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शिवराज सिंह चौहान कि फाइल फ़ोटो । ट्विटर
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मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखकर यही लगता है कि जनता का मूड किसी भी पार्टी के पक्ष नहीं रहा है. अभी तक आये रुझानों से यही पता चलता है कि भाजपा को 111 और कांग्रेस को 108 सीटें मिलती दिख रही हैं. दोपहर तीन बजे तक मध्य प्रदेश में भाजपा को 41.4 प्रतिशत और कांग्रेस को 41.1 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं.

बसपा को 4, सपा को एक, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को एक सीटें और अन्य को छह सीटें मिलती दिख रही हैं. ऐसे में सरकार बनाने में बसपा समेत इन दलों और निर्दलीयों की अहम भूमिका हो सकती है.

रुझानों से पता चल रहा है कि मध्य प्रदेश में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त हुआ है. मध्य प्रदेश की जनता ने सबको चौंका कर रख दिया है. भारत का दिल कहा जाने वाला मध्य प्रदेश आज अपने 15 साल के इतिहास को बदलता नज़र आ रहा है. भाजपा मध्य प्रदेश की सत्ता पर 15 साल से काबिज़ है. इस विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी, जिसका खामियाज़ा भाजपा को उठाना पड़ा है.

मध्य प्रदेश में चुनाव के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने अपनी चुनावी सभाओं में दिग्विजय सिंह के 1993 से 2003 तक के शासन को मुद्दा बनाया था. शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता पर फिर से काबिज़ होने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी.

कांग्रेस की तरफ से तीन दिग्गज नेताओं ने कमान संभाली थी. दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और सिंधिया ने जोरदार चुनाव प्रचार किया था. शिवराज सरकार की नाकामयाबी को भुनाने का प्रयास किया था. नतीजा यह रहा है कि मध्य प्रदेश का चुनाव परिणाम काफी दिलचस्प हो गया है. अभी तक यह नहीं कहा जा सकता है कि राज्य की सत्ता किसके हिस्से में आएगी.

2008 में मध्य प्रदेश में भाजपा को 143 सीटें मिली थीं. कांग्रेस को 71 और बसपा को 7 सीटें मिली थीं. भारतीय जनशक्ति पार्टी को 5 और निर्दलीय उम्मीदवार को 3 सीटें मिली थीं. अगर मत प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को 37.64 प्रतिशत और कांग्रेस को 32.39 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे.

2013 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को भाजपा के165 तो कांग्रेस को 58 सीटें मिली थीं. बहुजन समाज पार्टी को मात्र चार सीटें मिली थीं. भाजपा को 44.88 प्रतिशत मत मिले थे, वहीं कांग्रेस को 36.38 प्रतिशत मत मिले थे.

बसपा के कुल मत प्रतिशत की बात करें तो 2013 में वह 6.29 प्रतिशत, 2008 में 8.72 प्रतिशत, 2003 में 7.26 प्रतिशत और 1998 में 6.04 प्रतिशत, 1993 में 7.02 प्रतिशत मत ही प्राप्त कर सकी थी.

बहरहाल, राज्य में इस बार किसकी सरकार बनेगी, यह कहने के लिए अभी कुछ घंटे का और इंतजार करना होगा. कांटे की इस टक्कर में दोपहर तीन बजे तक भाजपा को 112, कांग्रेस को 107 और अन्य को 11 सीटें मिलती दिख रही हैं.


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