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Friday, 9 January, 2026
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ठाकरे परिवार के साथ आने में कोई हताशा नहीं: आदित्य ने BMC चुनाव को मुंबई की पहचान बचाने की लड़ाई बताई

दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में, शिवसेना (UBT) नेता ने कहा कि शहर के कई इंफ्रास्ट्रक्चर के काम उनके पिता उद्धव के नेतृत्व में शुरू और पूरे किए गए थे, और बीजेपी ने सिर्फ 'फीता काटा' था.

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मुंबई: मुंबई के हाई-प्रोफाइल नगर निगम चुनाव के लिए जैसे-जैसे प्रचार तेज हो रहा है, वैसे-वैसे शहर की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का श्रेय लेने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी लड़ाई चल रही है.

शिवसेना (यूबीटी) नेता और विधायक आदित्य ठाकरे ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह उन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का श्रेय ले रही है, जिनकी शुरुआत पिछली सरकार ने की थी.

आदित्य ठाकरे ने दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अटल सेतु, कोस्टल रोड, बीडीडी चॉल पुनर्विकास परियोजनाएं, मेट्रो लाइनें और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड जैसे कई काम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शुरू और लागू किए गए थे, जबकि बीजेपी ने सिर्फ “रिबन काटे”.

“मुझे एक भी फोटो दिखाइए, जिसमें बीजेपी  ने कोई प्रोजेक्ट किया हो. दरअसल, बीजेपी ने कोस्टल रोड के भूमिपूजन का बहिष्कार किया था, क्योंकि यह उद्धव ठाकरे ने किया था. उन्होंने इसलिए किया, क्योंकि यह हमारा प्रोजेक्ट था,” आदित्य ने कहा.

उन्होंने आगे कहा, “बीजेपी ने इन प्रोजेक्ट्स में बस रिबन काटने का काम किया, क्योंकि उन्होंने हमारी सरकार गिरा दी और उन्हें किस्मत से यह मौका मिल गया.”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को एक रैली में आदित्य के आरोपों को खारिज किया.

“कुछ लोग यहां यह कहने आए हैं कि उन्होंने मुंबई में बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बनाई हैं. लेकिन ये पब्लिक है, सब जानती है. अगर आप आधी रात को भी किसी मुंबईकर को जगा दें और पूछें कि कोस्टल रोड, बीडीडी चॉल पुनर्विकास और मेट्रो लाइन किसने बनाई, तो वह कहेगा कि यह महायुति ने किया है,” उन्होंने कहा.

करो या मरो की स्थिति

बहुप्रतीक्षित बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव 15 जनवरी को होंगे और अगले दिन मतगणना होगी. तीन साल बाद हो रहे इन चुनावों को लेकर सभी दलों के बीच कड़ी टक्कर है, क्योंकि बीएमसी देश की सबसे अमीर नगर निकाय है, जिसका बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है, और जिस पार्टी का उस पर नियंत्रण होगा, उसे जबरदस्त राजनीतिक और आर्थिक ताकत मिलेगी.

पिछले 25 सालों तक बीएमसी पर अविभाजित शिवसेना का शासन रहा, बीजेपी उसके साथ सत्ता में रही, सिवाय 2017 से 2022 के कार्यकाल के, जब बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं. उस समय 227 सदस्यीय निगम में बीजेपी को 82 सीटें और शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं. लेकिन अब शिवसेना के विभाजन के बाद बीजेपी को बीएमसी पर कब्जा करने की अच्छी संभावना दिख रही है.

इस बार मुकाबले ने नया रूप ले लिया है. मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन, जिसमें एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का धड़ा और बीजेपी शामिल हैं, और उद्धव ठाकरे की शिवसेना तथा राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेतृत्व वाले फिर से सक्रिय विपक्षी गठबंधन के बीच है.

शहर में कमजोर हो चुकी ठाकरे खेमे की ताकत अब साझा ‘मराठी मानूस’ के मुद्दे पर प्रचार कर रही है, ताकि क्षेत्रीय समर्थन को एकजुट किया जा सके. बीएमसी चुनाव मुंबई में ठाकरे विरासत की बड़ी परीक्षा होंगे.

आदित्य ने कहा कि वे यह चुनाव “मुंबई को बचाने” के लिए लड़ रहे हैं, क्योंकि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद कई अहम परियोजनाएं गुजरात भेज दी गई हैं और यह शहर के लिए “करो या मरो” की स्थिति है.

उन्होंने कहा, “मराठी मानूस पर जो खतरा है, उसे महाराष्ट्र में बीजेपी के 10 साल के शासन को देखकर समझा जा सकता है. बड़ी इंडस्ट्री गुजरात भेज दी गईं. बुलेट ट्रेन गुजरात गई, गुजरात को ज्यादा स्टेशन मिले. धारावी का ‘अदानिफिकेशन’, मुंबई की 1,600 एकड़ जमीन, बिना टैक्स दिए, बिना प्रीमियम दिए और वहां रहने वाले लोगों को उनका हक का घर दिए बिना. क्यों. क्योंकि बीजेपी की विचारधारा यह है कि मुंबई गुजरात जाए, महाराष्ट्र के साथ न रहे,” उन्होंने कहा.

उन्होंने आगे कहा, “मुंबई महाराष्ट्र को लड़ाई के बाद मिली थी, यह ऐसे ही नहीं दी गई थी.”

आदित्य जिन परियोजनाओं का जिक्र कर रहे थे, उनमें वेदांता-फॉक्सकॉन सेमीकंडक्टर परियोजना शामिल है, जिसे पहले महाराष्ट्र में लगाया जाना था, लेकिन सितंबर 2022 में इसे गुजरात शिफ्ट कर दिया गया. एक साल बाद फॉक्सकॉन ने वेदांता के साथ संयुक्त उद्यम से खुद को अलग कर लिया.

इसी तरह, केंद्र सरकार द्वारा 2020 में शुरू की गई बल्क ड्रग पार्क परियोजना को रायगढ़ में लगाने का प्रस्ताव महाराष्ट्र ने भेजा था, लेकिन इसके लिए गुजरात को चुना गया.

ये अकेली परियोजनाएं नहीं थीं, जो महाराष्ट्र से गुजरात चली गईं. टाटा-एयरबस परियोजना नागपुर में प्रस्तावित थी, लेकिन अक्टूबर 2024 में इसे गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया. नागपुर में प्रस्तावित 8,000 करोड़ रुपये की सोलर पैनल परियोजना भी पिछले साल गुजरात भेज दी गई.

मुंबई की पहचान बचाने की लड़ाई

आदित्य ठाकरे ने कहा कि इस चुनाव में लड़ाई उनकी पार्टी के काम को दिखाने और मुंबई की पहचान बचाने की है.

उन्होंने इस लड़ाई की तुलना 1950 के दशक के संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से की, जब मराठी मानुष मुंबई को महाराष्ट्र का हिस्सा बनाने के लिए एकजुट हुए थे.

अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने उदाहरण दिए कि कैसे शहर के कुछ हिस्सों में “मराठी” होने के कारण लोगों को घर देने से मना किया गया और नॉन-वेज खाने पर उनका मजाक उड़ाया गया.

उन्होंने कहा कि कई सालों तक यह शहर सह-अस्तित्व का प्रतीक रहा, लेकिन बीजेपी शासन में यह खतरे में है.

उन्होंने कहा, “कई हिंदी भाषी लोग सालों से यहां खुशी से रह रहे हैं. वे अपने सपनों के पीछे यहां आते हैं. यही हम कहते हैं. जब बीजेपी कहती है कि हम मराठियों और गैर-मराठियों को बांटते हैं, तो हमारा मुद्दा मराठियों और यहां आने वाले हर व्यक्ति के लिए बराबर अधिकार, बराबर आज़ादी और बराबर आवाज़ का है.”

ठाकरे ने यह भी कहा कि शहर में लंबे समय से शांति से रहने वाले कई अल्पसंख्यक ‘ठाकरे नाम’ पर भरोसा करते हैं.

महा विकास आघाड़ी बनने के बाद से शिवसेना (यूबीटी) ने अल्पसंख्यक मतदाताओं को अपने साथ जोड़ा है. ठाकरे ने कहा कि अल्पसंख्यक ठाकरे परिवार पर भरोसा करते हैं क्योंकि मुख्यमंत्री रहते हुए उद्धव ठाकरे ने किसी की जाति, पंथ या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया.

आदित्य ने कांग्रेस के इस तर्क को भी खारिज किया कि शिवसेना (यूबीटी) को अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस की वजह से मिले.

“अगर कांग्रेस को लगता है कि अल्पसंख्यक उनके कारण हमारे पास आए, तो उनकी सोच को शुभकामनाएं. अल्पसंख्यक—जैन, सिख, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध—हमारे लिए वे सभी भारत के नागरिक हैं. बीएमसी और राज्य में हमारे शासन के दौरान हमने धर्म देखे बिना पानी, बिजली और बेस्ट बसें दीं. किसी तरह का भेदभाव बिल्कुल नहीं था,” उन्होंने कहा.

“कोविड के दौरान हमने जाति, पंथ, धर्म या लिंग देखे बिना लाखों जानें बचाईं. हमने उन्हें सिर्फ महाराष्ट्र के नागरिक के रूप में देखा और पानी के मीटर दिए. भेदभाव हमसे नहीं आता. हम सिर्फ अपनी ‘अस्मिता’ बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. हम पिछले 50-60 सालों से साथ रहते आए हैं,” उन्होंने जोड़ा.

मुंबई खतरे में क्यों है

ठाकरे ने कहा कि शिवसेना में विभाजन के बावजूद लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 16 प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर बनाए रखा, क्योंकि अल्पसंख्यक समुदायों ने बड़ी संख्या में पार्टी को वोट दिया.

उनके अनुसार इसका कारण यह था कि तब एमवीए साथ था और कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा थी. लेकिन बीएमसी चुनाव में कांग्रेस अलग लड़ रही है.

उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना (यूबीटी) सत्ता में आती है तो वह मुंबई की “पहचान” बनाए रखेगी.

“सामाजिक ताने-बाने को बिना टूटने दिए सुरक्षित रखना ही शहर की मुख्य पहचान है,” आदित्य ने कहा.

उन्होंने यह भी कहा कि उद्धव और राज पेशे और स्वभाव से कलाकार हैं, इसलिए वे मुंबई को एक खास सौंदर्य-बोध के साथ देखना चाहते हैं.

“मुंबई की एक पहचान होनी चाहिए. जब आप सड़कें, फुटपाथ और ट्रैफिक आइलैंड डिजाइन करते हैं, तो उसमें समझ होनी चाहिए. शहर विचारधाराओं—राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और उद्यमशील—का मेल होना चाहिए. वही शोर शहर है,” आदित्य ने कहा.

ठाकरे परिवार का बंधन

आदित्य ने जोर देकर कहा कि उनका विस्तारित परिवार 20 साल बाद फिर साथ आया है और नतीजे चाहे जो हों, यह बंधन बना रहेगा.

एक साल पहले अभिनेता-निर्देशक महेश मांजरेकर के साथ एक पॉडकास्ट में एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने कहा था कि वे मुंबई के लिए अपने तब अलग-थलग पड़े चचेरे भाई उद्धव ठाकरे से मतभेद भुलाने को तैयार हैं.

इस बयान का लगभग तुरंत उद्धव ठाकरे ने जवाब दिया, जिससे दोनों भाइयों में सुलह की चर्चा शुरू हुई.

इसके बाद मराठी भाषा के मुद्दे और महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी थोपने के आरोपों पर 20 साल में पहली बार वे एक सार्वजनिक मंच पर साथ आए. बाद में परिवार शादियों, पारिवारिक कार्यक्रमों, जन्मदिनों और त्योहारों में मिलता रहा.

परिवार द्वारा साझा किए गए वीडियो और तस्वीरों में यह रिश्ता मजबूत होता दिखा.

“दो भाइयों के साथ आने में कोई हताशा नहीं है. हमें एहसास हुआ कि हमारी जिंदगी में एक खालीपन था, जो अब भर रहा है. रिश्ता बहुत मजबूत है और यह एक अच्छा एहसास है. हम निश्चित रूप से साथ रहेंगे,” आदित्य ने कहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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