चेन्नई: अभिनेता से नेता बने विजय की फिल्म जना नायकन को सेंसर बोर्ड से जुड़े मुद्दों के कारण रिलीज में देरी का सामना करना पड़ रहा है और इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा है. इस पृष्ठभूमि में विजय की फिल्मोग्राफी का रिकॉर्ड अहम हो जाता है, क्योंकि यह पहला मामला नहीं है.
विजय की कई ऐसी फिल्में रही हैं, जिन्हें सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद भी राजनीतिक विरोध और अनौपचारिक दबावों का सामना करना पड़ा है. हालांकि 2013 की थलाइवा ही एकमात्र ऐसी फिल्म थी, जिसकी रिलीज तारीख आधिकारिक तौर पर टालनी पड़ी, जबकि बाकी फिल्में तय समय पर रिलीज हुईं, लेकिन उनमें से कई को थिएटर में आने से पहले या बाद में विरोध झेलना पड़ा.
शुक्रवार तक, थलपति विजय की आखिरी फिल्म जना नायकन की रिलीज को उसके सर्टिफिकेशन को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई के कारण अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है. जना नायकन को लेकर आ रही अड़चनों पर टिप्पणी करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) पर आरोप लगाया है कि वह केंद्र की भाजपा नीत सरकार का “हथियार” बनकर काम कर रहा है.
इस पृष्ठभूमि में, दिप्रिंट विजय की फिल्मोग्राफी से जुड़े विवादों पर नजर डालता है और बताता है कि कैसे उनकी कई फिल्मों को राजनीतिक स्पेक्ट्रम के अलग-अलग हिस्सों से रोड़े झेलने पड़े हैं.
एक रिवाज
उनकी सबसे मशहूर फिल्मों में से एक, 2013 की फिल्म थलाइवा की ओरिजिनल रिलीज़ डेट 9 अगस्त थी. “टाइम टू लीड” की दमदार टैगलाइन वाली इस फिल्म को, जन नायकन के उलट, CBFC से मंज़ूरी मिल गई थी. हालांकि, इसे तय समय पर रिलीज़ नहीं किया गया, उस समय थिएटर मालिकों ने “कानून-व्यवस्था की समस्याओं” का हवाला दिया था.
कानूनी दखल, थिएटर मालिकों से बातचीत और तत्कालीन ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) सरकार से बातचीत के बाद, यह फिल्म आखिरकार 16 अगस्त 2013 को रिलीज हो सकी.
एक साल बाद, विजय की फिल्म कथ्थी (चाकू) 22 अक्टूबर 2014 को दिवाली पर रिलीज़ होने वाली थी. इसे भी विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन ये विरोध फिल्म के कंटेंट की वजह से नहीं, बल्कि प्रोड्यूसर्स के पूर्व श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और देश के गृह युद्ध के आखिर में उनकी भूमिका के साथ “बिजनेस संबंधों” की वजह से हुआ था.
18 अक्टूबर 2017 को रिलीज हुई विजय की मर्सल को केंद्र सरकार की वस्तु एवं सेवा कर, नोटबंदी और भारत की कमजोर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर आलोचनात्मक संवादों के कारण भारी विरोध झेलना पड़ा. इस पर तमिलनाडु भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं.
भाजपा ने फिल्म से कुछ सीन हटाने की भी मांग की थी. हालांकि फिल्म रिलीज होने के बाद इसके संवाद न तो काटे गए और न ही म्यूट किए गए.
हाल ही में, 2018 में, विजय की सरकार 7 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई. AIADMK और DMK दोनों तरफ से कड़ा विरोध हुआ, जिसमें उन सीन और डायलॉग पर आपत्ति जताई गई जो राज्य सरकार की “नाकामियों” और “मुफ्त की राजनीति” का ज़िक्र करते थे. फिल्म के एक सीन में तो लोगों को राज्य सरकार द्वारा दिए गए मिक्सर ग्राइंडर, टीवी सेट और दूसरी मुफ्त चीज़ों को फेंकते हुए भी दिखाया गया था.
मिक्सर ग्राइंडर AIADMK सरकार ने दिए थे, जबकि टीवी DMK सरकार ने दिए थे. इसके बाद पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन हुए, जहां पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक सड़कों पर उतर आए. इसके चलते, सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट होने के बावजूद, फिल्म के कुछ संवादों को म्यूट करना पड़ा.
जना नायकन विवाद के बीच, राज्य सरकार ने पहली बार विजय को पुलिस सुरक्षा देने के लिए दखल दिया और उनकी फिल्म को समय पर रिलीज करने के समर्थन में आवाज उठाई. एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार और कांग्रेस ने इस बार कलात्मक स्वतंत्रता के समर्थन में खुलकर बात की है. लेकिन यह कहा जा सकता है कि विजय की फिल्मोग्राफी में बार-बार दिखने वाला पैटर्न यही है कि CBFC से मिली मंजूरी अक्सर आखिरी बाधा साबित नहीं हुई है.
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