नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पार्टी की बात हो तो नितिन नबीन “बॉस” हैं. यह बयान ऐसे समय आया जब 45-वर्षीय बिहार नेता नितिन नबीन ने जे.पी. नड्डा की जगह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पद संभाला है.
भाजपा अध्यक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में नितिन नबीन ने पीएम मोदी के सार्वजनिक सेवा के रिकॉर्ड को अपने और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा बताया. उन्होंने कहा, “हमारे शीर्ष नेतृत्व ने, जिसने भाजपा के विस्तार में योगदान दिया है, मुझ जैसे एक साधारण कार्यकर्ता को पार्टी के सर्वोच्च पद तक पहुंचने का अवसर दिया. इसके लिए मैं आप सभी को नमन करता हूं.”
भाजपा मुख्यालय में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा ऐसी पार्टी है, जहां मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री बनने के बाद भी व्यक्ति पार्टी का कार्यकर्ता ही रहता है और नितिन नबीन उसके ‘बॉस’ होते हैं.
पिछले पार्टी अध्यक्षों की उपलब्धियों को गिनाते हुए पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि “नितिन नबीन जी हम सभी के अध्यक्ष हैं. उनकी जिम्मेदारी सिर्फ भाजपा को संभालने की नहीं, बल्कि एनडीए के साथ तालमेल बैठाने की भी है.”
मोदी ने कहा कि नितिन नबीन अपनी “सादगी और विनम्रता” के लिए जाने जाते हैं.
उन्होंने कहा कि मिलेनियल होने के नाते नितिन उस पीढ़ी से आते हैं जिसने भारत में बड़े बदलाव देखे हैं. “वे उस दौर से हैं, जिसने बचपन में रेडियो पर खबरें सुनीं और आज एआई का इस्तेमाल अच्छे से जानता है.”
उन्होंने कहा, “यह एक संस्कृति है, एक परिवार है. यहां रिश्ते सिर्फ सदस्यता से ज्यादा मायने रखते हैं. भाजपा एक तय प्रक्रिया के तहत काम करती है. पद संभालना एक व्यवस्था है, लेकिन काम की जिम्मेदारी जीवनभर की प्रतिबद्धता होती है.” इसके जरिए उन्होंने दोहराया कि भाजपा “सिर्फ एक पार्टी नहीं” है.
उन्होंने कहा, “हमारे अध्यक्ष बदलते हैं, लेकिन हमारे आदर्श वही रहते हैं. नेतृत्व बदलता है, लेकिन दिशा वही रहती है. भाजपा का स्वरूप राष्ट्रीय है, उसकी आत्मा भी राष्ट्रीय है, क्योंकि हमारा जुड़ाव स्थानीय है. हमारी जड़ें ज़मीन में गहरी हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “भाजपा ऐसी पार्टी है जहां लोग सोच सकते हैं कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, तीसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं, 50 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने थे और लगातार 25 साल से सरकार के प्रमुख रहे हैं—यह सब सच है, लेकिन मेरे लिए सबसे अहम बात यह है कि मैं एक भाजपा कार्यकर्ता हूं. हमारा नेतृत्व परंपरा से मार्गदर्शित है, अनुभव से समृद्ध है और जनसेवा व राष्ट्रसेवा की भावना के साथ संगठन को आगे बढ़ाता है.”
उन्होंने कहा, “जब पार्टी की बात होती है, तो नितिन नबीन बॉस हैं और मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं.”
पीएम ने कहा कि घुसपैठिए देश के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं और उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “दुनिया का कोई भी देश अपने यहां घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करता. भारत कभी भी घुसपैठियों को अपने लोगों और गरीबों के लिए बनी सुविधाओं को लूटने नहीं देगा. घुसपैठिए देश के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं और उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए. जो राजनीतिक दल घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें बेनकाब किया जाना चाहिए.”
इस बीच, नितिन नबीन ने आने वाले चुनावों के लिए पार्टी के अभियान की दिशा तय करते हुए विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला.
उन्होंने हाल ही में तमिलनाडु में हुई घटनाओं का ज़िक्र किया, जहां उनके मुताबिक पवित्र कार्तिगई दीपम त्योहार को रोकने की कोशिश की गई. उन्होंने कहा कि जब भी सोमनाथ, राम सेतु या भारत की सांस्कृतिक विरासत के अन्य प्रतीकों की बात होती है, विपक्षी नेता असहज हो जाते हैं.
उन्होंने कहा, “जो लोग राम सेतु के अस्तित्व को नहीं मानते, उन्हें भारतीय राजनीति में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए. हमें यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “आने वाले कुछ महीनों में तमिलनाडु, असम, केरल, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाले हैं. जनसांख्यिकी यानी आबादी में बदलाव को लेकर काफी चर्चा है. बदली हुई जनसंख्या संरचना में चीजें कैसे बदल रही हैं, यह हमारे लिए एक चुनौती है, लेकिन हमें पूरा भरोसा है कि भाजपा कार्यकर्ता अपनी मेहनत और संकल्प के दम पर इन पांचों राज्यों में पार्टी की सफलता सुनिश्चित करेंगे.”
भाजपा असम में सत्ता में है और पुडुचेरी में ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है.
नितिन नबीन ने कहा कि हाल ही में विपक्षी दलों ने तमिलनाडु में पवित्र कार्तिगई दीपम त्योहार को रोकने की कोशिश की.
उन्होंने कहा, “यह अकेला मामला नहीं है; विपक्ष ने और चीज़ों को रोकने की भी साजिश रची है. हाल ही में हमने देखा कि एक जज के खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश की गई. आज जब हम सोमनाथ की बात करते हैं और गर्व के इस पर्व को मनाने की कोशिश करते हैं, तो विपक्षी दलों के लोग बेचैन हो जाते हैं. हमारा मानना है कि ऐसी परंपराओं को रोकने वाली ताकतों का सामना करना ज़रूरी है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि राम सेतु के अस्तित्व को नकारने वालों और कार्तिगई दीपम त्योहार का विरोध करने वालों की भारतीय राजनीति में कोई जगह न हो.”
इस बात पर जोर देते हुए कि “राजनीति कोई शॉर्टकट नहीं है”, नितिन ने कहा, “राजनीति 100 मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि मैराथन है, जहां गति नहीं बल्कि सहनशक्ति की परीक्षा होती है.”
उन्होंने युवाओं से राजनीति में आने का आह्वान किया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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