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Friday, 20 February, 2026
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रेखा गुप्ता की चूक से वेलफेयर योजनाओं की रफ्तार धीमी, आयुष्मान भारत और अटल कैंटीन पर असर

दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर एक साल पूरा होने के बाद गुप्ता कहती हैं, 'यह वादों की नहीं, बल्कि नतीजों की सरकार है.' कुछ चुनावी वादे पूरे हो गए हैं, कुछ योजनाएं अभी लागू होनी बाकी हैं.

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नई दिल्ली: रेखा गुप्ता सरकार के एक साल पूरा होने से कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बयान वायरल हो गया. 14 फरवरी को गोरखपुर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए योगी ने दिल्ली की हवा की गुणवत्ता की तुलना “गैस चेंबर” से की.

बीजेपी के सूत्रों ने कहा कि यह बयान सरकार के भीतर काफी “बेचैनी” का कारण बना, क्योंकि यह उस समय आया जब कुछ ही दिनों बाद गुप्ता को मुख्यमंत्री बने एक साल पूरा होने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी थी.

विपक्ष ने भी इस बयान को उठाया और कहा कि बीजेपी के अपने नेता ही रेखा शर्मा के शासन पर सवाल उठा रहे हैं.

हालांकि गुप्ता ने इसे सहज तरीके से लिया. शुक्रवार को अपने सरकार के एक साल पूरे होने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “आज का रिपोर्ट कार्ड हमारे एक साल की मेहनत और बदलाव की सच्चाई दिखाता है. यह सरकार वादों की नहीं, परिणामों की सरकार है.”

आलोचनाओं को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार घोषणाओं की नहीं, काम करने वाली सरकार है. “आज दिल्ली की सरकार पोस्टर राजनीति नहीं करती, ट्वीट राजनीति नहीं करती. हमने दिल्ली की कार्य संस्कृति बदल दी है. हम समाधान देते हैं, पिछली सरकारों की तरह सिर्फ शोर नहीं मचाते. आज जब हम एक साल पूरा कर रहे हैं, तो मैं दिल्ली की जनता से भरोसे के साथ कह सकती हूं कि हमने हर क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम किया है.”

Rekha Gupta, government
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपनी सरकार के सत्ता में एक साल पूरा होने पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने मंत्रियों के साथ | सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने एक वीडियो भी दिखाया, जिसमें स्वास्थ्य क्षेत्र, यमुना की सफाई, शिक्षा और पिछले एक साल में राष्ट्रीय राजधानी में हुए बदलाव को दिखाया गया. गुप्ता ने कहा कि अब तक 30,000 लाभार्थियों को आयुष्मान योजना का फायदा मिला है.

‘केजरीवाल की याद’

विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं है. आम आदमी पार्टी का कहना है कि दिल्ली की जनता “केजरीवाल को याद कर रही है.” गुरुवार को आप ने कहा कि दिल्ली के कुछ हिस्सों में “एक साल, दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल” लिखे पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं.

आप की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा, “हर कोई अरविंद केजरीवाल को याद कर रहा है. वह देश के पहले मुख्यमंत्री थे जिन्होंने निजी स्कूलों को माता-पिता से ज्यादा फीस लेने नहीं दी और वह फीस वापस भी करवाई. लोग बिना रुकावट बिजली और पानी की सप्लाई को याद कर रहे हैं, जिसे हमारी सरकार ने प्राथमिकता दी थी. दिल्ली अब ऐसी सरकार और मुख्यमंत्री के साथ फंसी हुई है जो AQI और AIQ का फर्क नहीं समझती. जहां तक मुख्यमंत्री की बात है, जितना कम कहा जाए उतना बेहतर है. वह पहले से लिखी स्क्रिप्ट पढ़ने में व्यस्त हैं और अपने वादों को पूरा करने में लगातार असफल रही हैं.”

दिप्रिंट से बात करते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री अलका लांबा ने कहा कि दिल्ली में “चार इंजन” की सरकार होने के बावजूद बीजेपी “बयानबाजी” और “हवाबाजी” में लगी है.

लांबा ने कहा, “वह महिला मुख्यमंत्री हैं लेकिन मैं उनके काम को लिंग के नजरिए से नहीं देखना चाहती. पहली बार की विधायक होने के कारण उनमें प्रशासनिक अनुभव की कमी है और यह दिल्ली की हालत में साफ दिखता है. सीखने और समझने में समय देने के बजाय वह प्रचार में व्यस्त रहीं. पिछले एक साल में दिल्ली ने बहुत खराब दौर देखा है, गड्ढों और सड़कों के टूटने से मौतें हुई हैं, प्रदूषण हमारी उम्र पर असर डाल रहा है और चार इंजन वाली यह सरकार कुछ नहीं कर पा रही.”

पिछले साल अपने बजट भाषण में यमुना का कम से कम 17 बार जिक्र किया गया था. सरकार ने सीवेज के पानी को साफ करने और नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए 40 ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए.

यह काम अभी जारी है, लेकिन कांग्रेस नेताओं का कहना है कि “तुरंत नतीजे दिखाने की जल्दबाजी कई बार उल्टा असर करती है.”

आप ने आरोप लगाया था कि 2025 में छठ पर्व के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे के लिए वासुदेव घाट पर बनाया गया “कृत्रिम तालाब” फिल्टर किए गए पानी से भरा गया था. हालांकि अंत में प्रधानमंत्री वहां नहीं पहुंचे, लेकिन यह तालाब बड़ा विवाद बन गया.

विपक्षी दल आप और कांग्रेस ने बीजेपी सरकार के कदमों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि जमीन पर काम करने के बजाय रेखा गुप्ता सरकार खासकर प्रदूषण के मामले में “डेटा में हेरफेर” कर रही है.

पश्चिम दिल्ली के जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए और बिना ढके छोड़े गए गड्ढे में गिरकर 25 साल के एक युवक की मौत के बाद भी सरकार पर ढांचे के रखरखाव को लेकर सवाल उठे.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सार्वजनिक गलतियां भी उनके लिए मुश्किल बनीं. AQI को AIQ कहना या उसे किसी भी उपकरण से मापी जाने वाली “तापमान” बताना, और स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस को “नेताजी सुभाष पैलेस” कहना, उनकी जुबान फिसलने की घटनाएं विपक्ष ने सोशल मीडिया मीम्स के जरिए उठाईं.

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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अपनी सरकार के सत्ता में एक साल पूरा होने पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने मंत्रियों के साथ | सूरज सिंह बिष्ट | दिप्रिंट

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा, “उनका एक साल का कार्यकाल पूरी तरह नाकामी रहा. लोग बदलाव की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन चुनावी वादों को लागू करने के बजाय सरकार पीआर और प्रचार में लगी रही. प्रदूषण से निपटने के बजाय डेटा में हेरफेर किया गया.”

यादव ने कहा, “हमारे पास एक बीजेपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं जो खुलकर कह रहे हैं कि राष्ट्रीय राजधानी गैस चेंबर है, तो और क्या कहने की जरूरत है. मुख्यमंत्री की जुबान लगातार फिसल रही है और घोषणाएं करने के अलावा सरकार ने कुछ नहीं किया.”

राष्ट्रीय राजधानी में 27 साल बाद सत्ता में लौटी बीजेपी सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कई वादे किए थे, जिनमें यमुना की सफाई और महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देना शामिल था.

हालांकि दिल्ली सरकार ने अपने कुछ वादों को लागू करने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन कई वादे, जैसे महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली प्रमुख योजना, अभी लागू नहीं हुई है. महिला समृद्धि योजना के तहत गरीब महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये देने के लिए सरकार ने 5,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, लेकिन पात्रता तय न होने के कारण भुगतान अभी शुरू नहीं हुआ है. इसके लिए तीन मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है जो मानदंड तय करेगी.

आयुष्मान भारत और अटल कैंटीन

सरकार ने दिल्ली में अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना लागू करने को मंजूरी दी थी. इस योजना के तहत आयुष्मान भारत कार्ड के 10 लाख रुपये के अलावा 5 लाख रुपये अतिरिक्त देने का प्रावधान किया गया है.

इसी तरह सरकार ने दिल्ली में गरीबों को पौष्टिक भोजन देने के लिए अटल कैंटीन शुरू की. पिछले साल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर यह योजना शुरू की गई, जिसके तहत शहरी गरीबों, मजदूरों और अन्य जरूरतमंद लोगों को 5 रुपये में पौष्टिक भोजन दिया जाता है. गुरुवार को मुख्यमंत्री गुप्ता और उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने 25 नई अटल कैंटीन का उद्घाटन किया, जिससे शहर में कुल संख्या 71 हो गई.

इसके अलावा सरकार ने मुख्यमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना भी शुरू की, जो एक प्रमुख चुनावी वादा था. इसके तहत गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये और छह पोषण किट देने का वादा किया गया था. योजना लागू हो चुकी है और लाभार्थी पंजीकरण करा रहे हैं तथा सरकार ने भुगतान भी शुरू कर दिया है.

दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, “दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनकी पूरी टीम ने राजधानी को प्रगति और सुशासन की ओर ले जाने के लिए समर्पित प्रयास किए हैं. सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नागरिक सुविधाएं सुधारने, प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने, डिजिटल शासन को बढ़ाने और विकास कार्यों को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.”

सत्ता में आने के बाद सरकार ने गरीब महिलाओं को साल में दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की योजना को भी मंजूरी दी थी. चुनाव के दौरान बीजेपी ने होली और दिवाली पर एक-एक मुफ्त सिलेंडर देने का भी वादा किया था. साथ ही महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर देने की बात कही थी.

हालांकि योजना को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन लागू होना बाकी है. इस महीने की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार होली से पहले हर राशन कार्ड धारक परिवार के खाते में 853 रुपये, जो दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की मौजूदा कीमत है, ट्रांसफर करेगी. उन्होंने कहा कि ऐसा ही ट्रांसफर दिवाली से पहले भी किया जाएगा.

बीजेपी ने गुप्ता को मुख्यमंत्री चुना था, जो पहली बार की विधायक और तीन बार की पूर्व पार्षद हैं. परवेश वर्मा और आशीष सूद जैसे नाम भी दावेदारों की सूची में थे. गुप्ता 2007 में पहली बार पीतमपुरा नॉर्थ से पार्षद चुनी गई थीं और वहां से तीन बार नगर परिषद की सदस्य रहीं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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