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Sunday, 22 March, 2026
होमराजनीतिहिमंता को लाने वाला अब किनारे: पूर्व असम BJP प्रमुख समेत 19 विधायक हटाए गए, वरिष्ठ नेताओं का विरोध

हिमंता को लाने वाला अब किनारे: पूर्व असम BJP प्रमुख समेत 19 विधायक हटाए गए, वरिष्ठ नेताओं का विरोध

अप्रैल के चुनाव के लिए 19 मार्च को जारी उम्मीदवार सूची से 19 विधायकों को हटाए जाने के बाद पार्टी के पुराने नेता खुद को नज़रअंदाज़ महसूस कर रहे हैं. इनमें वरिष्ठ नेता अतुल बोरा, सिद्धार्थ भट्टाचार्य शामिल हैं.

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गुवाहाटी: 23 अगस्त 2015 को BJP के तत्कालीन असम प्रमुख सिद्धार्थ भट्टाचार्य, जो 1995 में उस समय पार्टी में शामिल हुए थे जब राज्य में उसका ज्यादा प्रभाव नहीं था, उस समय कांग्रेस के मजबूत नेता हिमंता बिस्वा सरमा को BJP के वरिष्ठ नेता अमित शाह के दिल्ली स्थित घर लेकर गए थे.

शाह ने BJP में अपने भविष्य को लेकर सरमा की चिंताओं को दूर किया और भरोसा दिलाया कि असम में तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने में वे अहम भूमिका निभाएंगे. हालांकि शाह ने यह भी साफ कर दिया कि 2016 की शुरुआत में होने वाले चुनाव में सरमा BJP के मुख्यमंत्री चेहरे नहीं होंगे.

बैठक के बाद भट्टाचार्य ने पत्रकारों को यही जानकारी दी, जिस तरह आमतौर पर किसी संगठन के पुराने और स्थापित नेता देते हैं.

भट्टाचार्य ने The Telegraph से कहा, “बैठक में साफ कर दिया गया कि मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार BJP से ही होगा.”

भट्टाचार्य ने उस समय भी अहम भूमिका निभाई जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के कारण सरमा का BJP में शामिल होना लगभग रुक गया था. उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में BJP के प्रमुख नेताओं सर्बानंद सोनोवाल और किरण रिजिजू ने उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.

फोटो- सिद्धार्थ भट्टाचार्य | ANI

दो दिन बाद, 25 अगस्त 2015 को जब सरमा आधिकारिक रूप से BJP में शामिल हुए, तब भट्टाचार्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके साथ खड़े थे और उनका हाथ उठाकर उन्हें एक अहम नए नेता के रूप में जनता के सामने पेश किया.

करीब एक दशक बाद, जब असम एक और चुनाव की ओर बढ़ रहा है और इस बार सरमा मुख्यमंत्री हैं, भट्टाचार्य खुद को किनारे किया हुआ पा रहे हैं. 9 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए 19 मार्च को जारी BJP की उम्मीदवार सूची से हटाए गए 19 विधायकों में उनका नाम भी शामिल है.

भट्टाचार्य, जिन्होंने अगस्त 2014 से नवंबर 2015 तक असम BJP का नेतृत्व किया, टिकट कटने के बाद संतुलित प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि विधायक के रूप में उनका काम खुद बोलता है और उन्हें पार्टी से कोई नाराजगी नहीं है.

हालांकि, बाकी नेताओं ने उतना शांत रुख नहीं अपनाया.

BJP की सूची में कांग्रेस छोड़कर आए नेताओं को जगह मिलने से कई टिकट के दावेदारों में नाराजगी है. इनमें वरिष्ठ नेता अतुल बोरा भी शामिल हैं, जो पांच बार विधायक रह चुके हैं और पूर्व मंत्री भी हैं. पार्टी ने उन्हें असम की सत्ता के अहम केंद्र माने जाने वाले दिसपुर सीट से टिकट नहीं दिया.

बोरा का टिकट कटने से ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि उनकी जगह नगांव सीट से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई को उम्मीदवार बनाया गया. बोरदोलोई चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हुए बड़े नेताओं में दूसरे हैं. उनसे पहले भूपेन बोरा ने भी पार्टी छोड़ी थी.

नाराज बोरा ने संकेत दिया है कि वे कांग्रेस उम्मीदवार मीरा बोरठाकुर गोस्वामी का समर्थन कर सकते हैं या खुद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं.

चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 23 मार्च है, और बोरा अकेले नेता नहीं हैं जो BJP नेतृत्व की चिंता बढ़ा रहे हैं.

शनिवार को BJP के एक और नेता जयंत दास ने इस्तीफा दे दिया. दास तीन दशक से ज्यादा समय से पार्टी से जुड़े थे और बोरा की जगह उम्मीदवार बनने के दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन बोरदोलोई के आने के बाद उनका नाम पीछे हो गया.

दास ने सरमा पर “टिकट सिंडिकेट” चलाने का आरोप लगाया और दिसपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान किया.

दास ने पत्रकारों से कहा, “चुनाव में पार्टी का टिकट न मिलने से मुझे दुख हुआ, लेकिन 35 साल की मेरी सेवा को नजरअंदाज किया जाना उससे भी ज्यादा दुखद है. जब लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ता की भावनाओं की कोई कीमत नहीं होती, तो आत्मसम्मान से समझौता करके पार्टी में बने रहना मुश्किल हो जाता है. BJP हम लोगों ने बनाई है, सिर्फ हिमंता बिस्वा सरमा ने नहीं.”

BJP द्वारा घोषित 88 उम्मीदवारों में से 28, जिनमें सरमा भी शामिल हैं, पिछले एक दशक में कांग्रेस छोड़कर BJP में आए हैं. असम कांग्रेस इकाई ने शनिवार को BJP की सूची में दल बदलकर आए नेताओं को जगह देने पर तंज कसा.

उसने X पर लिखा, “BJP के घोषित उम्मीदवारों को बधाई. भगवा पार्टी के प्रति वफादार पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को धीरे-धीरे संगठन से हटाया जा रहा है.”

सरमा ने इस विरोध को ज्यादा महत्व नहीं दिया और कहा कि इससे BJP के चुनावी प्रदर्शन पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि संकेत हैं कि BJP का केंद्रीय नेतृत्व कोई जोखिम नहीं लेना चाहता.

शुक्रवार को पार्टी के नॉर्थईस्ट प्रभारी संबित पात्रा ने भट्टाचार्य और दास के घर जाकर उन्हें मनाने की कोशिश की. सरमा ने भी शुक्रवार को बोरा से मुलाकात की, कुछ ही घंटों बाद जब कांग्रेस के दिसपुर उम्मीदवार उनके घर समर्थन मांगने पहुंचे थे.

बैठक के बाद सरमा ने कहा, “दिल्ली जाने से पहले इसमें कोई शक नहीं था कि वे दिसपुर से चुनाव लड़ेंगे. लेकिन कुछ खास राजनीतिक कारणों से हम उन्हें टिकट नहीं दे सके. पहले दिन दुख होना स्वाभाविक है और वे हमारे खिलाफ कुछ बातें कह सकते हैं. आज मेरी उनसे बात हुई और वे हमारे साथ हैं.”

राज्य के अन्य हिस्सों में भी BJP के अंदर मतभेद सामने आए हैं. उदाहरण के लिए, बराक वैली के धोलाई क्षेत्र में पार्टी के मौजूदा विधायक निहार रंजन दास ने टिकट न मिलने के बाद इस्तीफा दे दिया और कहा कि उनके योगदान को पहचान नहीं मिली.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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