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Monday, 15 July, 2024
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‘Shame on BJP’ महुआ मोइत्रा के निष्कासन पर बोलीं ममता बनर्जी- संसदीय लोकतंत्र के साथ हुआ विश्वासघात

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मोइत्रा के निष्कासन का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. इससे पहले सदन में लोकसभा की आचार समिति की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद उसे मंजूरी दी गई, जिसमें मोइत्रा को निष्कासित करने की सिफारिश की गई थी.

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को ‘कैश फॉर क्वेरी’ के मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित करने के फैसले की निंदा की और इस कदम को देश के संसदीय लोकतंत्र के साथ ‘‘विश्वासघात’’ करार दिया.

मोइत्रा को ‘‘कैश फॉर क्वेरी’’ के मामले में शुक्रवार को सदन की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया.

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मोइत्रा के निष्कासन का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी. इससे पहले सदन में लोकसभा की आचार समिति की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद उसे मंजूरी दी गई, जिसमें मोइत्रा को निष्कासित करने की सिफारिश की गई थी.

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “2005 में जब 10 सांसदों को निष्कासित किया गया था, उसी दिन रिपोर्ट पेश की गई थी, उसी दिन चर्चा हुई थी वे भी 10 सांसदों के लिए.”

बनर्जी ने कहा, ‘‘यह संसदीय लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है. जिस तरह से महुआ मोइत्रा को निष्कासित किया गया, उसकी हम निंदा करते हैं, पार्टी उनके साथ खड़ी है. वे (भाजपा) हमें चुनाव में नहीं हरा सकते, इसलिए उन्होंने बदले की राजनीति का सहारा लिया है. यह दुखद दिन है और भारतीय संसदीय लोकतंत्र के साथ विश्वासघात है.’’

टीएमसी प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा ने मोइत्रा को अपना पक्ष रखने की भी अनुमति नहीं दी.

बनर्जी ने कहा, ‘‘लेकिन, वह (मोइत्रा) बड़े जनादेश के साथ संसद में लौटेंगी. भाजपा सोचती है कि पार्टी जो चाहे कर सकती है, क्योंकि उनके पास प्रचंड बहुमत है. उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि एक दिन ऐसा भी आ सकता है, जब वे सत्ता में नहीं रहेंगे.’’

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री डॉ. शशि पांजा ने कहा,”…एक महिला का सत्ता में होना ऐसी चीज है जिसे भाजपा बर्दाश्त नहीं कर सकती…. उन्होंने(भाजपा) कैसे सोचा कि यह निष्कासन उन्हें(महुआ मोइत्रा) चुप कराने के लिए काफी है? वे 2024 में फिर चुनाव लड़ेंगी.”

महुआ का निष्कासन पर क्या बोला विपक्ष

लोकसभा सदस्य के रूप में TMC सांसद महुआ मोइत्रा के निष्कासन पर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “सबसे बड़ा विरोधाभास है कि एक व्यक्ति पर आपने कुछ आरोप लगाए, सभी उस पर बोल रहे थे पर उनको(महुआ मोइत्रा) बोलने और सफाई देने का मौका नहीं दिया गया. मुझे लगता है कि ये न्यायोचित नहीं है…भाजपा सशक्त महिलाओं से घबराती हैं. अडाणी पर अगर कोई बात कर ले तो सदन में आपके लिए जगह नहीं है. अडाणी और मोदी के रिश्तों पर जो भी सवाल उठाएगा उसके खिलाफ हर प्रकार की मनमानी कार्रवाई की जाएगी.”

वहीं कांग्रेस नेता अब्दुल खालिक ने कहा, “जो भी अडाणी पर सवाल उठाता है ये सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करती है. महुआ मोइत्रा के केस में भी हमने वही देखा. ये सरकार डरती है… सरकार लोकतंत्र को खत्म कर रही है.”

‘कंगारू अदालत’ ने बिना सबूत मुझे सजा दे दी: महुआ मोइत्रा

तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने शुक्रवार को लोकसभा से अपने निष्कासन की तुलना ‘कंगारू अदालत’ द्वारा सजा दिए जाने से करते हुए आरोप लगाया कि सरकार लोकसभा की आचार समिति को विपक्ष को झुकने के लिए मजबूर करने का हथियार बना रही है.

लोकसभा की आचार समिति की सिफारिश पर सदन की सदस्यता से निष्कासित किये जाने के कुछ मिनट बाद अपनी प्रतिक्रिया में मोइत्रा ने कहा कि उन्हें उस आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया है, जो अस्तित्व में ही नहीं है और उन्हें नकदी या उपहार दिए जाने का कोई सबूत नहीं है.

लोकसभा की आचार समिति ने ‘पैसे लेकर सवाल पूछने’ के मामले में महुआ मोइत्रा को सदन की सदस्यता से निष्कासित करने की सिफारिश की थी.

उन्होंने कहा कि इस मामले में दो शिकायतकर्ताओं में से एक उनका पूर्व प्रेमी है जो गलत इरादे से आचार समिति के सामने आम नागरिक के रूप में पेश हुआ.

महुआ ने कहा, ‘‘आचार समिति मुझे उस बात के लिए दंडित कर रही है, जो लोकसभा में सामान्य है, स्वीकृत है तथा जिसे प्रोत्साहित किया गया है.’’

उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पूरा मामला ‘लॉगिन विवरण’ साझा करने पर आधारित है, लेकिन इस पहलू के लिए कोई नियम तय नहीं हैं.


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