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Monday, 4 May, 2026
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बाबरी शैली की मस्जिद बनाने वाले हुमायूं कबीर ने TMC के दो क्षेत्रों में भारी मतों से जीत हासिल की

मुर्शिदाबाद में बाबरी-शैली की मस्जिद बनाने की बात कहने के बाद कबीर को TMC से निकाल दिया गया था. उनका यह प्रदर्शन उस वीडियो पर हुए विवाद के बावजूद सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि TMC को हराने के लिए BJP उन्हें पैसे देगी.

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कोलकाता: हुमायूं कबीर, जिन्हें पिछले दिसंबर तृणमूल कांग्रेस से निकाल दिया गया था, जब उन्होंने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में अयोध्या में ढहाई गई बाबरी मस्जिद की तरह एक मस्जिद बनाने की घोषणा की थी, उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा सरप्राइज दिया है.

कबीर ने अपनी खुद की पार्टी, आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP), बनाई. उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों—रेजिनगर और नौदा—में बड़े अंतर से जीत हासिल की है और इन दोनों सीटों पर मुस्लिम वोटों में स्पष्ट विभाजन भी कर दिया है. ये दोनों सीटें 2021 विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने जीती थीं.

रेजिनगर में कबीर को 1,23,536 वोट मिले और उन्होंने अपने नजदीकी प्रतिद्वंद्वी भाजपा के बापन घोष को हराया, जिन्हें 64,660 वोट मिले. तृणमूल कांग्रेस के अताउर रहमान 41,718 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.

नौदा में, जहां से कबीर भी चुनाव लड़े, उन्होंने 86,463 वोटों के साथ जीत हासिल की. भाजपा के राणा मंडल 58,520 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि तृणमूल कांग्रेस की सहीना मुमताज खान 51,867 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.

चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में उनके खिलाफ हुए विवाद को देखते हुए कबीर की जीत आश्चर्यजनक है. एक कथित वीडियो सामने आया था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भाजपा ने उन्हें ममता बनर्जी को हराने के लिए 1,000 करोड़ रुपये की डील की है और वे पश्चिम बंगाल में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क में हैं, जिससे राजनीतिक हंगामा हुआ था.

इस कथित वीडियो के बाद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), जिसने कबीर की AJUP के साथ गठबंधन किया था, उससे अलग हो गई थी. राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा था कि यह विवाद उनके चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित करेगा. इस वीडियो ने उस मस्जिद के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर दिए थे, जिसे उनका ट्रस्ट बना रहा था.

लेकिन उन्होंने इन सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया और तृणमूल के मजबूत गढ़ों में बड़ी बढ़त के साथ जीत हासिल की.

AJUP और ओवैसी की AIMIM ने पहले 294 में से 192 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था, लेकिन बाद में यह गठबंधन टूट गया.

AJUP ने खुद को पश्चिम बंगाल के मुसलमानों के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच के रूप में पेश किया, जो 2011 में 34 साल के वामपंथी शासन के पतन के बाद मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और कुछ हद तक कांग्रेस की ओर चले गए थे.

बाबरी मस्जिद स्टाइल मस्जिद

कबीर की बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा ने राज्य में काफी दिलचस्पी पैदा की है, जहां मुस्लिम आबादी लगभग 27 प्रतिशत है.

उन्होंने द प्रिंट को अप्रैल में बताया था कि मस्जिद बनाने की शुरुआती तैयारी पहले ही शुरू हो चुकी है. उन्होंने जो वेस्ट बंगाल इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट बनाया है, उसने पहले ही बेलडांगा में लगभग 8 एकड़ निजी जमीन 13 करोड़ रुपये में खरीद ली है.

पूरी मस्जिद बनाने की लागत लगभग 86 करोड़ रुपये होगी, ऐसा कबीर ने बताया था.

साइट पर “बाबरी मस्जिद” लिखे हुए बोर्ड लगे हुए हैं. जिस जमीन पर मस्जिद बननी है वहां खुदाई हो चुकी है, और चारदीवारी बनाने का काम चल रहा है. काम की निगरानी के लिए “बाबरी मस्जिद कमेटी” बनाई गई है. इस कमेटी का साइट पर एक ऑफिस भी है.

“हम 2030 तक मस्जिद पूरी करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की वजह से सभी निर्माण काम रोक दिए गए हैं. 4 मई के बाद काम फिर शुरू होगा. अब तक जो भी काम हुआ है वह जनता के दान से हुआ है,” कबीर ने द प्रिंट को बताया था.

मस्जिद की साइट समुदाय के लोगों के लिए बड़ा आकर्षण बन गई है, जहां रोज लोग बड़ी संख्या में आ रहे हैं. साइट पर एक टेंट लगाया गया है और रोज लगभग 50 से 100 लोग, न सिर्फ आसपास के जिलों से बल्कि असम जैसे राज्यों से भी, काम देखने के लिए आते हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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