीं, बल्कि एक राजनीतिक फैसला है.”
दूसरे दावेदार
पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर, कलबुर्गी की कनीज फातिमा और चिकमगलूरु की नयना मोटम्मा भी पार्टी के लिए संभावित विकल्प हैं.
हालांकि, एम. रूपकला भी पहले कैबिनेट की दौड़ में थीं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक अब उन्हें शामिल किए जाने की संभावना कम है. इसकी वजह यह है कि उनके पिता के.एच. मुनियप्पा पहले से ही कैबिनेट में हैं.
दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट की थी कि कैबिनेट की दौड़ में शामिल चारों महिला विधायक दूसरी पीढ़ी की राजनेता हैं.
पार्टी राज्य कैबिनेट की आखिरी बची हुई सीट पर एक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता को शामिल करने पर भी विचार कर रही है.
वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि सिद्धारमैया अब किसी महिला उम्मीदवार के लिए जोर नहीं दे रहे हैं क्योंकि वह चाहते हैं कि पार्टी हाईकमान बसवराज नीलप्पा शिवन्नावर को कैबिनेट में शामिल करे.
सिद्धारमैया खेमे से जुड़े माने जाने वाले एक कांग्रेस नेता ने कहा, “हमारे पास महिला उम्मीदवार नहीं है. हम चाहते हैं कि शिवन्नावर को कैबिनेट में शामिल किया जाए.”
शिवन्नावर और सिद्धारमैया दोनों कुरुबा समुदाय से आते हैं, जिसका मध्य और उत्तर कर्नाटक में काफी प्रभाव है.
शिवन्नावर ने शुक्रवार को पत्रकारों से कहा, “यह सच है कि मैं कैबिनेट में जगह पाने का दावेदार हूं और सिद्धारमैया ने मेरे पक्ष में बात की है. हालांकि, पार्टी हाईकमान जो भी फैसला करेगा, हम उसे मानेंगे.”
कर्नाटक में कुरुबा समुदाय से पहले ही दो मंत्री हैं—यतींद्र सिद्धारमैया और बैराठी सुरेश. यही एक और वजह है कि दूसरे समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता तीसरे कुरुबा नेता को कैबिनेट में शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठा सकते हैं.
एक अन्य विकल्प पूर्व आवास मंत्री एम. कृष्णप्पा हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के जल्द होने वाले चुनावों को देखते हुए उन्हें कैबिनेट में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. बेंगलुरु में कृष्णप्पा और उनके विधायक बेटे प्रिया कृष्णा का राजनीतिक प्रभाव काफी माना जाता है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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