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Tuesday, 24 March, 2026
होमराजनीति‘कोई गलती नहीं, यह चेतावनी है’: EC के पत्र पर BJP की मुहर को लेकर केरल में हंगामा, अधिकारी सस्पेंड

‘कोई गलती नहीं, यह चेतावनी है’: EC के पत्र पर BJP की मुहर को लेकर केरल में हंगामा, अधिकारी सस्पेंड

19 मार्च 2019 की तारीख वाला पत्र उम्मीदवारों की जानकारी सार्वजनिक करने के नियमों से जुड़ा था, जो केरल की सभी पार्टियों को भेजा गया. EC ने इसे ‘क्लेरिकल एरर’ बताया और कहा कि पत्र पहले ही वापस लिया जा चुका है.

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तिरुवनंतपुरम: चुनाव की तैयारी कर रहे राज्य केरल में सोमवार को एक अजीब विवाद हुआ, जब राजनीतिक दलों को भेजे गए चुनाव आयोग के एक आधिकारिक पत्र पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की केरल यूनिट की मुहर दिखाई दी. इस मामले पर सीपीआई(एम) और कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग पर भरोसा किया जा सकता है.

चुनाव आयोग ने कहा कि यह “सिर्फ क्लेरिकल गलती” थी और पत्र पहले ही वापस लिया जा चुका है. साथ ही राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर के एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है.

19 मार्च 2019 की तारीख वाले इस पत्र में उम्मीदवारों की जानकारी सार्वजनिक करने के नियमों के बारे में गाइडलाइन थी और इसे इस महीने चुनाव होने वाले केरल की सभी राजनीतिक पार्टियों को भेजा गया था. सोमवार को यह मामला तब सामने आया जब सीपीआई(एम) ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि कई पार्टियों को ईसीआई के आधिकारिक पते से एक ही पत्र मिला.

सीपीआई(एम) केरल के एक्स अकाउंट पर पोस्ट में लिखा गया, “हम अक्सर सुनते रहे हैं कि वोटिंग मशीन में कोई भी बटन दबाओ, कमल ही जलता है. लेकिन यह पहली बार लग रहा है कि बीजेपी और चुनाव आयोग एक ही मुहर का इस्तेमाल कर रहे हैं.”

मंगलवार को पार्टी ने अधिकारी के सस्पेंड होने पर प्रतिक्रिया दी और इसे “गंभीर संस्थागत चूक” बताया.

पोस्ट में कहा गया, “जब सत्ताधारी पार्टी और संवैधानिक संस्थाओं के बीच की रेखा धुंधली होने लगे, तो यह ‘गलती’ नहीं—यह चेतावनी है.”

सोमवार को विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि केरल बीजेपी ने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड प्रकाशित करने से जुड़ी गाइडलाइन पर स्पष्टीकरण मांगते हुए चुनाव आयोग से संपर्क किया था और इसके साथ 2019 के निर्देश की एक फोटोकॉपी दी थी. आयोग ने कहा कि उस फोटोकॉपी पर पार्टी का चुनाव चिन्ह था.

आयोग ने दावा किया, “अनजाने में दफ्तर से उस दस्तावेज पर मौजूद पार्टी चिन्ह पर ध्यान नहीं दिया गया और गलती से उसे स्पष्टीकरण के हिस्से के रूप में अन्य राजनीतिक पार्टियों को भी भेज दिया गया. 2019 के बाद इन गाइडलाइन में बदलाव हो चुका है, जिसकी जानकारी सभी राजनीतिक दलों को पहले ही दी जा चुकी है.”

आयोग ने यह भी कहा कि सीईओ के दफ्तर ने 21 मार्च को औपचारिक पत्र जारी कर इस दस्तावेज को वापस ले लिया. कांग्रेस की केरल यूनिट ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या वह “बीजेपी के दफ्तर से काम कर रहा है.”

कांग्रेस की केरल यूनिट ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “आपको उनकी मुहर कैसे मिली? या यह सभी चुनाव अधिकारियों को बीजेपी का पत्र है, जिस पर आपका लेटरहेड है? क्या आप इसे समझा सकते हैं?”

केरल में 9 अप्रैल को मतदान होना है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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