नई दिल्ली: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्यों नहीं दिया, इस पर सफाई देते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंचा सकने वाली किसी ‘अनहोनी’ की आशंका के चलते प्रधानमंत्री से अपना परंपरागत भाषण न देने और सदन में न आने का आग्रह किया था.
लोकसभा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया, जिसमें पीएम मोदी ने चर्चा का जवाब नहीं दिया.
संसद के निचले सदन में कई बार कार्यवाही स्थगित हुई, क्योंकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपना भाषण नहीं दे पाए. वह पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से उद्धरण देना चाहते थे. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणियों के बाद विरोध बढ़ने पर विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित भी कर दिया गया.
विपक्ष ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने भाषण देने से इसलिए पीछे हटे क्योंकि वह “डरे हुए” थे.
दिन की कार्यवाही स्थगित करने से पहले लोकसभा स्पीकर ने कहा कि उन्हें “पुख्ता जानकारी” मिली थी कि विपक्ष के कुछ सदस्य अभूतपूर्व तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं, इसलिए उन्होंने पीएम मोदी से सदन में न आने को कहा. उन्होंने कहा कि देश ने बुधवार को सदन में जो हुआ, वह देखा है.
बिरला ने कहा, “जब सदन के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, तब मुझे विश्वसनीय जानकारी मिली कि कांग्रेस पार्टी के कई सदस्य प्रधानमंत्री की सीट के पास जा सकते हैं और कोई अनहोनी कर सकते हैं.”
उन्होंने कहा, “अगर ऐसा होता, तो यह बेहद अप्रिय दृश्य देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को तोड़ देता. इसे रोकने के लिए मैंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया और सदन के स्पीकर के रूप में सदन की उच्च परंपराओं और गरिमा की रक्षा करना मेरी जिम्मेदारी थी.”
बिरला ने कहा कि सदन के नेता का सदन में न बोलना किसी भी तरह से उचित नहीं है, लेकिन उनके आग्रह को मानकर और उपस्थित न रहकर “सदन के नेता ने इस अप्रिय स्थिति से सदन को बचा लिया.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं माननीय प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने मेरी सलाह स्वीकार की.”
इसके बाद वरिष्ठ बीजेपी नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ने अपनी पीड़ा जताई है. उन्होंने कहा, “भारतीय संसद के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि प्रधानमंत्री को घेरकर बोलने से रोका गया हो और स्पीकर को उनसे न आने के लिए कहना पड़े. विपक्ष और कांग्रेस के सदस्यों ने जो किया, और वे क्या हासिल करना चाहते हैं? संसद बहस का स्थान है; कानून की सीमाओं के भीतर अपनी बात रखें.”
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं कि कांग्रेस पार्टी बुधवार को महिला सांसदों का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री पर ‘हमला’ करने की योजना बना रही थी.
उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “क्या किसी महिला का विरोध करना आतंकवाद माना जाता है? क्या मोदी सरकार और उनके आज्ञाकारी पत्रकारों को एक दलित महिला सांसद का खड़ा होना असहज लगा? क्या वे उन्हें अछूत मानते हैं? मोदी सरकार और उनके सेवाभावी पत्रकारों को देश की महिलाओं, खासकर दलित महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए.”
बुधवार को बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया कि विपक्ष की कई महिला सांसद सदन के वेल में आईं और वरिष्ठ मंत्रियों की बार-बार अपील के बावजूद अपनी सीटों पर नहीं लौटीं और प्रधानमंत्री की ओर बढ़ीं.
उन्होंने कहा, “आज जो हुआ उसकी तस्वीरें देखकर आप हैरान रह जाएंगे…यह स्थिति दिखाती है कि जब जनता उन्हें (कांग्रेस) हरा रही है, तो वे हमें (बीजेपी) संसद में बोलने नहीं देंगे.”
उन्होंने कहा, “देश ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है, फिर भी वे उसे मनाने नहीं दे रहे हैं, और यह सब प्रधानमंत्री मोदी को बोलने से रोकने के लिए कर रहे हैं. देश सब देख रहा है, और देश कांग्रेस से जवाब मांगेगा.”
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी सांसद जिस किताब का हवाला दे रहे थे, वह अभी प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि निशिकांत दुबे के मामले में ऐसा नहीं था.
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