नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने कहा कि केंद्रीय बजट किसानों से किए गए कुछ वादों को पूरा करने में असफल रहा है.
रविवार को जारी एक बयान में बीकेएस ने कहा कि बजट सरकार की किसान-हितैषी मंशा पर खरा नहीं उतरता.
उसने विपक्ष के साथ-साथ सरकार से भी अपील की कि पूरे किसान समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए बजट में संशोधन किया जाए और किसान-हितैषी मांगों को शामिल किया जाए. “बजट में सरकार के वादे नजर नहीं आते.”
संगठन ने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना, जो 2018 में शुरू की गई थी और जिसके तहत किसानों को 6,000 रुपये दिए जाते हैं, एक अच्छी पहल है. लेकिन उसने यह भी कहा कि राशि बढ़ाई जानी चाहिए थी, जो नहीं की गई.
बीकेएस के अखिल भारतीय महासचिव मोहीनी मोहन मिश्रा ने दिप्रिंट से कहा, “यह चिंता का विषय है. सरकार की मंशा भले ही अच्छी हो, लेकिन बजट में वह झलकती नहीं है.”
उन्होंने कहा, “छोटे किसानों की समस्याएं, कृषि मशीनों पर ऊंचा जीएसटी, किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को पर्याप्त बढ़ावा न मिलना, केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) की सीमा 5 लाख रुपये करने की घोषित बढ़ोतरी को लागू न करना, और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के घोषित लक्ष्य के बावजूद डीबीटी के जरिए किसानों को खुद जैविक खाद बनाने के लिए प्रोत्साहन न मिलना—ये सभी चिंता के विषय हैं.”
उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि पहले दिए गए बयान (यानी किसानों के कल्याण से जुड़े) बजट में दिखाई नहीं देते.
“प्राकृतिक खेती को समर्थन देने के लिए देशभर की सभी फसलों में रासायनिक अवशेषों के स्तर की निगरानी और नियंत्रण का बजट में कोई प्रावधान नहीं है. कुल मिलाकर, सरकार जो कहती है, वह बजट में नजर नहीं आता.”
आरएसएस से जुड़े एक अन्य संगठन, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने भी बजट पर असंतोष और कड़ी नाराजगी जताई. संगठन ने कहा कि श्रमिकों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी मुख्य मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है.
बयान में कहा गया, “पीएफ, ईएसआई और बोनस की सीमा बढ़ाए बिना मजदूर सामाजिक सुरक्षा के दायरे में नहीं आ पाएंगे.”
इसमें आगे कहा गया, “आंगनवाड़ी, आशा और मिड-डे मील जैसे योजना कर्मियों के मानदेय में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का पूरी तरह अभाव बेहद निराशाजनक है. उन्हें श्रमिक का दर्जा देने, न्यूनतम मजदूरी और व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने की पुरानी मांग को एक बार फिर नजरअंदाज किया गया है. यह जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिला कर्मियों के प्रति गंभीर उदासीनता दिखाता है.”
मजदूर संगठन ने इसे “सबसे निराशाजनक बजट” बताया, “बीएमएस ने लोकसभा में आज पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 की गंभीर समीक्षा की है. यह बजट—जो पहली बार रविवार को पेश किया गया—बुनियादी ढांचे के विस्तार, औद्योगिक विकास और बड़े पैमाने पर कौशल विकास के जरिए आर्थिक वृद्धि तेज़ करने की सरकार की मंशा दिखाता है, लेकिन यह कामकाजी वर्ग की सबसे जरूरी आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में असफल रहा है.”
इस बीच, मिश्रा ने कहा कि बीकेएस का मानना है कि जहां कुछ पहलू किसान-हितैषी हैं, वहीं संगठन की मांग है कि बजट पर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष पूरे किसान समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक बातचीत करें और बजट में किसान-हितैषी मांगों को शामिल करें.
उन्होंने कहा, “यही भारतीय किसान संघ की अपेक्षा है.”
बीकेएस ने बजट के कुछ पहलुओं की सराहना भी की और 500 अमृत सरोवर, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन को मजबूत करने और पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता को समर्थन देने से जुड़े प्रावधानों को सकारात्मक कदम बताया.
इसने कहा, “फसल विविधीकरण योजना के तहत नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी उच्च-मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देना, साथ ही ग्रामीण महिला समूहों को सशक्त बनाने के लिए ई-मार्ट की स्थापना, भी अच्छी पहलें हैं. आईसीएआर के जरिए किसानों तक जानकारी पहुंचाने की विस्तार योजना की और जांच की जरूरत है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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