नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को कथित कोयला तस्करी मामले में हवाला के जरिए फंड ट्रांसफर की जांच के तहत राजनीतिक सलाहकार कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के दफ्तर और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर छापेमारी की. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.
सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी एक बड़े अभियान का हिस्सा थी, जिसके तहत कोलकाता और दिल्ली में करीब 10 ठिकानों को निशाना बनाया गया.
आई-पैक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को राजनीतिक सलाहकार सेवाएं देती रही है. टीएमसी 2011 से पश्चिम बंगाल में सत्ता में है. इससे पहले यह कंपनी चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर के नेतृत्व में थी, बाद में प्रतीक जैन ने इसकी कमान संभाली.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी को भी इसी मामले में पहले पूछताछ के लिए समन किया जा चुका है.
छापेमारी की खबर सामने आने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर पहुंचीं. उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी उनकी पार्टी की गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है. इस साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं.
“मैंने प्रतीक को फोन किया. वह मेरी पार्टी के प्रभारी हैं. मैंने पार्टी की फाइल ले ली है. ईडी हमारी पार्टी की सभी गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी लेना चाहती है,” बनर्जी ने जैन के घर के बाहर कहा.
“वे उम्मीदवारों की सूची और हमारी आंतरिक जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. क्या यह ईडी और अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री, का काम है. देखिए, मैंने यह फाइल और हार्ड ड्राइव ले ली है. अगर मैं भाजपा के पार्टी दफ्तर पर छापा मार दूं तो उसका क्या नतीजा होगा,” उन्होंने कहा और एक हरी फाइल दिखाते हुए दावा किया कि वह जैन के घर के अंदर से लाई गई है.
ईडी सूत्रों ने किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवारों से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने से इनकार किया. एक ईडी अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “तलाशी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार से जुड़ा कोई डेटा न तो इकट्ठा किया गया है और न ही हासिल किया गया है. यह हमारा उद्देश्य भी नहीं है. जांच के दौरान विषय की भूमिका सामने आई है और प्रतीक जैन की भूमिका करोड़ों रुपये के हवाला ट्रांसफर में सामने आने के बाद ही यह तलाशी कार्रवाई की गई है, जो चल रहे कोयला तस्करी मामले से जुड़ी है.”
ईडी सूत्रों के अनुसार, एजेंसी की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के उस मामले से जुड़ी है, जो पश्चिम बंगाल में लीज वाले इलाकों में अवैध कोयला खनन और चोरी के आरोपों को लेकर अनूप माजी और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के कई अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया गया था.
सीबीआई की नवंबर 2020 में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. एजेंसी का आरोप है कि कोयला तस्करी सिंडिकेट ने अवैध रूप से करीब 25.51 लाख मीट्रिक टन कोयले का खनन किया, जिसकी कीमत लगभग 1,114.35 करोड़ रुपये है.
एजेंसी के अनुसार, माजी के नेतृत्व में सिंडिकेट ने एक संगठित गिरोह बनाया, जिसने भारी मशीनरी, अर्थ मूवर्स और विस्फोटकों का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन किया. यह सब इलाके में प्रभावशाली लोगों के संरक्षण और समर्थन में हुआ.
सिंडिकेट पर आरोप है कि उसने अवैध खनन कारोबार को संरक्षण देने वाले सरकारी कर्मचारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों को रिश्वत दी. एजेंसी ने पहले अदालत में दाखिल दस्तावेजों में आरोप लगाया था. “अपराध से अर्जित धन को विदेशों में उन लोगों के बैंक खातों में भी भेजा गया, जिनके राजनीतिक प्रभाव रखने वाले लोगों से करीबी पारिवारिक संबंध हैं.”
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