नई दिल्ली: गुजरात के उप-मुख्यमंत्री हर्ष संघवी द्वारा यह नियम प्रस्तावित करने के कुछ दिनों बाद कि “अगर किसी शादी का रजिस्ट्रेशन करना है, तो दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता को इसकी जानकारी देना ज़रूरी होगा” को गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता पार्थिवराजसिंह कथावाडिया ने इसे असली मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने वाला सिर्फ प्रचार बताया.
दिप्रिंट से बात करते हुए कथावाडिया ने कहा, “मेरा सवाल है, इसकी ज़रूरत क्या है?”
उन्होंने पूछा, “सबसे पहले सरकार यह साफ करे कि उसे दिक्कत किससे है. क्या उसे लव मैरिज से दिक्कत है, अंतर-जातीय शादी से दिक्कत है, या मौजूदा कानूनों से दिक्कत है?”
यह प्रस्तावित नियम कथित तौर पर ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए है, जिसे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से देश में एक बड़ा मुद्दा बताती रही है.
पिछले शुक्रवार विधानसभा में हर्ष संघवी ने कहा, “प्यार से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन अगर कोई सलीम, सुरेश बनकर किसी लड़की को फंसाता है, तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा.”
डिप्टी सीएम ने बाद में एक्स पर लिखा, “कोई भी अपनी पहचान छिपाकर या झूठी पहचान देकर शादी रजिस्ट्रेशन का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.”
‘सनातन धर्म’ में लव मैरिज के उदाहरण देते हुए, जैसे कृष्ण-रुक्मिणी, दुष्यंत-शकुंतला, सत्यवान-सावित्री और मेघनाद-सुलोचना सहित, कथावाडिया ने पूछा कि अगर गुजरात सरकार को अंतर-जातीय शादी से दिक्कत है, तो वह उनके लिए फंड क्यों देती है, खासकर डॉ. सविताबेन आंबेडकर के नाम पर, जो डॉ. भीमराव आंबेडकर की पत्नी थीं.
प्रस्ताव के कानूनी पहलू पर सवाल उठाते हुए कथावाडिया ने कहा कि यह साफ नहीं है कि सरकार इस नियम को कैसे लागू करेगी.
उन्होंने पूछा, “वे किस आधार पर शादी का रजिस्ट्रेशन रद्द करेंगे? क्या कानून में शादी और उसका रजिस्ट्रेशन एक ही चीज़ है या अलग-अलग? अगर नियमों में शादी की फोटो देना ज़रूरी है, तो क्या इसका मतलब है कि आप सिर्फ शादी को रजिस्टर कर रहे हैं, शादी करा नहीं रहे?”
कथावाडिया ने कहा, “ये नियम सिर्फ लोगों को भ्रमित करने, गुमराह करने और राज्य के असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए लाए गए हैं. हर जगह तोड़फोड़ हो रही है. दूसरे राज्यों में हमारी बहनों को लाडकी बहिन योजना जैसी योजनाओं का फायदा मिलता है, लेकिन यहां उन्हें सिर्फ शादी के ये नियम मिल रहे हैं.”
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, शादी रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करने वाले किसी भी जोड़े को एक घोषणा पत्र देना होगा, जिसमें यह बताना होगा कि क्या दोनों पक्षों के माता-पिता को शादी की जानकारी है.
इस घोषणा में माता-पिता के नाम, आधार की जानकारी, पता और संपर्क जानकारी भी देनी होगी.
सभी दस्तावेज़ सही मिलने के बाद, सहायक रजिस्ट्रार को 10 कार्य दिवस के अंदर दोनों पक्षों के माता-पिता को सूचना देनी होगी. इसके बाद आवेदन संबंधित जिला रजिस्ट्रार को भेजा जाएगा.
शादी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने में 30 दिन लगने की उम्मीद है.
फिलहाल, गुजरात पहला और एकमात्र राज्य है जिसने शादी रजिस्ट्रेशन के लिए माता-पिता की सहमति ज़रूरी करने की दिशा में कदम उठाया है.
सुप्रीम कोर्ट के वकील निपुण सक्सेना ने दिप्रिंट से कहा कि अगर इस नियम को कोर्ट में चुनौती दी गई, तो यह टिक नहीं पाएगा. भारत में शादी या तो संबंधित धर्म के शादी कानूनों के तहत होती है या स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954 के तहत. इसके अलावा कोई तीसरा कानून नहीं है.
केंद्रीय कानूनों के अनुसार, शादी पर आपत्ति के आधार हैं—अगर कोई या दोनों पक्ष नाबालिग हों, पहले से शादीशुदा हों, मानसिक रूप से अस्वस्थ हों, या प्रतिबंधित रिश्ते में हों. माता-पिता की सहमति आपत्ति का आधार नहीं है—इसका कोई महत्व नहीं है.
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य नया नियम बना सकता है क्योंकि शादी और तलाक समवर्ती सूची में हैं, लेकिन स्पेशल मैरिज एक्ट फिर भी उस पर लागू होगा, क्योंकि वह केंद्रीय कानून है.
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नियम अमान्य है क्योंकि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ है और निजता और पसंद के अधिकार का उल्लंघन करता है.
सक्सेना ने चिंता जताई कि अगर शादी आवेदन की जानकारी माता-पिता को देना ज़रूरी किया गया, तो इसका गलत इस्तेमाल वे माता-पिता कर सकते हैं जो अपने बालिग बच्चों के फैसलों से सहमत नहीं हैं.
उत्तराखंड ने 2024 में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करते समय ‘लव जिहाद’ से सुरक्षा के नाम पर यह नियम बनाया कि लिव-इन रिलेशन में रहने वाले जोड़ों को राज्य के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा. हालांकि, वहां भी माता-पिता की जानकारी देनी होती है, लेकिन उन्हें सूचना देने का कोई नियम नहीं है.
2022 में महाराष्ट्र सरकार ने अंतर-धर्म शादियों पर नजर रखने के लिए 13 सदस्यीय समिति बनाई थी. महिला और बाल विकास विभाग के तहत बनी इस समिति को उन अंतर-धर्म शादियों की जानकारी रखनी थी जो भागकर की गई हों, धार्मिक जगह पर हुई हों, या रजिस्टर या बिना रजिस्टर हुई हों. ज़रूरत पड़ने पर महिलाओं को काउंसलिंग देने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराया गया था.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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