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Wednesday, 19 June, 2024
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नए संसद भवन से PM मोदी बोले—हमारे पास 25 वर्ष का अमृत कालखंड, मिल कर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है

प्रधानमंत्री ने कहा, नए संसद भवन को देखकर हर भारतीय गौरव से भरा हुआ है. इस भवन में विरासत भी है, वास्तु भी है. इसमें कला भी है, कौशल भी है. इसमें संस्कृति भी है, संविधान के स्वर भी हैं.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के नए भवन को 140 करोड़ भारतीय नागरिकों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब करार देते हुए रविवार को कहा कि यह इमारत समय की मांग थी और इसके कण-कण से ‘‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’’ के दर्शन होते हैं.

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि संसद के नए भवन का कण-कण गरीब को समर्पित है.

मोदी ने कहा, ‘‘यह सिर्फ एक भवन नहीं है, यह 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिंब है. यह विश्व को भारत के दृढ़संकल्प का संदेश देता है. यह हमारे लोकतंत्र का मंदिर है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘नया संसद भवन योजना को यथार्थ से, नीति को निर्माण से और इच्छाशक्ति को क्रियाशक्ति से तथा संकल्प को सिद्धि से जोड़ने वाली अहम कड़ी साबित होगा. यह नया भवन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का नया माध्यम बनेगा. यह नया भवन आत्मनिर्भर भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा.’’

मोदी ने कहा, ‘‘गुलामी के बाद हमारे भारत ने बहुत कुछ खोकर अपनी नई यात्रा शुरू की थी. वो यात्रा कितने ही उतार-चढ़ावों से होते हुए, कितनी ही चुनौतियों को पार करते हुए, आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश कर चुकी है.’’

पीएम ने कहा, ‘‘हमारे पास 25 वर्ष का अमृत कालखंड है. इन 25 वर्षों में हमें मिलकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है.’’

प्रधानमंत्री के मुताबिक, देश की विकास यात्रा के कुछ पल अमर हो जाते हैं और आज भी ऐसा ही एक दिन है.

उन्होंने ‘राजदंड’ का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘जब भी नए संसद भवन में कार्यवाही शुरू होगी यह ‘सेंगोल’ हम सभी को प्रेरणा देता रहेगा.’’

मोदी ने कहा, ‘‘सेंगोल अंग्रेज़ों से सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक था, हमने इसे उचित सम्मान दिया है.’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत आज वैश्विक लोकतंत्र का बहुत बड़ा आधार है. लोकतंत्र हमारे लिए एक संस्कार, एक विचार और एक परंपरा है. भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक की जननी भी है, Mother of Democracy भी है.’’

उन्होंने कहा कि आजादी का अमृतकाल विरासत को सहेजते हुए विकास के नए आयाम गढ़ने का नया काल है.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘नए संसद भवन को देखकर हर भारतीय गौरव से भरा हुआ है. इस भवन में विरासत भी है, वास्तु भी है. इसमें कला भी है, कौशल भी है. इसमें संस्कृति भी है, संविधान के स्वर भी हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा का आंतरिक हिस्सा राष्ट्रीय पंक्षी मोर पर आधारित है, राज्यसभा का आंतरिक हिस्सा राष्ट्रीय फूल कमल पर आधारित है. संसद के प्रांगण में राष्ट्रीय वृक्ष बरगद भी है.’’

मोदी ने कहा, ‘‘इस भवन के कण-कण में हमें ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के दर्शन होते हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘बीते एक-दो दशक से चर्चा हो रही थी कि देश को नए संसद भवन की आवश्यकता है. यह समय की मांग थी कि संसद की नई इमारत का निर्माण किया जाए. मुझे खुशी है कि यह भव्य इमारत आधुनिक सुविधाओं से लैस है.’’

मोदी ने कहा कि नए संसद भवन ने करीब 60 हजार श्रमिकों को रोजगार देने का काम किया है.

उन्होंने कहा, ‘‘इनके श्रम को समर्पित एक डिजिटल गैलेरी भी बनाई गई है. आज जब हम लोकसभा और राज्यसभा को देखकर उत्सव मना रहे हैं तो मुझे संतोष है कि हमने देश में 30,000 से ज़्यादा नए पंचायत भवन भी बनाए हैं. पंचायत भवन से लेकर संसद भवन तक हमारी निष्ठा एक ही है.’’

प्रधानमंत्री ने अपने नौ साल के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि ये नौ साल भारत में नवनिर्माण और गरीब कल्याण के रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे गरीबों के चार करोड़ घर बनने का संतोष है. जब हम इस इमारत को देखकर अपना सिर ऊंचा कर रहे हैं तो मुझे 11 करोड़ शौचालयों के निर्माण को देखकर भी संतोष है.’’

मोदी ने कहा, ‘‘हमारी प्रेरणा एक ही है, देश का विकास, देश के लोगों का विकास.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को आदर और उम्मीद के भाव से देख रही है. उन्होंने कहा कि जब भारत आगे बढ़ता है तो विश्व आगे बढ़ता है.

डाक टिकट और सिक्का जारी

प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर एक विशेष स्मारक डाक टिकट और 75 रुपये का सिक्का जारी किया.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सिक्के का वजन 34.65 ग्राम से 35.35 ग्राम के बीच होगा.

अधिसूचना में कहा गया कि सिक्के के एक तरफ बीच में अशोक स्तंभ की छवि होगी, जिसके एक ओर देवनागरी लिपि में ‘भारत’ जबकि दूसरी ओर अंग्रेजी में ‘इंडिया’ लिखा होगा.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह नया भवन हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपने को साकार करने का साधन बनेगा. यह नया भवन आत्मनिर्भर भारत के सूर्योदय का साक्षी बनेगा.यह नया भवन विकसित भारत के संकल्पों की सिद्धी होते हुए देखेगा.’’


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