मुंबई: मुंबई नगर निगम चुनाव से कुछ दिन पहले, चचेरे भाई उद्धव और राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाली महायुति पर निशाना साधा है. इस दौरान उद्योगपति गौतम अडाणी भी निशाने पर आ गए हैं.
मराठी मानूस (यानी मराठी लोग) और उनके हाशिये पर जाने के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए ठाकरे बंधुओं ने अडाणी को केंद्र में रखा है. उद्धव ने दिप्रिंट से कहा, “हम किसी एक व्यक्ति (अडाणी) के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरीके से सब कुछ एक ही व्यक्ति को दिया जा रहा है, उसके खिलाफ हैं. जिस तरह मुंबई अडाणी को दे दी गई है, वह गलत है.”
रविवार को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की संयुक्त रैली में, एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने एक पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया कि 2014 में नरेंद्र मोदी के केंद्र में सत्ता में आने के बाद भारत, महाराष्ट्र और मुंबई में अडाणी की मौजूदगी कैसे बढ़ी है.
राज ने यह भी दिखाया कि अडाणी ग्रुप को बंदरगाह, हवाई अड्डे, बिजली, सीमेंट और अन्य क्षेत्रों में कैसे काम मिला. प्रस्तावित वधावन बंदरगाह का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह गुजरात के पास है और दावा किया कि पालघर, ठाणे और मुंबई क्षेत्र को कंट्रोल करना, मुंबई को कंट्रोल करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है.
राज ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) हमारे पास रही, तो वह अडाणी को ज़मीन नहीं बेच पाएंगे. यह मराठी मानूस के लिए आखिरी चुनाव है. अगर अब गलती हुई, तो मुंबई की लड़ाई हमेशा के लिए हार जाएंगे.” उन्होंने लोगों से गठबंधन को वोट देने की अपील की.
महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 28 अन्य नगर निगमों के लिए 15 जनवरी को मतदान होगा. वोटों की गिनती अगले दिन होगी. देश के सबसे बड़े और सबसे अमीर नगर निगम के चुनाव में 1,700 उम्मीदवार मैदान में हैं.
उद्धव ने दिप्रिंट से यह भी कहा कि उनकी पार्टी धारावी के विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन वहां रहने वाले लोगों को धारावी में ही घर मिलने चाहिए, न कि उन्हें इलाके से बाहर किया जाए.
धारावी पुनर्विकास परियोजना, अडाणी ग्रुप और महाराष्ट्र सरकार के बीच सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत लागू की जा रही है.
उन्होंने आरोप लगाया, “मुंबई की ज़मीन मुंबईकरों को मिलनी चाहिए, लेकिन बीजेपी सारी ज़मीन अडाणी को दे रही है, यह सही नहीं है.”
दिप्रिंट ने टिप्पणी के लिए ईमेल और कॉल के जरिए अडाणी ग्रुप के प्रवक्ता से संपर्क किया है. जवाब मिलने पर इस खबर को अपडेट कर दिया जाएगा.
अन्य जुड़े मुद्दों पर, उद्धव ने बीजेपी को यह भी याद दिलाया कि मुंबई और राज्य में उसे जगह कैसे मिली थी.
उन्होंने कहा, “बीएमसी में बीजेपी 20 साल तक हमारे साथ रही. उन्हें सभी पद दिए गए. जब हमारा मेयर होता था, तो उन्हें डिप्टी मेयर का पद दिया जाता था. हमारे पास स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन होता था, तो उनके पास दूसरे विभाग होते थे. हमारे पास गार्डन विभाग था, तो उनके पास बीईएसटी (मुंबई की सार्वजनिक परिवहन और बिजली आपूर्ति संस्था) थी. मेरे पिता (और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे) ने उन्हें सब कुछ थाली में परोस कर दिया.”
उन्होंने आगे कहा, “जब मुंबई और महाराष्ट्र में कोई उन्हें (बीजेपी को) जानता तक नहीं था, तब मेरे पिता और शिवसेना यूबीटी ने उन्हें पाला-पोसा. तभी वे राजनीति में ज़िंदा हैं. नहीं तो कुपोषण से मर गए होते…”
मराठी मानूस कार्ड
उद्धव के मुताबिक, मराठी मानूस का मुद्दा 1950 और 1960 के दशक की तरह फिर से अहम हो गया है.
उन्होंने कहा कि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के समय से ही (जब 1950 के दशक के मध्य में अलग महाराष्ट्र राज्य की मांग हुई थी) गुजरात की नज़र मुंबई पर रही है. उन्होंने कहा, “आज बीजेपी उद्योगों को गुजरात ले जाना चाहती है. जो गुजराती दशकों से मुंबई में रह रहे हैं, उनसे हमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी बिल्डर ने किसी को सिर्फ मराठी होने की वजह से घर देने से मना कर दिया हो.”
इस आरोप पर कि ठाकरे सिर्फ मराठी मानूस को ही संबोधित कर रहे हैं और मुंबई के अन्य गैर-मराठी लोगों को नहीं, उद्धव ने कहा कि उनकी पार्टी के 25 साल के शासन में कभी भेदभाव नहीं हुआ. उन्होंने कहा, “अस्पताल, स्कूल, पानी की सप्लाई सबके लिए थी. मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए और बीएमसी में भी हिंदू-मुस्लिम के आधार पर कभी भेदभाव नहीं किया.”
2019 में उद्धव के नेतृत्व वाली अविभाजित शिवसेना ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से नाता तोड़ लिया था. तब तक यह पार्टी एनडीए में बीजेपी की सबसे पुरानी और सबसे लगातार सहयोगी थी.
इसके बाद उद्धव नवंबर 2019 से जून 2022 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे. इस दौरान उन्होंने महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार का नेतृत्व किया, जिसमें कांग्रेस और अविभाजित एनसीपी भी शामिल थीं.
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी लोगों के बीच भेदभाव करने की कोशिश कर रही है—चाहे वह हिंदू और मुस्लिम हों या मराठी और गैर-मराठी.
उद्धव ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी सालों से उनके और राज के बीच फूट डालने और राज करने की कोशिश करती रही है. उन्होंने कहा कि वे राजनीति के लिए एक साथ नहीं आए हैं.
उद्धव ने कहा, “अनुभव सबसे बड़ा गुरु होता है. पिछले 20 साल में हमने देखा है कि बीजेपी हमारा गलत इस्तेमाल कर रही है. वे हमारे बीच मतभेद पैदा करके राज करना चाहती हैं. अब जब वे मुंबई को खत्म करना चाहते हैं, तो हम चुप नहीं बैठेंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: पुणे में अजित पवार की लड़ाई क्यों 2017 की मुंबई में बीजेपी-शिवसेना की लड़ाई की याद दिलाती है
