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Monday, 9 March, 2026
होमराजनीतिनिशांत कुमार की एंट्री से JDU भी बनी ‘परिवारवाद’ वाली पार्टी, PM के वंशवाद विरोधी संदेश पर असर

निशांत कुमार की एंट्री से JDU भी बनी ‘परिवारवाद’ वाली पार्टी, PM के वंशवाद विरोधी संदेश पर असर

एनडीए में अब कई ऐसी पार्टियां हैं जो परिवार के सहारे चलती हैं: इनमें टीडीपी, एलजेपी, एनसीपी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक दल शामिल हैं.

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लखनऊ: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार से राज्यसभा सीट के लिए नामांकन दाखिल करने के कुछ ही दिन बाद, उनके बेटे निशांत कुमार औपचारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए हैं. रविवार को राजनीति में निशांत की एंट्री को देखकर यह साफ लगता है कि यह उत्तराधिकार की योजना जैसा कदम है. इसके साथ ही नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) में अब एक और परिवार आधारित पार्टी जुड़ गई है और जेडीयू अब गठबंधन की ऐसी 10वीं पार्टी बन गई है, जहां नेतृत्व वंशवादी है.

दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री अक्सर वंशवाद की राजनीति की आलोचना करते रहे हैं, लेकिन अब सत्तारूढ़ गठबंधन में कई ऐसी पार्टियां हैं जो परिवार के सहारे चलती हैं. इनमें तेलुगु देशम पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी, अपना दल (सोनेलाल), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा, राष्ट्रीय लोक दल, निषाद पार्टी, जनता दल (सेक्युलर), नेशनल पीपुल्स पार्टी और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी शामिल हैं.

एनडीए के ‘वंशवादी’ नेता

एनडीए की ज्यादातर पार्टियों में एक जैसा पैटर्न दिखता है, जहां कई सालों तक नेतृत्व एक ही परिवार के पास रहता है और परिवार के एक या उससे ज्यादा सदस्य सरकार में भी पद संभालते हैं.

बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) का नेतृत्व चिराग पासवान कर रहे हैं, जिन्हें यह पार्टी और इसकी विरासत उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान से मिली है. एक और सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के परिवार के सदस्य भी राजनीति में हैं. उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा विधायक हैं, जबकि उनके बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा बिहार सरकार में मंत्री हैं.

इसी तरह जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) भी ऐसा ही उदाहरण है, जहां परिवार के सदस्य अहम पदों पर हैं. मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन बिहार सरकार में मंत्री हैं और उनकी बहू दीपा मांझी विधायक हैं.

उत्तर प्रदेश में एनडीए की सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में मंत्री हैं, जबकि उनके पति आशीष पटेल योगी आदित्यनाथ कैबिनेट में मंत्री हैं. एक और सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरविंद राजभर और अरुण राजभर पार्टी में अहम पदों पर हैं.

इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश में निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि उनके बेटे प्रवीण निषाद भी पार्टी में सक्रिय हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल का नेतृत्व जयंत चौधरी कर रहे हैं, जिन्हें अपने पिता अजीत सिंह की मृत्यु के बाद पार्टी की कमान मिली.

वंशवादी राजनीति सिर्फ हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं है. मेघालय में मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, जो नेशनल पीपुल्स पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, अपने पिता पी.ए. संगमा की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.

महाराष्ट्र में अजीत पवार की मौत के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली, जो महायुति सरकार का अहम हिस्सा है.

इसी तरह एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जनता दल (सेक्युलर) में भी परिवार की बड़ी भूमिका है. उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं.

निशांत की एंट्री एक यू-टर्न

दशकों तक नीतीश कुमार वंशवाद की राजनीति के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे और उन्होंने अपने बेटे को सक्रिय राजनीति में नहीं लाया, लेकिन अब जो हुआ है, वह उनके लंबे समय से चले आ रहे रुख से एक बड़ा उलटफेर है.

चर्चा है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले निशांत को नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. जेडीयू के नेताओं के मुताबिक, नीतीश के इस्तीफे के बाद बनने वाली नई राज्य सरकार में निशांत को दूसरे सबसे ताकतवर पद पर नियुक्त करने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है.

जनता दल (यूनाइटेड) के एक बड़े हिस्से ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन पार्टी के कुछ लोग इसके भविष्य को लेकर चिंतित भी हैं. उनका सवाल है कि क्या “अनुभवहीन” निशांत सबको साथ लेकर चल पाएंगे. हालांकि, माहौल सकारात्मक दिख रहा है. जेडीयू अध्यक्ष संजय झा ने इस कदम को स्वागत योग्य बताया.

उन्होंने कहा, “हम लंबे समय से उनके राजनीति में आने का इंतज़ार कर रहे थे. अब सभी खुश हैं. निशांत पूरे राज्य में जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे.”

उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन पहले पार्टी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले लोगों का पार्टी से कोई संबंध नहीं था.

कई विपक्षी दलों, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल शामिल हैं, ने निशांत की एंट्री पर तंज कसा. उनका कहना है कि अब नीतीश कुमार खुद ही ‘परिवारवादी’ बन गए हैं. आरजेडी के प्रवक्ता ऐजाज अहमद ने एनडीए में वंशवादी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आपको वंशवादी राजनीति के सबसे ज्यादा उदाहरण एनडीए में मिलेंगे. वे सत्ता में बने रहने के लिए ऐसा कर रहे हैं. पहले वे हमें ताना मारते थे, लेकिन अब खुद सबसे बड़े वंशवादी बन गए हैं. जनता सब देख रही है.”

इस बीच कांग्रेस के प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा, “नीतीश कुमार पहले परिवारवाद के खिलाफ बोलते रहे हैं, लेकिन अब वे खुद इसमें शामिल होने को मजबूर हो गए हैं. निशांत कुमार को राजनीति में लाना असल में जनता दल (यूनाइटेड) की इज्जत बचाने की कोशिश है, क्योंकि पार्टी के शीर्ष नेता भारतीय जनता पार्टी के हाथों में खेल रहे हैं. निशांत के पास कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है और उनकी एंट्री से सिर्फ बीजेपी को फायदा होगा.”

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने दिप्रिंट से कहा, “अगर कोई सक्षम है तो उसे पार्टी में शामिल करने में क्या गलत है? निशांत एक इंजीनियर और पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं. युवाओं को उनसे काफी उम्मीदें हैं. उनके पार्टी में आने से हम बहुत खुश हैं. विपक्ष जो कहना चाहता है कहता रहे, लोगों को उन पर कोई भरोसा नहीं है.”

दिल्ली के राजनीतिक विश्लेषक और दिल्ली विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर तनवीर ऐजाज, जो इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर मल्टीलेवल फेडरलिज्म के उपाध्यक्ष भी हैं, का कहना है कि निशांत कुमार को राजनीति में लाना नीतीश कुमार का बहुत समझदारी भरा कदम नहीं लगता.

उन्होंने कहा, “ऐसा करके नीतीश ने खुद पर परिवारवाद का आरोप ले लिया है. निशांत के पास राजनीतिक अनुभव भी नहीं है. जनता दल (यूनाइटेड) ने बड़ा जोखिम लिया है, खासकर अगर आने वाले वर्षों में उसे नीतीश के विकल्प के रूप में पेश किया जाता है. नीतीश एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने बहुत जल्दी राजनीति शुरू की थी और कुछ महीनों पहले तक वंशवाद की राजनीति के खिलाफ मजबूती से खड़े थे. उनके इस अचानक बदलाव ने राजनीतिक हलकों में कई लोगों को हैरान कर दिया है. अब वे भी कई दूसरी वंशवादी पार्टियों की तरह होते दिख रहे हैं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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