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Thursday, 12 February, 2026
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यूएस-भारत व्यापार समझौते पर RSS सहयोगी सरकार के साथ, कहा—किसानों-व्यापारियों को मिलेगा फायदा

स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक अश्विनी महाजन का दावा है कि फैक्टशीट में कहा गया है कि भारत ने अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने का इरादा जताया है, कोई पक्का वादा नहीं किया है.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े किसान और व्यापार क्षेत्र के संगठनों ने अंतरिम अमेरिका-भारत व्यापार समझौते का समर्थन किया है. उनका कहना है कि इस हफ्ते दोनों देशों द्वारा जारी ढांचा भारत के आर्थिक हितों के लिए फायदेमंद होगा.

भारतीय किसान संघ (बीकेएस) और स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने कहा कि यह समझौता भारत के कुल आर्थिक हितों को मजबूत करेगा और सुरक्षा प्रावधानों के जरिए चिंताओं का समाधान करेगा.

एसजेएम के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने दिप्रिंट से कहा कि इस समझौते के कई पहलू हैं और इसे बिना पक्षपात के देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह समझौता खासकर श्रम-प्रधान उद्योगों को फायदा पहुंचा सकता है. हालांकि, अमेरिका के सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों, जिनमें जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) फसलें भी शामिल हैं, को लेकर चिंताओं को अंतिम समझौते में “टैरिफ रेट कोटा प्रावधानों” के जरिए सुलझाना होगा, जैसा कि वाणिज्य मंत्री ने वादा किया है.

महाजन ने कहा, “500 अरब डॉलर के आंकड़े से भ्रम पैदा हुआ. भारत ने सिर्फ खरीदने का इरादा जताया है—कोई पक्का वादा या प्रतिबद्धता नहीं की है. अमेरिकी बयान में भी साफ किया गया है कि यह इरादा है, कोई बाध्यता नहीं.”

उन्होंने कहा कि समय के साथ और जानकारी सामने आएगी. उन्होंने जोड़ा कि बढ़ते आयात का एक कारण भारत पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों का हटना भी है, “इसमें विमान, विमान के पुर्जे, टेक्नोलॉजी और आईसीटी शामिल हैं. कोई भी व्यापार समझौता खरीद की गारंटी नहीं देता; यह प्रतिस्पर्धा और कीमत पर निर्भर करता है.”

विपक्ष ने इस समझौते को लेकर बीजेपी सरकार की आलोचना की है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता देश की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता करता है और किसानों की सुरक्षा को कमजोर करता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव में आकर भारत के हित “समर्पण” करने का आरोप लगाया. उनका दावा था कि भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ है जबकि अमेरिका पर 0 प्रतिशत.

इस पर जवाब देते हुए महाजन ने कहा कि असल में टैरिफ ढांचा भारत के पक्ष में है.

उन्होंने कहा, “हम सुन रहे हैं कि भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ है और अमेरिका पर 0 प्रतिशत, लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि अमेरिका के अन्य साझेदार 18 प्रतिशत से ज्यादा टैरिफ झेल रहे हैं. व्यापार सिद्धांत सापेक्ष टैरिफ की बात करता है—न कि पूर्ण टैरिफ की. ये टैरिफ अमेरिकी उपभोक्ताओं और उत्पादकों पर टैक्स की तरह हैं, इसलिए भारत को फायदा है और विशेषज्ञ भी यही मानते हैं,” उन्होंने कहा.

रूसी तेल खरीद पर महाजन ने कहा कि इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, “यूएस अंतरिम समझौते में रूसी तेल का कोई ज़िक्र नहीं है, इसलिए यह इस डील का हिस्सा नहीं है. अमेरिकी बयान से लगता है कि भारत उनके सामान पर 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ हटाएगा और बदले में रूसी तेल खरीद बंद करेगा—लेकिन भारत पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. हम अपने संप्रभु अधिकारों का पालन करते हैं. अमेरिकी दंडात्मक टैरिफ व्यापार नियमों के खिलाफ थे; उनका हटना स्वागत योग्य है. भारतीय तेल कंपनियां खुद तय करेंगी कि क्या खरीदना है—निजी कंपनियां अमेरिका से टकराव से बच सकती हैं.”

उन्होंने कहा कि रूसी तेल खरीद का फायदा अब पहले जैसा नहीं रहा है, क्योंकि तेल कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के नुकसान को भी ध्यान में रखकर फैसला कर रही हैं. लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा, “किससे क्या खरीदना है, यह तय करना हमारा संप्रभु अधिकार है.”

महाजन ने कहा, “निर्यात बढ़ाने के अलावा, यह समझौता उन अमेरिकी प्रतिबंधों को भी हटाता है, जो विमान के पुर्जों जैसे रणनीतिक सामान के भारतीय शिपमेंट को रोक रहे थे. निर्यातक खुश हैं—अब वे आसानी से काम कर सकेंगे.”

उन्होंने अमेरिकी बयानों में हुए बदलाव का जिक्र किया. पहले जारी ढांचे में कहा गया था कि भारत “अमेरिकी उत्पादों की अधिक खरीद के लिए प्रतिबद्ध है और 500 अरब डॉलर से ज्यादा के अमेरिकी ऊर्जा, आईसीटी, कृषि, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदेगा.”

महाजन ने कहा कि संशोधित बयान में अब साफ किया गया है कि भारत 500 अरब डॉलर से ज्यादा के अमेरिकी ऊर्जा, आईसीटी, कोयला और अन्य उत्पाद खरीदने का इरादा रखता है, “संशोधित फैक्टशीट में कृषि उत्पादों का जिक्र हटा दिया गया है और दालों का उल्लेख भी नहीं है. अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करते समय सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि जीएम खाद्य भारतीय बंदरगाहों या रसोई तक न पहुंचे.”

भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने सरकार का धन्यवाद किया कि जीएम फसलों के आयात की अनुमति नहीं है और समझौते का स्वागत किया. संगठन ने कहा, “वाणिज्य मंत्री ने साफ किया है कि जीएम फसलों के आयात की अनुमति नहीं है. भारतीय किसान, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और बीकेएस इस पर भरोसा करते हैं और सरकार को धन्यवाद देते हैं.”

संगठन ने कहा कि वह व्यापार समझौते के नाम पर हो रही राजनीति, प्रदर्शन और भारत बंद के आह्वान का समर्थन नहीं करता.

बीकेएस के महासचिव मोहिनी मिश्रा ने दिप्रिंट से कहा कि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों का निर्यात किसानों को बेहतर दाम दिलाएगा. उन्होंने कहा, “मसाले, चाय, कॉफी, नारियल, नारियल तेल, सुपारी, काजू, वनस्पति मोम, एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम और कुछ अनाज जैसे कई उत्पाद, जिन पर पहले अमेरिका में ज्यादा शुल्क लगता था, अब कम या खत्म शुल्क का फायदा पाएंगे. अमेरिका से आयात पर सीमा तय होने से भारतीय किसानों को लाभ मिलेगा.”

उन्होंने कहा, “इससे छोटे और बड़े किसानों को अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी. बीकेएस सरकार का स्वागत और धन्यवाद करता है.”

मिश्रा ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को बड़ा फायदा होगा.

उन्होंने कहा, “अमेरिका के कई कृषि उत्पादों के आयात पर रोक हमें आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी—जिसका बीकेएस स्वागत करता है. सोयाबीन तेल और डीडीजीएस जैसे फसल प्रसंस्करण मुद्दों पर हम अंतिम समझौते के बाद, संभवतः मार्च में, सरकार से पूरी जानकारी मिलने के बाद अपनी राय देंगे. अभी तक के फैसलों से लगता है कि भारतीय किसानों को बड़ा लाभ होगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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