scorecardresearch
Tuesday, 13 January, 2026
होमराजनीतिRSS के कामकाज को समझने पहुंचा चीन कम्युनिस्ट पार्टी का प्रतिनिधिमंडल

RSS के कामकाज को समझने पहुंचा चीन कम्युनिस्ट पार्टी का प्रतिनिधिमंडल

संघ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, चीन के प्रतिनिधिमंडल ने केशव कुंज में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की. यह मुलाकात सीपीसी के अनुरोध पर शिष्टाचार भेंट के तौर पर हुई.

Text Size:

नई दिल्ली: चीन कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कामकाज को लेकर उत्सुक है. मंगलवार को नई दिल्ली में संघ मुख्यालय के दौरे के दौरान सीपीसी प्रतिनिधिमंडल ने इससे जुड़े सवाल किए.

यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब एक दिन पहले ही सीपीसी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मुख्यालय का दौरा किया था.

संघ सूत्रों के अनुसार, चीन के प्रतिनिधिमंडल ने केशव कुंज में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की. आरएसएस से जुड़े सूत्रों ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया. एक वरिष्ठ संघ पदाधिकारी ने कहा कि करीब एक घंटे की यह बैठक सीपीसी के अनुरोध पर हुई.

उस पदाधिकारी ने कहा, “यह एक शिष्टाचार भेंट थी. (आरएसएस प्रमुख मोहन) भागवत जी यात्रा पर थे, इसलिए मौजूद नहीं थे. प्रतिनिधिमंडल ने दत्तात्रेय होसबाले से मुलाकात की. बैठक का कोई खास एजेंडा नहीं था.”

पिछले साल अगस्त में आरएसएस ने कई देशों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया था, लेकिन चीन के राजनयिकों को न्योता नहीं दिया गया था. यह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के व्याख्यान कार्यक्रम के लिए था, जो संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत हुआ था. यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के बाद लिया गया था. पाकिस्तान और तुर्किये के प्रतिनिधिमंडलों को भी आमंत्रित नहीं किया गया था.

चीन की सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों की बीजेपी के साथ बैठक छह साल बाद हुई है.

सीपीसी का इंटरनेशनल लायजन डिपार्टमेंट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी-टू-पार्टी बातचीत का मुख्य विभाग है. बीजेपी शुरुआती 2000 के दशक से ऐसे आपसी दौरों में शामिल रही है.

जनवरी 2011 में, जब नितिन गडकरी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल चीन गया था. 2019 में अरुण सिंह के नेतृत्व में एक और प्रतिनिधिमंडल चीन गया था.

बीजेपी के विदेश मामलों के प्रकोष्ठ के प्रमुख विजय चौथाईवाले ने सोमवार शाम एक्स पर पोस्ट किया, “चीन कम्युनिस्ट पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसकी अगुवाई महामहिम सुश्री सुन हाईयान कर रही थीं, आज बीजेपी मुख्यालय पहुंचा. पार्टी महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने सीपीसी के साथ पार्टी-टू-पार्टी संवाद को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की. भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग भी इसमें शामिल हुए.”

संघ की बात करें तो 2009 में भी ऐसी ही एक बैठक हुई थी, जब बीजेपी और आरएसएस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बीजिंग गया था. आरएसएस नेता प्रदीप जोशी ने 2014 में चीनी इतिहास और नैतिकता की पाठ्यपुस्तकों में संशोधन कर चीन की महानता को फिर से स्थापित करने के सीपीसी के रुख का स्वागत किया था.

सोमवार को बीजेपी के साथ हुई बैठक 2020 में हुए गलवान संघर्ष के बाद पहली ऐसी बैठक है. बैठकों का यह सिलसिला भारत और चीन के रिश्तों को नए सिरे से संतुलित करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है. यह 21 अक्टूबर 2024 को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव वाले इलाकों से पीछे हटने के समझौते के बाद हुआ है.

गलवान में हुई झड़पों के बाद भारत और चीन के रिश्ते चार साल से ज्यादा समय तक जमे रहे. 2024 के समझौते के बाद दोनों देशों ने भरोसा बढ़ाने के कई कदम उठाने पर सहमति जताई. इसे भारत सरकार की ओर से चीन के साथ रिश्ते सामान्य करने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: RSS के 100 साल में विरोधियों ने भी हिंदू हित के लिए आवाज़ उठाई: दत्तात्रेय होसबाले


 

share & View comments