नई दिल्ली: क्रिकेटर मोहम्मद शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ को 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए पेश होना होगा.
शमी को जारी नोटिस में उन्हें सोमवार को सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा गया था, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि वह फिलहाल विजय हजारे ट्रॉफी टूर्नामेंट में बंगाल के लिए खेल रहे हैं. राज्य के सूत्रों के अनुसार, यह नोटिस गलत या अधूरा भरा गया एन्यूमरेशन फॉर्म होने के कारण जारी किया गया था.
SIR प्रक्रिया में यह सामान्य है कि जब फॉर्म अधूरा होता है तो पंजीकृत मतदाताओं को सत्यापन के लिए बुलाया जाता है. शमी की सुनवाई अब 9 से 11 जनवरी के बीच के लिए पुनर्निर्धारित की गई है.
शमी कोलकाता की रासबिहारी विधानसभा सीट के मतदाता हैं. उत्तर प्रदेश के अमरोहा से ताल्लुक रखने वाले शमी 2000 के दशक में पश्चिम बंगाल आ गए थे. डलहौजी एथलेटिक क्लब के लिए खेलने के बाद, जब उनका चयन बंगाल अंडर-22 टीम के लिए हुआ, तब वह टाउन क्लब का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. बाद में वह मोहन बागान से जुड़े और फिर 2010–11 सत्र में बंगाल के लिए रणजी ट्रॉफी में पदार्पण किया.
पश्चिम बंगाल में कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से केवल 7.08 करोड़ ने SIR प्रक्रिया में भाग लेने के लिए अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए. इसके बाद से 58 लाख से अधिक मतदाता, यानी कुल मतदाताओं का 7.6 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं.
हटाए गए 58.2 लाख मतदाताओं में 24.16 लाख या 3.15 प्रतिशत ऐसे थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, 32.65 लाख या 4.26 प्रतिशत ऐसे पाए गए जो स्थानांतरित हो चुके थे या प्रक्रिया के दौरान अपने निवास पर मौजूद नहीं थे और 1.38 लाख या 0.18 प्रतिशत ऐसे पाए गए जिनका नाम अन्य स्थानों पर भी मतदाता के रूप में दर्ज था, यह जानकारी भारत निर्वाचन आयोग ने दी है.
दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 16 दिसंबर 2025 को शुरू हुई थी और 15 जनवरी 2026 तक चलेगी. साथ ही, आयोग सुनवाई और सत्यापन के लिए नोटिस जारी कर रहा है, जो 7 फरवरी 2026 तक जारी रहेंगे.
SIR प्रक्रिया राज्य में विवादास्पद बनी हुई है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 3 जनवरी 2026 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की थी. ममता ने पत्र में SIR के दौरान सामने आ रही “गंभीर अनियमितताओं, प्रक्रियागत उल्लंघनों और प्रशासनिक चूकों” पर अपनी “गहरी चिंता” दर्ज कराई थी.
इसके जवाब में भाजपा विधायक सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर कहा कि SIR प्रक्रिया रोकने की ममता की मांग “हार स्वीकार करने से कम नहीं है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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