Monday, 24 January, 2022
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‘मोदी के हनुमान’ चिराग पासवान- बिहार चुनाव में कितनी सफल हो पाएगी लोजपा

विधानसभा चुनाव के लिए तीनों चरणों के मतदान खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल में लोजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं दिख रहा है. अनुमान के मुताबिक चिराग पासवान की लोजपा दहाई का भी आंकड़ा छूती हुई नज़र नहीं आ रही है.

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नई दिल्ली: रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान इस बार बिहार विधानसभा चुनाव के केंद्र में लगातार बने रहे. उनके ट्वीट्स लगातार वायरल होते रहे. केंद्र में एनडीए के साथी और भाजपा के सहयोगी पासवान बिहार में नीतीश कुमार पर लगातार हमलावर रहे और लोगों से अपील करते रहे कि इस बार नीतीश कुमार को वोट न दें.

लोक जनशक्ति पार्टी को चुनाव से ठीक पहले ही एक बड़ा झटका लगा जब रामविलास पासवान की असामयिक मृत्यु हो गई. लेकिन उस दौरान भी चिराग सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात लगातार बिहार की जनता के सामने रखते रहे और अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया.

विधानसभा चुनाव के लिए तीनों चरणों के मतदान खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल में लोजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं दिख रहा है. अनुमान के मुताबिक चिराग पासवान की लोजपा दहाई का भी आंकड़ा छूती हुई नज़र नहीं आ रही है.

लोजपा ने 137 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. नतीजों के बाद ही पता चलेगा कि उसे कितनी सीटें हासिल होती हैं.

चुनाव के दौरान कैसे चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरते रहे और खुद को प्रधानमंत्री का ‘हनुमान’ बताया, आइए नज़र डालते हैं.

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‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’

लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने घोषणापत्र को ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नाम दिया और उसमें युवा आयोग गठित करने, रोजगार के लिये पोर्टल बनाने, डेनमार्क की तर्ज पर दुग्ध उद्योग को बढ़ावा देने, बाढ़ एवं सूखे को रोकने के लिये नहरों को नदियों से जोड़ने जैसे वादे किये.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए वो लगातार कहते रहे कि 15 साल के बाद भी वो नाली-गली और खेत में पानी पहुंचाने की बात करते हैं. उन्होंने बिहार की स्वास्थ्य, शिक्षा, अस्पतालों की स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री को चुनाव में घेरा.

लेकिन इस बीच ये सवाल उठता रहा कि भाजपा का नीतीश से गठबंधन होने के बावजूद चिराग पासवान क्यों नीतीश कुमार पर हमलावर हो रहे हैं.

ये भी कयास लगने लगे थे कि जदयू को हराने के लिए लोजपा को भाजपा शह दे रही है. लेकिन भाजपा नेता सुशील मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि लोजपा बीजेपी की ‘बी’ टीम नहीं है.

इसके बाद ये भी देखने में आया कि भाजपा के कई नेताओं ने लोजपा का दामन थाम लिया जिसमें रामेश्वर चौरसिया भी शामिल हैं.

‘मोदी का हनुमान’

जहां एक तरफ अपनी पूरे चुनावी अभियान में चिराग पासवान नीतीश कुमार को निशाने पर लेते रहे वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उन्होंने कुछ भी नहीं बोला. बल्कि उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री मोदी का हनुमान बताया.

उन्होंने कहा था, ‘मेरे दिल में प्रधानमंत्री बसते हैं. मैं उनका हनुमान हूं. हनुमान की तरह चीर कर देख लें मेरा सीना, मेरे दिल में प्रधानमंत्री मोदी बसते हैं.’

गौरतलब है कि सुशील मोदी ने चिराग पासवान की लोजपा को भाजपा की बी टीम होने से किनारा किया था. प्रधानमंत्री मोदी ने भी पूरे चुनाव अभियान में चिराग पर कोई टिप्पणी नहीं की.

नीतीश होंगे ‘जेल’ में

चिराग पासवान ने अपने पूरे चुनावी अभियान में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला किया. तीसरे चरण के मतदान से पहले भी उन्होंने कहा था कि वो अब कभी मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे.

उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर नीतीश कुमार तेजस्वी यादव के आगे झुक भी सकते हैं. चिराग पासवान ने शराबबंदी को लेकर कहा था कि अगर इसकी जांच कराई जाए तो नीतीश कुमार जेल में होंगे.

मुंगेर की घटना पर चिराग ने नीतीश सरकार को ‘महिषासुर‘ बताया था. उन्होंने नीतीश को ‘पलटूराम’ भी कहा था.

अभिनेता से नेता

लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव की ही तरह चिराग पासवान की पहली पसंद राजनीति कभी नहीं रही.

चिराग अभिनेता रहे हैं और उन्होंने 2011 में ‘मिले ना मिले हम’ नाम की एक फिल्म भी की है. फिल्म के न चलने के बाद रामविलास पासवान उन्हें राजनीति में लेकर आए और 2014 में जमुई से लोकसभा का चुनाव लड़वाया.

पहली बार में ही चिराग पासवान लोकसभा का चुनाव जीत गए. पिछले ही साल वो लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष बने हैं.


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