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Friday, 16 January, 2026
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अजित पवार का NCP को फिर से जोड़ने का दांव पुणे और पिंपरी-चिंचवड में फेल, BJP बहुमत की ओर

पवारों का साथ आना बेकार साबित होता दिख रहा है क्योंकि BJP की लोकप्रियता संयुक्त NCP से ज्यादा रही. इससे NCP-SP के भविष्य और महायुति में अजित पवार की अहमियत पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.

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मुंबई: (ठाकरे परिवार के अलावा) एक और पारिवारिक पुनर्मिलन में, पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम चुनावों के लिए एनसीपी के दोनों गुट साथ आए थे, लेकिन रुझान बताते हैं कि यह रणनीति फेल हो गई.

दोनों नगर निगम कभी एकजुट एनसीपी के गढ़ थे, लेकिन 2017 में बीजेपी के हाथ चले गए थे. इस बार पारिवारिक गढ़ को वापस जीतने की कोशिश में पवार परिवार (शरद पवार और अजित पवार) साथ आया, लेकिन रुझान बताते हैं कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड दोनों जगह पवार परिवार को बड़ा झटका लगा है.

पुणे में दोपहर 3 बजे तक 165 सीटों में से बीजेपी 97 सीटों पर आगे थी, जबकि दोनों एनसीपी मिलकर 10 सीटों पर आगे थीं (एनसीपी-एपी 8, एनसीपी-एसपी 2). एकनाथ शिंदे की शिवसेना किसी भी सीट पर आगे नहीं थी और एमवीए (कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी, एमएनएस) 6 सीटों पर आगे थी.

पिंपरी-चिंचवड़ में 128 में से बीजेपी 85 सीटों पर आगे है, एनसीपी 35 सीटों पर आगे है (अजित पवार गुट 34; शरद पवार गुट 1), एकनाथ शिंदे की शिवसेना 7 सीटों पर आगे है और एमवीए (कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी, एमएनएस) अब तक खाता भी नहीं खोल पाई है.

पवारों का साथ आना बेकार साबित होता दिख रहा है, क्योंकि बीजेपी की लोकप्रियता संयुक्त एनसीपी से ज्यादा रही. इससे एनसीपी-एसपी के भविष्य और महायुति में अजित पवार की अहमियत पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.

हालांकि, अजित पवार ने साफ किया है कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड चुनावों में दोनों एनसीपी का साथ आना भविष्य में विलय का संकेत नहीं है, लेकिन इस करारी हार के बाद दोनों एनसीपी को अपने आगे के रास्ते पर गंभीरता से सोचना होगा.

इस बीच, बीजेपी के लिए यह प्रदर्शन पुणे और पिंपरी-चिंचवड में उसकी स्थिति को और मजबूत करता है—ये दोनों शहर कभी पवार परिवार के गढ़ हुआ करते थे.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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