लखनऊ: उत्तर प्रदेश में संगठन और कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलों के बीच, पिछले दो हफ्तों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के लोगों ने मंत्रियों, अफसरों और कई अन्य लोगों से फीडबैक लिया है.
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने 24 नवंबर को अयोध्या के संघ दफ्तर साकेत निलयम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक घंटे की मुलाकात की. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है कि 18 से 26 नवंबर के बीच लखनऊ में संघ पदाधिकारियों की दर्जनभर से ज़्यादा मीटिंग्स हुईं.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और संघ के अंदर के लोगों के मुताबिक, इन बैठकों में शासन से जुड़े मुद्दों पर सीधा फीडबैक लिया गया और सिस्टम को और बेहतर करने के सुझाव दिए गए.
ये सारी मुलाकातें योगी और भागवत की बातचीत के बाद हुईं और ऐसे वक्त में जब पार्टी संगठन और राज्य कैबिनेट — दोनों में बड़े बदलाव की उम्मीद की जा रही है.
बीजेपी के यूपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का कार्यकाल खत्म हो चुका है और पार्टी जल्द ही नए अध्यक्ष का एलान कर सकती है. राज्य अध्यक्ष की रेस में केशव प्रसाद मौर्य, धर्मपाल सिंह और बी.एल. वर्मा के नाम चल रहे हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी इस पद पर नॉन-यादव ओबीसी नेता को ही रखना चाहती है.
कैबिनेट में बड़े फेरबदल की भी पूरी संभावना है. इसमें चौधरी और कुछ नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है ताकि जातीय संतुलन बनाया जा सके.
सूत्रों ने बताया, यूपी बीजेपी नेता और राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य और बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कमेश्वर सिंह ने इन मीटिंग्स का समन्वय किया. दोनों को संघ का करीबी माना जाता है. इन बैठकों में प्रमुख सचिव और अन्य विभागों के अफसर भी शामिल हुए और आरएसएस से जुड़े संगठनों के वरिष्ठ सदस्य भी मौजूद थे.
यूपी बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “26 नवंबर को हुई एक बड़ी मीटिंग पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह के घर पर हुई. इसे सेवा क्षेत्र की कैटेगरी में रखा गया था, और इसमें आरएसएस की गौ सेवा विंग के प्रतिनिधि भी शामिल हुए.”
उन्होंने कहा, “कृपा शंकर, जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आरएसएस और बीजेपी सरकारों के बीच समन्वयक हैं, उनके साथ संघ के पदाधिकारी युधवीर और धनिराम भी संगठन की तरफ से इस बैठक में मौजूद थे.”
चर्चा का फोकस गौ-संरक्षण के काम और पशुपालकों के लिए चल रही योजनाओं पर था. आरएसएस प्रतिनिधियों ने पिछले तीन साल में सरकार के काम की सराहना की, खासकर बड़े गौ-आश्रयों के निर्माण की, जिससे आवारा जानवरों की शिकायतें कम हुई हैं, उन्होंने बताया.
इसी तरह, उसी दिन एक और बैठक डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के घर पर हुई, जिसमें आरोग्य भारती — जो आरएसएस से जुड़ा संगठन है, उसके प्रतिनिधि भी मौजूद थे.
चर्चा का मुख्य मुद्दा स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं थीं, साथ ही आरएसएस और बीजेपी कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक पर भी बात हुई, जो स्थानीय अस्पतालों में इलाज को लेकर मिला था.
मीटिंग में मौजूद प्रशांत भाटिया, जो आरएसएस के अवध ज़ोन के स्पेशल कम्युनिकेशन चीफ हैं, ने खास जानकारी साझा करने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि ऐसी बैठकें सामान्य हैं, “हम नियमित रूप से फीडबैक लेते हैं. ये सामान्य प्रक्रिया है.”
सरकार और संघ के बीच एक अहम कड़ी माने जाने वाले भाटिया कुछ दिन पहले मज़दूरी और रोज़गार मंत्री अनिल राजभर के साथ हुई बैठक में भी मौजूद थे. इस बैठक में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी और संघ के कार्यकर्ता, जिनमें शंकर भी शामिल थे, मौजूद थे.
बैठक में शामिल एक मंत्री ने दिप्रिंट को बताया, “सरकार के दूसरे कार्यकाल में इस तरह की बैठक पहली बार हुई है. मुझे पहले ऐसा कोई उदाहरण याद नहीं, जहां मंत्री, अफसर, RSS पदाधिकारी और उससे जुड़े संगठन — सब एक साथ मौजूद रहे हों.”
उन्होंने कहा, “पहले व्यक्तिगत बैठकें होती थीं, लेकिन इस तरह की ग्रुप मीटिंग्स नहीं हुई थीं. उन्होंने नीतियों और उनके लागू होने पर कुछ सवाल पूछे, तो हमने अफसरों से उन्हें जानकारी देने को कहा. हमने भी अपने पॉइंट रखे.”
एक अन्य मंत्री ने दिप्रिंट को बताया कि संघ पदाधिकारी मुख्य रूप से फीडबैक लेते हैं और सुझाव देते हैं. “इसे रिपोर्ट-कार्ड प्रोसैस कहना गलत होगा. यह ज़्यादा मिल-बैठकर फीडबैक देने की बैठक थी, कि नीतियों को कैसे बेहतर किया जाए और मंत्री आरएसएस से जुड़े संगठनों के साथ कैसे काम कर सकते हैं. आरएसएस का यही तरीका है, वे अपने तरीके से फीडबैक लेते हैं.”
मंत्री ने यह भी साफ कहा कि मुख्यमंत्री या उनके डिप्टी को लेकर कोई फीडबैक नहीं लिया गया.
संघ के एक पदाधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “राम मंदिर में पूजा करने के बाद, 24 नवंबर की शाम को भागवत साकेत निलयम पहुंचे. करीब 7 बजे, योगी भी आरएसएस ऑफिस पहुंचे और उनसे मिले. यह मुलाकात एक घंटे से ज़्यादा चली. सरकार के दूसरे कार्यकाल में आरएसएस प्रमुख के साथ योगी की यह तीसरी मीटिंग थी. इससे पहले मुलाकातें अक्टूबर 2022 और अक्टूबर 2024 में हुई थीं.”
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