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Thursday, 20 June, 2024
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AAP पार्टी में अपनी राजनीतिक छवि बदल रहे मान: ‘इन-हाउस एंटरटेनर’ से लेकर वर्चुअल नंबर 2 तक

मान खुद पर जोर दे रहे हैं और 'रिमोट-नियंत्रित' सीएम के टैग से आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा पता चला है कि उन्होंने ही पंजाब में कांग्रेस के साथ गठबंधन का विरोध किया था.

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चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से भगवंत मान ने पिछले डेढ़ साल में एक लंबा सफर तय किया है, वह व्यक्ति, जो कभी शराब पीने की आदतों के कारण सार्वजनिक मजाक का शिकार हुआ करता था.

मान अब आम आदमी पार्टी (आप) के लिए केवल ‘इन-हाउस एंटरटेनर’ या भीड़-खींचने वाले व्यक्ति नहीं रह गए हैं, वह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से ‘हां में हां मिलाने वाले’ होने की छवि को बदल दिया है. वह राजनीतिक हलचलों और सार्वजनिक बैठकों में आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ, पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में उभरे हैं.

मान खुद को आगे लाकर “रिमोट कंट्रोल्ड सीएम” का टैग खत्म कर रहे हैं और राज्य से जुड़े सभी तरह के विवाद को खत्म करने के लिए लाइव टीवी डिबेट में पंजाब में विपक्ष को चुनौती दे रहे हैं.

उन्होंने यहां तक कहा कि विपक्षी दलों के नेता उन्हें काउंटर करने के लिए दस्तावेज के सबूत के साथ आ सकते हैं, लेकिन वह इस पर इसके बगैर बात करेंगे.

पंजाब आप के सूत्रों ने खुलासा किया कि वह मान ही थे, जिन्होंने विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप राज्य में पार्टी के कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के विचार को लेकर राय पूछे जाने पर मना कर दिया.

पंजाब आप के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “दिल्ली में AAP नेतृत्व पहले ही पंजाब के लिए कांग्रेस के साथ सीट-बंटवारे पर समझौता कर चुका था. लेकिन पंजाब नेतृत्व इससे सहमत नहीं था और उसने सार्वजनिक घोषणा करके अपनी पॉजिशन बताई. हम इस बारे में निश्चित नहीं हैं कि बाद में क्या होगा, लेकिन फिलहाल, पंजाब के आप नेतृत्व का कांग्रेस के साथ कोई समझौता या बंधन नहीं है.”

और पिछले महीने, जब पार्टी ने मध्य प्रदेश में चुनावी बिगुल बजाया तो केजरीवाल और मान एक-दूसरे के साथ सार्वजनिक सभाएं करते नजर आए.


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इससे पहले, इस सप्ताह, मान ने मध्य प्रदेश में प्रचार अभियान शुरू किया, वह केजरीवाल की अनुपस्थिति में आप द्वारा पंजाब में भ्रष्टाचार विरोधी उग्र भाषण देते हुए और अपनी सरकार की- शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपलब्धियां गिनाते हुए, मोर्चा संभालते दिखे.

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव करीब हैं, ऐसे में मान के लिए पार्टी के भीतर अपना कद और बढ़ाने का मौका हो सकता है.

चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. कंवलप्रीत कौर ने दिप्रिंट को बताया, “पार्टी में मान की अहमियत इस वजह से बढ़ गई है क्योंकि पार्टी में नंबर-2 और नंबर-3 के नेता दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया और (राज्यसभा सांसद) संजय सिंह को दिल्ली शराब घोटाले में गिरफ्तार किया गया है और वे जेल में हैं.”

दिल्ली सरकार की अब वापस ले ली गई नई उत्पाद शुल्क नीति के जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मार्च में सिसोदिया को और इस महीने की शुरुआत में सिंह को गिरफ्तार किया था.

यह बताते हुए कि कैसे इन गिरफ्तारियों ने पार्टी के भीतर मान के उभार का मार्ग प्रशस्त किया, कौर ने कहा, “एक राजनीतिक रणनीति के तौर पर, पिछले कई वर्षों में सिसोदिया का इस्तेमाल ‘दिल्ली मॉडल’ की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के तौर पर इस्तेमाल किया गया. अब, मान को अन्य राज्यों में ‘पंजाब मॉडल’ को प्रमोट कर वह भूमिका निभानी है.”

उन्होंने बताया कि AAP के दो अन्य प्रमुख चेहरे, राघव चड्ढा और संदीप पाठक हैं जो कि राज्यसभा के मनोनीत सदस्य हैं.

कौर ने कहा, “वे भीड़ को खींचने वाले नेता नहीं है. दूसरी तरफ, पार्टी भीड़ जुटाने के लिए उन्हें (मान को) एक एंटरटेनर के तौर पर इस्तेमाल करती है.”

उन्होंने यह भी कहा कि मान को “आप के इन हाउस एंटरेटनर के तौर पर माना जाता है.”

“गंभीर राजनीतिक चर्चाओं के दौरान, यदि बाकी नेता अवकाश चाहते थे, तो वे मान को अपनी लिखी कोई मज़ेदार कविता सुनाने या कोई चुटकुला सुनाने के लिए कहते थे. उन्हें कभी भी एक गंभीर राजनेता के रूप में नहीं लिया गया, लेकिन अब यह सब बदल गया है.”

यह रेखांकित करते हुए कि मान ने पार्टी की राज्य इकाई पर भी अपनी पकड़ मजबूत बना ली है, कौर ने कहा, “वे दिन गए जब केजरीवाल ट्वीट के जरिए पंजाब के आप नेताओं को हटा देते थे. अब, पंजाब का आप नेतृत्व मान की ओर देखता है.”

पंजाब आप के सूत्रों ने भी कहा कि मान एक मुख्यमंत्री के रूप में काम करने के तरीके में काफी आजाद हो गए हैं.

पार्टी के एक नेता ने कहा, “जब एक आईएएस अधिकारी को सतर्कता ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद आईएएस और पीसीएस अधिकारी हड़ताल पर चले गए, तो मान ने सख्त रुख अपनाया, जिससे सभी को काम पर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा. इसी तरह, जब पटवारी हड़ताल पर चले गए, तो मान ने उनकी चुनौती को स्वीकार करने का फैसला किया.”

‘सत्ता के नशे में आप की पीठ में छूरा घोंपेंगे’

हालांकि, मान के राजनीतिक विरोधियों ने कहा कि वह “सत्ता के नशे में हैं”, उन्होंने यह भी कहा कि “उन्हें अपनी ही पार्टी की पीठ में छूरा घोंपने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.”

कांग्रेस विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता, प्रताप सिंह बाजवा ने दिप्रिंट को बताया, “केजरीवाल द्वारा मान को हर जगह ले जाने का एकमात्र वजह यह नहीं है कि मान का पार्टी में कद बढ़ गया है, ऐसा इसलिए है क्योंकि मान केजरीवाल को देशभर में यात्रा करने और पार्टी को प्रचार करने में मदद के लिए राज्य का हेलीकॉप्टर देते हैं. मान केजरीवाल के बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए ड्राइवर हैं.”

बाजवा ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस “जोर-शोर से कह रही है कि पंजाबियों की मेहनत की कमाई केजरीवाल के आदेश पर मान द्वारा बर्बाद की जा रही है.”

बाजवा ने आरोप लगाया, “मान का आत्मविश्वास दूसरे जरिए से आ रहा है. यदि आपने ध्यान दिया हो, तो मैंने अपने ट्वीट्स में मान को ‘भगवंत शाह’ के रूप में संदर्भित करना शुरू कर दिया है जब से उन्होंने मुझे प्रताप सिंह भाजपा के रूप में जिक्र करना शुरू कर दिया है, जो मुझे भाजपा से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. मान भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ मेलजोल बढ़ा रहे हैं और उन्हें अपनी ही पार्टी की पीठ में छूरा घोंपने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.”

शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने मान को आप के केंद्रीय नेतृत्व का ‘कठपुतली’ करार दिया.

पंजाब सचिवालय से उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “दिल्ली से ऐसे लोगों की भरमार है जो पंजाब में चल रहे घटनाक्रम पर सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को रिपोर्ट करते हैं.”

“हमें बताया गया है कि सीएम को कभी भी अकेला नहीं छोड़ा जाता, एक मिनट के लिए भी नहीं. दिल्ली टीम से वह  लगातार घिरे होते हैं, और उन्हें मार्गदर्शन दिया जाता है व निगरानी की जाती है.”

बादल ने कहा, “उन्होंने जो ‘एकमात्र परिवर्तन’ देखा है, वह यह कि मान “असभ्य, अहंकारी और सत्ता के नशे में धुत्त” हो गए हैं.”

“वह सोचते हैं कि वह हमेशा सत्ता में बने रहेंगे. उनके मन में किसी के प्रति कोई सम्मान नहीं है. वह अपने और अपनी पार्टी के बारे में बोले गए झूठ पर विश्वास करने लगे हैं. यह सब झूठ है कि उनकी पार्टी पक्की ईमानदार (बिल्कुल ईमानदार) है और वह पूरी ईमानदारी के संरक्षक हैं, जबकि उनके आसपास हर कोई बेईमान है. उनकी अपनी नौकरशाही उनके खिलाफ विद्रोह करने जा रही है.”

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

(संपादन : इन्द्रजीत)


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