Thursday, 7 July, 2022
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चुनाव से पहले विहिप ने उठाया मंदिर मुद्दा, केंद्र से कहा कानून लाओ

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संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में संघर्ष तेज करने की घोषणा. विहिप चलाएगी अभियान.

नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने आंदोलन तेज करने की घोषणा की है. शुक्रवार को दिल्ली में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास की अध्यक्षता में हुई संत उच्चाधिकार समिति की बैठक में नरेंद्र मोदी सरकार से कहा गया है कि ‘संत समाज आदेश देता है कि मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून लाया जाए.’

अगले ही साल चुनाव होने हैं. विहिप ने चुनाव से ठीक पहले अक्टूबर से लेकर दिसंबर तक का कार्यक्रम भी पेश किया है जिसके अनुसार राम मंदिर के लिए सिलसिलेवार आंदोलन चलाया जाएगा. विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बैठक के बाद नृत्य गोपाल दास के नेतृत्व में संतों का एक प्रतिनिधि मंडल राष्ट्रपति से मिला. राष्ट्रपति को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि ‘महामहिम अपनी सरकार से कहें कि वह अब कानून बनाकर राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करें. आज की परिस्थिति में यही समाधान उपयुक्त लगता है.’

बैठक में कहा गया कि ‘सरकार संसद का संयुक्त अधिवेशन बुलाकर कानून बनाए और राम मंदिर को हिंदुओं के हवाले करे. संसद में जो भी दल इस बिल का विरोध करेगा, संत उसे उखाड़ फेंकेंगे. बिल आने पर ही मालूम चलेगा कि असली रामभक्त कौन है.’ यानी विहिप ने भाजपा के अलावा अन्य दलों पर भी दबाव बनाने की तैयारी कर रखी है.

बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में आलोक कुमार ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट का इस अपील का निस्तारण नहीं करके और लंबे समय लटकाए रखकर अपने कर्तव्य की अवहेलना की है.’ चुनाव से पहले संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और विहिप की तरफ से मंदिर का मुद्दा उठाना क्या चुनाव के पहले राजनीतिक माहौल बनाने की तैयारी है जिसका फायदा भाजपा को मिलेगा? इस सवाल पर आलोक कुमार ने कहा, ‘मैं नहीं जानता कि फायदा किसको मिलेगा. लेकिन जो नये नये हिंदुत्ववादी हुए हैं वे इसका समर्थन करेंगे तो फायदा सबको मिलेगा.’

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बीजेपी चार साल से पूर्ण बहुमत की सरकार में है, फिर अब तक मंदिर निर्माण की दिशा में पहल क्यों नहीं हुई? इसके जवाब में आलोक कुमार ने कहा, ‘बीजेपी ने ऐसा क्यों नहीं किया, इसका जवाब बीजेपी से मांगा जाना चाहिए, लेकिन हम चाहते हैं कि बाकी बचे समय में मंदिर निर्माण का कार्य होना चाहिए.

क्या है विहिप का कार्यक्रम

उन्होंने बताया कि हम आने वाले महीनों में मंदिर निर्माण के लिए आंदोलन तेज करेंगे. विहिप का प्रतिनिधिमंडल अक्टूबर में सभी राज्यों के राज्यपालों से मिलकर अनुरोध करेगा कि वे अपनी तरफ से मंदिर बनाने की मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाएं.

नवबंर में सभी संसदीय क्षेत्रों में विहिप की जनसभाएं होंगी और स्थानीय जनता के साथ विहिप सभी सांसदों से संपर्क करेगा.

इसके बाद 18 दिसंबर से 26 दिसंबर तक तमाम मंदिरों मठों और अन्य पूजास्थलों पर मंदिर निर्माण के लिए पारंपरिक अनुष्ठान आयोजित होगा. इसके बाद संतों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री से मिलकर मंदिर निर्माण की पहल करने की मांग करेगा.

आलोक कुमार ने कहा कि ‘हम चाहेंगे कि 2018 खत्म होने से पहले मंदिर निर्माण की सब बाधाएं दूर हो जाएं. इलाहाबाद कुंभ के समय धर्म संसद में संतों के समक्ष बात रखी जाएगी. संत समाज का जो भी आदेश होगा, वैसा किया जाएगा. अगर संतों का आदेश होगा तो कारसेवा या आंदोलन की तरफ बढ़ेंगे.’

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