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Sunday, 30 November, 2025
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पंजाब में AAP का फोन सर्वे: क्या CM मान से खुश हैं वोटर?

पंजाब के लोगों को ‘मुख्यमंत्री कार्यालय’ से कॉल आ रही है, जिसमें पूछा जा रहा है कि वे मान से खुश हैं या उन्हें कुछ बताना है.

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नई दिल्ली: पंजाब विधानसभा चुनाव में अभी डेढ़ साल बाकी हैं, लेकिन सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का “परफॉर्मेंस” सर्वे शुरू कर दिया है.

आम आदमी पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस सर्वे के नतीजे मान के लिए बहुत अहम होंगे, क्योंकि पार्टी नेतृत्व में यह चर्चा चल रही है कि एंटी-इनकम्बेंसी को मात देने के लिए क्या मुख्यमंत्री बदलने का विकल्प देखा जाए.

पंजाब के लोगों को ‘मुख्यमंत्री कार्यालय’ से कॉल आ रही है. उनसे पूछा जा रहा है कि क्या वे भगवंत मान से खुश हैं और क्या उन्हें कोई शिकायत या सुझाव देना है. सर्वे टीम का सीधा सवाल होता है—“क्या आप मुख्यमंत्री के काम से खुश हैं या नहीं?”

पार्टी सूत्रों का कहना है कि पार्टी की दिल्ली टीम यह सर्वे इसलिए कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मान अभी भी पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा बने रहने चाहिए या नहीं.

पार्टी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “मुख्यमंत्री और दिल्ली टीम के बीच तनाव पहले से बना हुआ है, लेकिन अरविंद केजरीवाल समझ चुके हैं कि पंजाब में उनके पास मान के अलावा और कोई मजबूत विकल्प नहीं है. यह सर्वे शायद यह देखने की कोशिश है कि क्या पार्टी को सच में मान के अलावा कोई दूसरा विकल्प ढूंढने की ज़रूरत है.”

दिल्ली नेतृत्व और मान के बीच सब कुछ ठीक नहीं रहा है. अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि मान दिल्ली नेतृत्व के आगे झुक जाते हैं. AAP-दिल्ली टीम की सार्वजनिक आलोचनाओं के बावजूद, सीएम मान यह छवि मिटाने में सफल नहीं हो पाए हैं.

पिछले साल दिल्ली में AAP की हार के बाद, पार्टी के ज्यादातर नेता अब चंडीगढ़ में बहुत समय बिता रहे हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पंजाब सरकार की सिविल और पुलिस मशीनरी का बड़ा हिस्सा अब सीधे दिल्ली नेतृत्व के साथ काम कर रहा है. पंजाब सरकार के ज्यादातर सीनियर अफसर और पंजाब पुलिस के अधिकारी सीधे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को रिपोर्ट कर रहे हैं.

चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित डीएवी कॉलेज के राजनीतिक विज्ञान विभाग की डॉ. कंवलप्रीत कौर ने कहा, “आज मान और दिल्ली नेतृत्व का रिश्ता ‘समझौते वाली सहअस्तित्व’ जैसा है. दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं. मान को AAP की संगठन क्षमता और ब्रांड की ज़रूरत है, जबकि पार्टी को अपने एकमात्र मुख्यमंत्री की.”

कौर ने दिप्रिंट से कहा, “लेकिन मूल फर्क बना हुआ है. मान की राजनीति पंजाब की क्षेत्रीय पहचान से जुड़ी है, जबकि दिल्ली नेतृत्व AAP को एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय प्रोजेक्ट की तरह देखता है. यही स्ट्रक्चरल टेंशन सुनिश्चित करता है कि दोनों के बीच मतभेद, कभी निजी तो कभी सार्वजनिक हमेशा बने रहते हैं.”

पिछले साल से पंजाब सरकार के संचालन में दिल्ली नेतृत्व की पकड़ साफ दिखाई दे रही है. राजनीतिक रणनीति, बड़े फैसले, महत्वपूर्ण नियुक्तियां, डैमेज कंट्रोल, सोशल मीडिया मैनेजमेंट, यह सब सीधे दिल्ली नेतृत्व की देखरेख में बताया जाता है. इससे सीएम मान की स्वतंत्र काम करने की जगह काफी कम हो गई है.

कौर ने कहा, “शायद मुख्यमंत्री खुद ही यह छवि हटाना नहीं चाहते. अगर अगले साल हालात बिगड़ते हैं और केजरीवाल चुनाव से पहले मुख्यमंत्री बदलने का फैसला लेते हैं, तो मान यह नैरेटिव बना सकते हैं कि दिल्ली टीम ने उन्हें पंजाबियों के लिए काम नहीं करने दिया.”

कोर्स करेक्शन की कोशिश

मुख्यमंत्री की लोकप्रियता समझने के अलावा, यह चल रहा सर्वे पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव (ट्यूनिंग) करने में भी मदद करेगा.

कौर ने कहा, “बिहार चुनाव से AAP के लिए पंजाब में सीख है. अगर पार्टी महिलाओं को लोन या किसानों का कर्ज माफ करने जैसे टारगेटेड आर्थिक मदद दे, तो एंटी-इनकम्बेंसी को काफी हद तक रोका जा सकता है.”

2022 विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब में फ्री बिजली का वादा AAP की जीत के सबसे बड़े कारणों में से एक था.

सर्वे में दूसरा और आख़िरी सवाल यह है कि क्या उस घर को फ्री बिजली मिल रही है. अगर निवासी ‘नहीं’ कहते हैं, तो कॉल करने वाला समझाता है कि इसका कारण यह है कि उनकी बिजली खपत 300 यूनिट की मुफ्त सीमा से ऊपर चली जाती है.

पार्टी के एक नेता ने कहा, “बहुत लोगों की आम शिकायत है कि फ्री बिजली के वादे के बावजूद उन्हें बिल मिल रहा है. सर्वे के दौरान लाभार्थियों को बताया जा रहा है कि अगर वे बिजली की खपत कम करें, तो उनका कोई बिल नहीं आएगा.”

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह सर्वे इसलिए भी किया जा रहा है कि अभी समय रहते कुछ सुधार किया जा सके. मान सरकार भारी एंटी-इनकम्बेंसी का सामना कर रही है और काम न करने तथा वादे पूरे न करने को लेकर आलोचना में है.

राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने में भी सरकार को असफल माना जा रहा है. इसके अलावा, कई बार घोषणा होने के बावजूद, पंजाब की सभी महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये देने का चुनाव से पहले किया गया वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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