Monday, 27 June, 2022
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जेडी(एस) मूर्ख नहीं है, बीजेपी के साथ विलय करना ख़ुदकुशी होगा- पूर्व कर्नाटक के सीएम कुमारस्वामी ने कहा

एच.डी. कुमारस्वामी ने दिप्रिंट से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि वहअच्छी तरह जानते हैं कि कौन से विधायक दूसरे दलों से बात कर रहे हैं. उन्होंने 2023 के चुनाव में पार्टी की वापसी का भरोसा जताया.

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बेंगलुरू: कर्नाटक में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) के संभावित विलय की अटकलों के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री और जेडी(एस) प्रमुख एचडी कुमारस्वामी ने कहा है कि ऐसा क़दम उठाना ख़ुदकुशी के समान होगा.

दिप्रिंट को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में कुमारस्वामी ने कहा, ‘(हमारी पार्टी) इतनी मूर्ख नहीं है कि वो बीजेपी से विलय करके ख़ुदकुशी करेगी’.

लेकिन उन्होंने इस बात को माना कि हाल ही में जेडी(एस) नेताओं के बीजेपी में जाने से, पार्टी को नुक़सान हुआ है और वो ये भी जानते हैं, कि कुछ और लोग उनकी पार्टी छोड़ने वाले हैं.

कुमारस्वामी ने कहा, ‘मैं अच्छी तरह जानता हूं कि कौन से विधायक दूसरे दलों से बात कर रहे हैं’. उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने उन्हें खुलकर बोल दिया है कि उन्हें ऐसी पार्टी-विरोधी गतिविधियां बंद कर देनी चाहिए, और जेडी(एस) को छोड़ देना चाहिए. ख़ुद को बचाए रखने के लिए वो कभी भी जा सकते हैं’.

कुमारस्वामी ने, जिन्होंने कई मौक़ों पर सरकार का समर्थन किया है, ये भी स्पष्ट किया कि बीजेपी को उनकी पार्टी का समर्थन मुद्दों पर आधारित है.

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उन्होंने कहा, ‘हमने भूमि सुधार बिल को समर्थन तब दिया, जब उन्होंने (बीजेपी) अधिनियम में बदलाव के हमारे सुझावों को स्वीकार कर लिया. उन्होंने ये भी कहा, ‘लेकिन हमने गौ-हत्या विरोधी बिल का विरोध किया. हमारा समर्थन मुद्दों पर आधारित है’.

कुमारस्वामी ने ये भी माना कि उनकी पार्टी ने, 2018 में कांग्रेस से हाथ मिलाकर ग़लती की थी. जेडी(एस) चीफ मुख्य मंत्री बन गए थे, लेकिन उनकी सरकार एक साल से भी कम चली, चूंकि बहुत से कांग्रेस और जोडी(एस) विधायक, टूटकर बीजेपी के ख़ेमे में चले गए.

उन्होंने कहा, ‘हमारी सबसे बड़ी ग़लती ये थी कि हमने कांग्रेस से हाथ मिला लिया. मैं कांग्रेस आलाकमान की बुराई नहीं कर रहा हूं. ये उसके स्थानीय नेता हैं जिन्होंने समस्याएं खड़ी कीं और जो अब हमारे ख़िलाफ लड़ रहे हैं’.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के साथ गठबंधन का हवाला देते हुए दोहराया, कि बीजेपी के साथ हाथ मिलाने से, जेडी(एस) की संभावनाएं कमज़ोर पड़ जाएंगी.

लेकिन जेडी(एस) पहले बीजेपी के साथ गठबंधन में रह चुकी है. 2006 में कुमारस्वामी बीजेपी से हाथ मिलाकर मुख्यमंत्री बन गए थे और येदियुरप्पा उनके डिप्टी बने थे. वो गठबंधन उस समय टूट गया, जब येदियुरप्पा ने ढाई साल की अवधि के बाद सीएम का पद बीजेपी को स्थानांतरित नहीं किया जैसा कि उन्होंने वादा किया था. 2008 में बीजेपी ने येदियुरप्पा के नेतृत्व में ज़बर्दस्त बहुमत के साथ वापसी की और दक्षिण भारत में पार्टी की पहली सरकार का गठन किया.


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बड़े पैमाने पर दल बदल से संघर्ष

जेडी(एस) को इस साल बड़ा झटका लगा, जब 3 नवंबर के उपचुनाव से कुछ पहले ही, राजाराजेश्वरी नगर विधान सभा क्षेत्र और उसके आसपास के इलाक़ों से क़रीब 240 पार्टी नेता एक साथ कांग्रेस में शामिल हो गए.

राजाराजेश्वरी नगर की जेडी(एस) इकाई के अध्यक्ष बेट्टास्वामी गौड़ा, जो उपचुनावों के लिए टिकट के उम्मीदवार थे, कांग्रेस में जाने वाले नेताओं में शामिल थे.

पार्टी प्रवक्ता और उसके सबसे जाने पहचाने चेहरों में से एक, पूर्व जेडी(एस) एमएलसी रमेश बाबू ने एमएलसी चुनावों में पार्टी टिकट न मिलने पर इस साल मार्च में पार्टी छोड़ दी थी. पिछले साल जेडी(एस) के तीन विधायक बीजेपी में चले गए थे, जिसने कांग्रेस के 18 नेताओं को भी अपने पाले में ले लिया था.

इन झटकों के बावजूद कुमारस्वामी के पास पार्टी के लिए नई योजनाएं हैं. उन्हें विश्वास है कि 2023 तक जेडी(एस) वापसी करेगी और एक बार फिर वो कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे.

उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है. मैंने ये सुनिश्चित करने की चुनौती ली है कि हमारी पार्टी स्पष्ट बहुमत के साथ जीतेगी, और मैं एक बार फिर मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की अगुवाई कर पाऊंगा. 2023 के विधान सभा चुनावों के लिए, हमारा लक्ष्य यही है’.

कुमारस्वामी ने आगे कहा कि 1983 में, जब पार्टी विधायकों की संख्या 60 से गिरकर केवल 12 रह गई थी, तब बहुत से लोगों ने जेडी(एस) के अंत की भविष्यवाणी कर दी थी. उन्होंने कहा, ‘हमने उम्मीद नहीं छोड़ी, और न ही अपने मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं का भरोसा खोया. ये 2020 है और हम अभी भी मौजूद हैं. हम लगातार बने रहेंगे, और कोविड-19 महामारी फैलने के बाद के आठ महीनों के दौरान, मैंने अपनी पार्टी को नए सिरे से खड़ी करने पर ध्यान केंद्रित किया है, और जेडी(एस) में फिर से जान फूंकने, और उसे सत्ता में वापस लाने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया है’.

लेकिन पार्टी दिसंबर 2019 और 2020 के कर्नाटक उपचुनावों में, अच्छा प्रदर्शन करने में नाकाम रही है. अपने गढ़ में भी ये तीसरे नंबर पर रही.

लेकिन, कुमारस्वामी संख्या से चिंतित नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘उपचुनाव अलग होते हैं, असैंबली चुनाव अलग होते हैं. जब हम 2023 में चुनावों में जाएंगे, तो वो सारी सीटें जीतेंगे, जो हमने उपचुनावों में हारे हैं. नए ताज़ा और युवा चेहरे होंगे, और एक पुनर्जीवित तथा कायाकल्प की हुई जेडी(एस) सामने होगी. बस देखते रहिए’


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