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Tuesday, 11 June, 2024
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मुंबई के लिए शिवसेना बनाम सेना की लड़ाई तेज़, आदित्य ठाकरे और शिंदे के बेटे श्रीकांत आमने-सामने

आदित्य ठाकरे मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की गतिविधियों के प्रभारी रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र की राजधानी सीएम एकनाथ शिंदे के लिए एक कमजोर कड़ी रही है.

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मुंबई: आदित्य ठाकरे के मुंबई में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की गतिविधियों के दृढ़ता से प्रभारी होने के साथ, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने अपनी अगली पीढ़ी के नेता- शिंदे के पुत्र श्रीकांत और मुख्यमंत्री एकनाथ के साथ ठाकरे वंशज से लड़ने का फैसला किया है.

श्रीकांत अपनी शाखाओं, शाखा संपर्क अभियान के साथ पार्टी के आउटरीच कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं. शाखा शिवसेना की जमीनी स्तर की प्रशासनिक इकाई है और लोगों के साथ इसका पहला संपर्क बिंदु है. शिवसेना कार्यकर्ताओं ने दिप्रिंट को बताया कि पिछले एक हफ्ते से श्रीकांत शाखाओं में जा रहे हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों से बातचीत कर रहे हैं और उनकी शिकायतें सुन रहे हैं.

महाराष्ट्र के कल्याण से सांसद श्रीकांत भी मुंबई में नौकरशाहों से मिल रहे हैं, वे मुंबई में शाखा यात्राओं और अन्य स्थानीय मुद्दों पर कुछ शिकायतों को सुन रहे हैं – जैसे कि कोलीवाड़ा (मछली पकड़ने वाले गांवों) का पुनर्विकास और शहर के कुछ हिस्सों का सौंदर्यीकरण करना.

दिप्रिंट से बात करते हुए, शिंदे वंशज ने कहा, “मैं सिर्फ यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि पार्टी कार्यकर्ताओं को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उनसे जुड़ने की कोशिश कर रहा हूं. और मैं सिर्फ उनकी बात ही नहीं सुनता, मैं इन मुद्दों को तुरंत हल करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ फॉलो अप भी कर रहा हूं.”

मुंबई में अपने पूर्व सहयोगी आदित्य ठाकरे के काम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मैं किसी के साथ तुलना नहीं करना चाहता”. उन्होंने कहा कि “मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि हम बड़े नेता नहीं हैं जिनके चेहरे आप बिलबोर्ड पर देखेंगे. असल में हम जमीन पर पार्टी के कार्यकर्ता हैं.”

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दिप्रिंट टिप्पणी के लिए शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और प्रवक्ता अरविंद सावंत से कॉल और टेक्स्ट संदेश पर संपर्क किया, लेकिन इस रिपोर्ट के प्रकाशन के समय तक उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. प्रतिक्रिया मिलने के बाद कॉपी को अपडेट कर दिया जाएगा.

पिछले साल जून में, एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के विधायकों के विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिससे पार्टी में विभाजन हुआ और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार को गिरा दिया, जिसमें ठाकरे के नेतृत्व वाली सेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस शामिल थी. इसके बाद शिंदे ने मुख्यमंत्री की बागडोर संभालते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ अपनी सरकार बनाई.

शिंदे के लिए, जिन्होंने मुंबई के उपग्रह शहर ठाणे और उसके आसपास के क्षेत्रों में अविभाजित शिवसेना के मामलों को संभाला था, मुंबई एक कमजोर कड़ी रही है. उनके बेटे श्रीकांत ने भी पहले मुंबई में बड़े पैमाने पर मैदान में काम नहीं किया है.

मुंबई में पार्टी की उपस्थिति का विस्तार करने और श्रीकांत शिंदे को शहर में पार्टी के चेहरे के रूप में पेश करने का प्रयास बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनावों से पहले आता है, जो इस साल या अगले साल की शुरुआत में होने की उम्मीद है. मुंबई नागरिक निकाय 25 वर्षों से अविभाजित शिवसेना का गढ़ रहा है.


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शाखा संपर्क अभियान

दशकों तक, अविभाजित शिवसेना ने अपनी शाखाओं के माध्यम से लगभग समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था चलाई. बंटवारे के बाद, सीएम शिंदे को मुंबई में इन इकाइयों के मौजूदा नेटवर्क के साथ अपनी शाखा स्थापित करने की चुनौती का सामना करना पड़ा, जो ज्यादातर ठाकरे परिवार के प्रति वफादार थे.

शिंदे खेमे के 40 शिवसेना विधायकों में से केवल पांच मुंबई से हैं, और अविभाजित शिवसेना के मुंबई नगरसेवकों में से कुछ ने ही शिंदे का साथ छोड़ा है.

इस पृष्ठभूमि में, शाखा संपर्क अभियान का उद्देश्य यह भी दिखाना है कि कैसे शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की शाखाएं, शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं, न कि ठाकरे के अधीन वाली गुट.

पार्टी ने पिछले हफ्ते अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शाखा संपर्क अभियान का एक टीज़र जारी किया था, जिसमें बाल ठाकरे द्वारा पार्टी के जन कल्याणकारी कार्यक्रमों के केंद्र के रूप में शाखाओं की विरासत शुरू करने और एकनाथ शिंदे की अवधारणा को आगे ले जाने के बारे में बात की गई थी.

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की एक वरिष्ठ नेता शीतल म्हात्रे ने दिप्रिंट को बताया कि विभाजन के एक साल में, उनकी पार्टी पूरे मुंबई में लगभग सौ शाखाएं स्थापित करने में सक्षम रही है, जहां शहर के अधिकांश 36 विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम दो या अधिक शाखाएं हैं.

उन्होंने कहा, “हमने हर जगह शाखा प्रमुख नियुक्त किए हैं और सभी सौ शाखाओं में कुल मिलाकर लगभग 80 प्रतिशत प्रशासनिक पद भरे हैं.”

इसकी तुलना में, मुंबई में 227 पार्षद वार्डों में से प्रत्येक में शिवसेना (UBT) की एक शाखा है.

श्रीकांत का मुंबई की ओर लगाव

पार्टी के अनुसार, जून की शुरुआत से, श्रीकांत ने मुंबई में बाइकुला, बांद्रा, घाटकोपर, दहिसर, माहिम और प्रभादेवी जैसे क्षेत्रों में अपनी पार्टी की लगभग 10 से 12 शाखाओं का दौरा किया है.

विजय लिपारे, भायखला में शिंदे के नेतृत्व वाली सेना के विधानसभा संघ (प्रशासक) ने दिप्रिंट को बताया, “श्रीकांत शिंदे जी प्रत्येक शाखा में लगभग 1-1.5 घंटे बिताते हैं, शाखा और उप शाखा (उप) प्रमुखों के साथ बातचीत करते हैं. वह इस बात का जायजा ले रहे हैं कि शाखा किस तरह का काम कर रही है, किसमें सुधार की जरूरत है और इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं. यह सभी कार्यकर्ताओं को एक मजबूत संदेश भेजता है कि वरिष्ठ नेतृत्व सीधे उनसे मिलने आ रहे है, उनकी बातें सुन रहे है.”

उन्होंने कहा, “यह सच है कि श्रीकांत जी ने इससे पहले मुंबई में काम नहीं किया है, लेकिन एक अनुभवी सांसद होने के नाते उनमें बहुत प्रशासनिक कौशल है. और इस तरह का कार्यक्रम शहर में उनके नेतृत्व को लोकप्रिय बनाने में भी मदद करता है.”

शिवसेना में विभाजन के बाद, आदित्य ठाकरे ने एक समान शाखा आउटरीच अभियान चलाया, व्यक्तिगत रूप से शहर भर में इन छोटी प्रशासनिक इकाइयों का दौरा किया और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत की.

श्रीकांत भी मुंबई से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर नौकरशाहों के साथ बैठकें करते रहे हैं, ठीक उसी तरह जब आदित्य पिछली एमवीए सरकार में राज्य के कैबिनेट मंत्री थे और तब बैठकें करते थे.

अप्रैल में, श्रीकांत ने मरीन ड्राइव और फोर्ट क्षेत्रों में लंबित कार्यों पर चर्चा करने के लिए बीएमसी आयुक्त इकबाल सिंह चहल और वरिष्ठ नागरिक अधिकारियों से मुलाकात की, जिसका उद्देश्य इन क्षेत्रों के विरासत मूल्य की रक्षा करना और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे का उन्नयन करना था.

मंगलवार को श्रीकांत ने चहल और वरिष्ठ निकाय अधिकारियों के साथ एक और बैठक की. उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि यह बैठक मुख्य रूप से उन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए थी जो अब तक शाखा यात्राओं के दौरान उनके सामने आए थे.

उन्होंने कहा, “मैंने झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण के पारगमन शिविरों में मरम्मत, वर्षों से पारगमन आवास में रहने वाले लोगों के लिए राज्य सरकार के साथ एक उचित नीति, कोलीवाड़ा के विकास जैसे मुद्दों को उठाया. केवल लोगों की शिकायतों को सुनने और उन पर कार्रवाई नहीं करने का कोई मतलब नहीं है.”

(संपादन: अलमिना खातून)
(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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