Tuesday, 5 July, 2022
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मालदीव में उथल-पुथल से हिंद महासागर में भारत के हित दांव पर, क्यों मोदी को आगे आना चाहिए

तेजी से बढ़ते मामलों के बीच भारत के पड़ोसी देशों ने कोविड टीकाकरण पर अपने लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूर्व की ओर—चीन की तरफ—देखना शुरू कर दिया है.

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अपने घर माले में बम हमले के शिकार बने मालदीव के स्पीकर मोहम्मद नशीद ने कई अहम और जीवन रक्षक सर्जरी के कुछ दिनों बाद अपना 54वां जन्मदिन सोमवार को जर्मनी के बर्लिन स्थित एक सैन्य अस्पताल में मनाया.

भारत सहित दुनियाभर के कई देशों की फोरेंसिक टीमें पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है. तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. 6 मई को रात 8:27 बजे नशीद घर के बाहर निकले ही थे कि रिमोट-कंट्रोल संचालित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी), जिसे मोटरसाइकिल में लगाया गया था, में धमाका हो गया था. राष्ट्रीय सुरक्षा सेवाओं पर संसदीय समिति ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

निश्चित तौर पर हिंद महासागर में फिर से उथल-पुथल मच गई है. भले ही 2007 में 12 पर्यटकों को घायल करने वाले विस्फोट के बाद यह पहला बड़ा बम धमाका हलचल मचाने के लिए काफी न हो लेकिन पांच लाख लोगों की आबादी वाला यह छोटा-सा दक्षिण एशियाई देश 60 फीसदी कोविड पॉजिटिविटी रेट से लड़खड़ा रहा है. वैसे अभी तक कुल मिलाकर 101 लोगों की मौत हुई है, लेकिन महामारी को लेकर सरकार के चिंतित होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि आबादी कई द्वीपों और एटोल में बिखरी हुई है.

अब ऐसा लगता है कि मालदीव को वैक्सीन की एक लाख खुराक की सख्त जरूरत है जिसका ऑर्डर उसने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को दिया था, लेकिन उसे यह खेप नहीं मिल सकी क्योंकि भारत में कोविड की स्थिति भयावह होने पर सभी निर्यात बंद कर दिए गए हैं.

बांग्लादेश और नेपाल भी इसी स्थिति से गुजर रहे हैं. तेजी से बढ़ते मामलों के बीच भारत के पड़ोसी देशों ने कोविड टीकाकरण पर अपने लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूर्व की ओर—चीन की तरफ—देखना शुरू कर दिया है.

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नींव पर निर्माण का समय

मालदीव की अपनी एक अलग ही कैटेगरी होने के दो कारण हैं. पहला यह कि जब 2018 में मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) ने नाटकीय ढंग से अब्दुल्ला यामीन की सरकार को उखाड़ फेंका, तो इसके तारीफ में भारत की आवाज सबसे मुखर थी. याद कीजिए कि उस समय वहां स्थिति ऐसी बनी हुई थी कि एमडीपी का नेतृत्व करने वाले ज्यादातर नेता निर्वासन—अधिकतर कोलंबो और ब्रिटेन में थे—पर थे और यामीन ने चीन को मालदीव में कुछ भी करने की स्वतंत्रता दे रखी थी.

राष्ट्रपति के रूप में इब्राहिम सोलिह और स्पीकर के तौर पर नशीद, दोनों ने भारत के साथ रिश्ते मजबूत रखने पर काफी निवेश किया था. इनके साथ एमडीपी की सत्ता में वापसी बाकी दक्षिण एशियाई देशों के साथ भारत के संबंधों में एक मॉडल साबित हुआ है.

भारत ने भी पूरी गर्मजोशी से इसका जवाब दिया. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दूरदराज के द्वीपों का अच्छा-खासा विकास करने पर कम से कम 2 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं—जिसमें बेहतर सड़कें, सबसे दक्षिणी द्वीप अड्डू में एक विकास परियोजना, 34 द्वीपों में जल और स्वच्छता परियोजना, और ग्रेटर माले में कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट शामिल है.

क्या अपवाद स्वरूप केवल एक लाख वैक्सीन खुराक मालदीव को भेजने से भारत को कोई नुकसान होगा? निश्चित तौर पर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहा है कि भारतीयों की अपनी जरूरतें पूरा किए बिना वैक्सीन की खुराक विदेशों में बांटना वैक्सीन रणनीति की खामी है—विदेश मंत्री एस जयशंकर की आलोचना किए जाने का यह बड़ा कारण है. (बेशक, जयशंकर इस आधार पर की जाने वाली आलोचना को कम कर सकते हैं कि अमेरिका ने अपनी इस्तेमाल नहीं हुई एस्ट्राजेनेका खुराक का एक हिस्सा भारत और अन्य देशों को भेजा है.)


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चुनौतियों पर ध्यान देना होगा

हिंद महासागर में भारत का बहुत कुछ दांव पर है. चीन घेरेबंदी में जुटा है, श्रीलंका की राजपक्षे सरकार को कोविड वैक्सीन की 600,000 खुराक दे रहा है और मार्च में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कर चुका है, जिसमें कोलंबो के मानवाधिकार रिकॉर्ड की निंदा की मांग की गई थी—भारत गैरहाजिर रहा था.

ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि मालदीव में एमडीपी के अंदर सब कुछ ठीकठाक नहीं है, और यह भी कि नशीद स्पीकर के तौर पर अपनी सीमित भूमिका में ही नहीं रहना चाहते हैं और मालदीव की राष्ट्रपति प्रणाली को संसदीय प्रणाली में बदलने को उत्सुक हैं, जिसमें वह प्रमुख नेतृत्व की भूमिका निभा सकें. द टाइम्स ऑफ अड्डू के मुताबिक, नशीद ने इस संबंध में राष्ट्रपति सोलिह को एक पत्र भी भेजा है. पार्टी के आंतरिक संकट का हालिया नतीजा यह भी है कि एमडीपी को माले में स्थानीय चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है.

सब कुछ दांव पर लगे होने वाले टकराव की स्थिति को सुलझाना सिर्फ कहने में आसान होता है, लेकिन भारत को अपनी बढ़ी हुई जिम्मेदारी समझना जरूरी है, यदि वह क्षेत्रीय खिलाड़ी बनना चाहता है—न केवल हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना होगा, बल्कि मालदीव जैसे हिंद महासागर के देशों के आंतरिक हालात पर भी नजर रखनी होगी.

फिलहाल, नशीद गंभीर रूप से घायल है और बर्लिन के एक अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है; बाकी मालदीव को इंतजार है बम विस्फोट की जांच पूरी होने का. अभी तक किसी भी आतंकी समूह ने हमले का दावा नहीं किया है, लेकिन जांचकर्ता स्थानीय मजहबी चरमपंथियों की ओर इशारा कर रहे हैं. शायद किसी स्थानीय समूह ने नशीद के सिर पर इनाम घोषित कर रखा हो.

बम विस्फोट ने मालदीववासियों को यह अहसास दिलाया है कि नशीद अब भी एक निशाना बने हुए हैं, शायद कोई उनके लगातार बढ़ते कद को सीमित करना चाहता है. साथ ही इस बात को भी रेखांकित करता है कि यदि भारत हिंद महासागर क्षेत्र के साथ विशेष रिश्ता चाहता है, तो उसे मालदीव जैसे द्वीप राष्ट्रों के साथ अपना जुड़ाव पहले से कहीं ज्यादा मजबूत करने की जरूरत पड़ेगी.


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