नई दिल्ली: अंकिता भंडारी हत्या मामले में उत्तराखंड की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इकाई के भीतर से सख्त कार्रवाई की मांग तेज़ हो रही है. नए आरोप सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है.
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्य प्रभारी दुष्यंत गौतम को 2022 के अंकिता भंडारी हत्या मामले से जोड़ने वाले ऑडियो और वीडियो क्लिप सामने आने के बाद उत्तराखंड में दो नई एफआईआर दर्ज की गईं. इसके कुछ दिनों बाद ही पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री विजय बार्थवाल ने अब “सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच” की मांग की है, ताकि “किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या सच्चाई छुपाने की कोई संभावना न रहे.”
पूर्व कैबिनेट मंत्री ने उत्तराखंड सरकार से अपील की कि सीबीआई जांच कराई जाए ताकि “सभी तथ्य निष्पक्ष रूप से सामने आ सकें.” उन्होंने लिखा, “जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि न्याय और सच्चाई की कोई आवाज दबाई नहीं जाएगी. हमारी बेटियों की सुरक्षा के मामले में हम किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं कर सकते. यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि हमारी सामाजिक जिम्मेदारियों और नैतिक मूल्यों का सवाल है.”
दिप्रिंट से बात करते हुए बार्थवाल ने कहा कि यह मुद्दा पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है और इसी वजह से सीबीआई जांच ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है, जिससे “राजनीतिक और सामाजिक बहस” शुरू हो गई है.
उन्होंने कहा, “यह भयानक अपराध महादेव की पवित्र भूमि पर हुआ, जहां हमारी बेटियों की सुरक्षा और सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए. अंकिता भंडारी, एक युवा लड़की, ने अपने काम के दौरान भारी दबाव झेला और अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी जान गंवा दी—यह सच्चाई हम सभी को झकझोर देती है. इस मामले में तीन आरोपियों को पहले ही उम्रकैद की सज़ा दी जा चुकी है.”
19-वर्षीय अंकिता भंडारी अपनी मौत के समय ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम कर रही थीं. रिसॉर्ट के मालिक और निष्कासित बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य को उनकी हत्या के लिए उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है. सुनवाई के दौरान अंकिता के दोस्तों और सहकर्मियों ने कोर्ट को बताया था कि उन पर वीआईपी को “अतिरिक्त सेवाएं” देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसे उन्होंने मानने से इनकार कर दिया था.
हालांकि, बार्थवाल ने कहा कि बीजेपी सरकार और उत्तराखंड प्रशासन ने आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कार्रवाई की है, लेकिन “सिर्फ न्याय मिल जाना ही काफी नहीं है; यह भी ज़रूरी है कि न्याय होता हुआ साफ-साफ दिखे और अगर इस मामले में सवाल हैं, तो उनका जवाब देने के लिए निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.”
उन्होंने कहा, “इसीलिए मैं सीबीआई से निष्पक्ष जांच की जोरदार मांग करती हूं, ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या सच्चाई छुपाने की कोई गुंजाइश न रहे. हम किसी भी राजनीतिक दल से हों, लेकिन हमारी बेटियों की गरिमा, सम्मान और पहचान की रक्षा करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. अगर महादेव की इस पवित्र धरती पर हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो इस राज्य को चलाने का क्या मतलब है?”
इस मुद्दे पर बोलने वाली बार्थवाल अकेली नहीं हैं. बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी कहा है कि अगर आरोप सही हैं तो किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए. इसे गंभीर मामला बताते हुए रावत ने पिछले हफ्ते मीडिया से कहा था कि यह मुद्दा समाज के उस हिस्से से जुड़ा है, जो 50 प्रतिशत आबादी है, यानी महिलाएं.
उन्होंने कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है. इसकी गहराई से जांच करने की ज़रूरत है. मामला कोर्ट में है, इसलिए इस पर ज्यादा टिप्पणी करना संभव नहीं है, लेकिन यह बेहद गंभीर विषय है.”
इसके अलावा, उत्तराखंड में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अजेंद्र अजय ने भी इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है और जिन बीजेपी नेताओं पर आरोप लगे हैं, उनसे स्वेच्छा से पद छोड़ने की मांग की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखा, “मेरा दृढ़ विश्वास है कि अंकिता भंडारी मामला निश्चित रूप से बहुत गंभीर है. जनता के मन में किसी भी तरह का संदेह या डर न रहे, इसके लिए जो भी कानूनी कार्रवाई या सीबीआई जांच जरूरी हो, वह की जानी चाहिए.”
उन्होंने आगे लिखा, “मैं यह भी सुझाव देता हूं कि इस मामले में जिन नेताओं का नाम आया है, वे नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दें, ताकि पार्टी का हित और जनता का भरोसा बना रहे. उन्हें खुद यह घोषणा करनी चाहिए कि वे अपनी बेगुनाही साबित करेंगे और उसके बाद ही पार्टी में कोई पद स्वीकार करेंगे.”
हाल ही में दर्ज की गई दो एफआईआर—एक देहरादून में और दूसरी हरिद्वार में, ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुरेश राठौर और सहारनपुर की अभिनेत्री उर्मिला सनावर को नामजद किया गया है, जो खुद को उनकी पत्नी बताती हैं. इस साल जून में उर्मिला सनावर के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के बाद हुए विरोध के चलते बीजेपी ने राठौर को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था.
हालांकि, उत्तराखंड बीजेपी ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार किया. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि विपक्ष राजनीतिक फायदा उठाने के लिए इस मुद्दे को “बेवजह” उठा रहा है और यह भी कहा कि उत्तराखंड सरकार ने मामले में उचित कार्रवाई की है.
उस वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, “उत्तराखंड हाईकोर्ट पहले ही सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर चुका है. आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, राज्य प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई की. विपक्ष सिर्फ राजनीतिक अंक बटोरने के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है.”
मंगलवार को उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) वी. मुरुगेशन से मुलाकात की. इस दौरान कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने हत्या मामले के विभिन्न पहलुओं को लेकर एडीजी को एक ज्ञापन सौंपा.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पहले ही बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम की कथित भूमिका की सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग कर चुके हैं, हालांकि गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है.
दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट की थी कि गौतम ने उत्तराखंड के गृह सचिव को पत्र लिखकर उनके खिलाफ “भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण प्रचार” फैलाने वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने यह भी कहा था कि अगर आरोप साबित होते हैं तो वह सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लेंगे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
